
बुध का तुला राशि मे वक्री गोचर 27 सितंबर से 18 अक्टूबर 2021
मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि , व्यापार और वाणी का कारक माना गया है । यह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है । इसे कन्या राशि में उच्च का माना जाता है और मीन राशि में नीच का । इस ग्रह के बारे में खास बात यह है कि यह अपनी राशि कन्या में ही उच्च भी होता है और यही उसकी मूल त्रिकोण राशि भी है ।
अश्लेषा , ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र बुध के नक्षत्र हैं । ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार नवग्रह मंडल में बुध को राजकुमार का दर्जा दिया गया है और जिस प्रकार एक राजकुमार सीखने की आयु में होता है उसी प्रकार बुध का स्वभाव है अर्थात यह स्वभाविक रुप से बुद्धि का परिचायक है जो हमें नई – नई चीजें सीखने के लिए जिज्ञासु बनाता है । इसके साथ ही संगति के असर के रूप में ये अति शुभ ग्रहों के साथ युति करें या संबंध बनाए तो शुभ फल तथा अशुभ ग्रहों से संयोग होने पर अशुभ फल देता है । बुध ग्रह वात , पित्त और कफ़ त्रिदोष उत्पन्न करने की सामर्थ्य रखता है और दिन और रात सर्वदा बली रहता है । डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि बुध के वक्री होने से सामान्यता कुछ कार्यों में विलंब होता है और सफलता के लिए प्रयास थोड़े अधिक करने पड़ते हैं । लेकिन बुध वक्री अवस्था में अधिक अच्छे फल भी देता है और व्यापार तथा वाणिज्य में अच्छा फल प्रदान करता है । कोई भी ग्रह अपनी महादशा , अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा में सर्वाधिक प्रभावशाली होता है और यदि उसे अनुकूल गोचर प्राप्त हो जाए तो फल पूर्णतया प्राप्त होते हैं । तो आइए अब विस्तार से जानते हैं बुध के इस गोचर का सभी राशियों पर क्या प्रभाव होगा ।
जातक की तर्क शक्ति , गणित , संचार , लेखन , व्यापार , वाणी और बुद्धि का प्रतिनिधित्व करने वाला बुध ग्रह , एक बार फिर अपना स्थानांतरण करते हुए जल तत्व की राशि मीन से , मेष राशि में गोचर करेगा । ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार बुध दूसरे ग्रहों के मुकाबले सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह होता है , जिसके गोचर की अवधि अन्य ग्रहों से सबसे कम होती है । इस गोचर के दौरान आपकी भावनाएं आपके मूड के अनुसार बदल सकती हैं । बुध , जो संचार , व्यावसाय, विश्लेषणात्मक और अवलोकन कौशल का कारक है , तुला राशि में वक्री हो रहा है । यह ग्रह बुद्धि , ज्ञान , मनोविज्ञान , विचारों और सूचनाओं के आदान – प्रदान के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है । बुध ग्रह 27 सितंबर 2021 को सबुह 10:38 पर वक्री गति शुरू करेगा दिनांक 18 अक्टूबर तक यह इसी स्थिति में रहेगा और उसके बाद 18 अक्टूबर 2021 को कन्या राशि में मार्गी गति शुरू करेगा । ऐसे में बुध के इस गोचर से हर राशि के जातक की जिंदगी में कोई न कोई परिवर्तन ज़रूर आएगा ।
मेष :~ मेष राशि के जातकों के लिए बुध तीसरे और छठे घर का स्वामी है और यह आपके सातवें घर में वक्री अवस्था में होगा । सप्तम भाव विवाह और साझेदारी का भाव है इसलिए यह वैवाहिक जीवन में कुछ उतार – चढ़ाव और अशांति लेकर आ सकता है और आप दोनों के बीच कुछ गलतफहमी भी पैदा कर सकता है । बुध के इस वक्री के दौरान आपको यह सलाह दी जाती है कि यदि शादी करने वाले हैं तो इस दौरान शादी की तारीख निर्धारित न करें , इसे तब तक स्थगित रखें जब तक बुध वक्री गति में है । व्यापारिक साझेदारी और व्यापार में अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को लेकर आपको बहुत स्पष्ट होना चाहिए क्योंकि यह कार्यस्थल पर आपको झड़प और टकराव से बचने में मदद करेगा । किसी भी तरह की यात्रा से बचने की कोशिश इस दौरान करें क्योंकि यह आपको कोई लाभ प्रदान करने की बजाय नुकसान दे सकती है ।
वृषभ :~ वृषभ राशि के जातकों के लिए बुध दूसरे और पांचवें घर का स्वामी है । वर्तमान में यह ग्रह आपके ऋण , शत्रु और दैनिक मजदूरी के छठे भाव में वक्री होगा । इस वक्री के दौरान आपको बचत करने के लिए जोखिम लेने से बचना चाहिए , सट्टेबाजी से भी इस दौरान बचकर रहें । इस वक्री गति के दौरान मौद्रिक नुकसान की संभावना भी है । यह आपके लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने का सबसे अच्छा समय है , यदि निवेश करना आवश्यक हो तो स्थिति का गहराई से विश्लेषण अवश्य करें । माता – पिता को बच्चों के पोषण और शिक्षा में साथ देने का सुझाव दिया जाता है । स्वास्थ्य पर नजर डाली जाए तो, इस दौरान आप बीमार पड़ सकते हैं , आपको सलाह दी जाती है कि नियमित रूप से उचित आहार और कसरत करें ।
मिथुन :~ मिथुन राशि के जातकों के लिए बुध पहले और चौथे घर का स्वामी है और प्यार , रोमांस और बच्चों के पांचवें भाव में यह वक्री होगा । इस दौरान बातचीत के दौरान गलतफहमियां पैदा हो सकती है क्योंकि आप गपशप के दौरान अपनी बातों को लेकर स्पष्ट नहीं होंगे । आपके पुराने मित्र इस दौरान आप से संपर्क कर सकते हैं । माता के साथ आपके संबंध भी इस समय सुधरेंगे और यदि प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई मुद्दा आपको परेशान कर रहा था तो वह भी इस समय दूर हो सकता है । घर का माहौल अधिकतर समय अच्छा रहेगा । आपके स्वास्थ्य पर नजर डाली जाए तो सेहत अच्छी रहेगी , कोई बड़ी दिक्कत इस दौरान नहीं आएगी ।
कर्क :~ कर्क राशि के जातकों के लिए बुध तृतीय और द्वादश भाव का स्वामी है । बुध वक्री आपकी माता , सुख आदि के चतुर्थ भाव में होगा । इस दौरान आप कुछ चुनौतियों का सामना कर सकते हैं , प्रॉपर्टी से जुड़े कुछ मुद्दे आपको परेशान कर सकते हैं और यह आसानी से हल भी नहीं होंगे । इस दौरान आपकी माता को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियां हो सकती हैं । आपके आर्थिक पक्ष पर नजर डाली जाए तो आप अनचाहे खर्चों पर नियंत्रण कर पाएंगे साथ ही आपको धन लाभ होने की भी संभावना है ।
सिंह :~ सिंह राशि के जातकों के लिए बुध उनके द्वितीय और एकादश भाव का स्वामी है । यह आपके तृतीय भाव में वक्री होगा। इस वक्री के दौरान आप भाई – बहनों के साथ यदि कोई परेशानी थी तो उसे दूर कर सकते हैं । इस दौरान आप यात्रा करने का विचार बना सकते हैं और यह आपकी उन्नति के लिए अच्छे होंगे । बुध की यह वक्री चाल भाई – बहनों के साथ अच्छा समय बिताने का भी आपको मौका देगी । इस वक्री के दौरान आपको निवेश करने से बचना चाहिए और यदि निवेश करना आवश्यक हो तो हर पक्ष पर नजर डालें और बहुत सावधानी से निवेश करें । इस राशि के नौकरी पेशा लोगों को प्रमोशन मिलने या सैलरी में वृद्धि मिल सकती है । कुछ लोगों को नई नौकरी मिलने की भी संभावना है । कार्यक्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ आपके संबंध इस समय सुधरेंगे ।
कन्या :~ कन्या राशि के जातकों के लिए बुध पहले और दसवें घर का स्वामी है । दसवाँ भाव करियर औऱ पेशे का जबकि पहला भाव आपकी आत्मा का कारक माना जाता है । बुध का वक्री आपके धन , संचार और परिवार के द्वितीय भाव में होगा । इस दौरान आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ कुछ मुद्दों का सामना कर सकते हैं , जिससे घर का माहौल बिगड़ सकता है । हालांकि , उचित संचार और बातचीत के साथ आप सभी मतभेदों को हल करने में सक्षम होंगे । नई निवेश योजना बनाने का यह एक अच्छा समय है जो सही दिशा में बचत करने में मदद करेगा । इस तरह आप इस वक्री बुध की ऊर्जा का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। इस अवधि के दौरान आप अचानक और अप्रत्याशित लाभ की उम्मीद भी कर सकते हैं । व्यवसाय और नौकरी करने वालों को अतीत की तुलना में इस दौरान अच्छा लाभ मिलेगा ।
तुला :~ तुला राशि के जातकों के लिए बुध नौवें और बारहवें भाव का स्वामी है । इस दौरान तुला राशि के जातक धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं , इसके अलावा इस राशि के कुछ जातक धार्मिक यात्राओं पर भी जा सकते हैं । आर्थिक रूप से , इस अवधि के दौरान आपके खर्च अधिक होंगे इसलिए उचित सावधानी बरतें और देख परख के निवेश करें । स्वास्थ्य जीवन की बात की जाए तो आप थोड़ा तनाव महसूस कर सकते हैं । इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि नियमित व्यायाम / ध्यान या योग को अपने जीवन में शामिल करें ।
वृश्चिक :~ वृश्चिक राशि के जातकों के लिए , बुध आठवें और एकादश भाव का स्वामी है और यह खर्च , हानि और मोक्ष के आपके द्वादश भाव में वक्री होगा । आर्थिक रूप से , इस समय के दौरान पैसे का निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है । निवेश करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा । रिश्तेनातों पर नजर डाली जाए तो , आप इस समय बहुत भावुक हो सकते हैं , इसलिए आपको दिल से ज्यादा इस दौरान दिमाग की सुननी चाहिए । आप इस अवधि के दौरान बातों को छिपा सकते हैं । नौकरी में जातकों को अपने वरिष्ठों से उचित सहयोग मिलने की संभावना कम है , इसलिए उनके साथ संवाद करते समय सावधानी बरतें । स्वास्थ्य जीवन की बात की जाए तो अपने स्वास्थ्य का आपको विशेष ध्यान देना होगा नहीं तो छोटी बीमारियां भी बड़ी समस्या बन सकती हैं ।
धनु :~ धनु राशि के जातकों के लिए बुध सातवें और दसवें भाव का स्वामी है और वर्तमान में यह ग्रह आपकी सफलता , लाभ आदि के एकादश भाव में वक्री होगा । बुध की यह वक्री गति आपके लिए बहुत लाभदायक होगी क्योंकि आपकी सामाजिक स्थिति इस दौरान सुधरेगी । आपको करियर में नए अवसर मिलेंगे और यदि आप व्यावसायिक साझेदारी में हैं तो यह अवधि आपको लाभान्वित करेगी। इस दौरान आप बहुत सामाजिक होंगे और अपने दोस्तों के साथ समय बिताएँगे । इस राशि के जातक बुध के वक्री के दौरान अपने संगी या जीवनसाथी से अच्छा सहयोग प्राप्त करेंगे । इस दौरान यदि आप संपत्ति बेचने या खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके सफल होने की संभावना है ।
मकर :~ मकर राशि के जातकों के लिए बुध छठे और नौवें भाव का स्वामी है और करियर , नाम और प्रसिद्धि के आपके दसवें घर में यह वक्री गति करेगा । इसलिए आपको अपने कार्यों या करियर के लक्ष्यों को पूरा करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है । आपके अधीनस्थ आपके लिए बहुत सहायक होंगे और आपको अपनी कड़ी मेहनत का फल मिलेगा , जिसके परिणामस्वरूप कार्यस्थल पर आपकी दक्षता में वृद्धि होगी । बुध की यह वक्री गति आपके पिता के साथ आपके संबंधों को बेहतर बनाएगी और उनके द्वारा दी गई कोई सलाह लंबे समय तक आपके काम आ सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को इस अवधि के दौरान अच्छे फल मिलेंगे । आप धार्मिक कार्यों , दान – पुण्य या ऐसी ही गतिविधियों में इस दौरान शामिल हो सकते हैं। आधिकारिक काम के लिए विदेश यात्रा की भी संभावना है ।
कुंभ :~ कुंभ राशि के जातकों के लिए बुध पांचवें और आठवें भाव का स्वामी है और आपके भाग्य , धर्म आदि के नौवें भाव में यह वक्री गति करेगा । आपके बच्चे इस दौरान प्रगति के पथ पर अग्रसर होंगे इसलिए आपको भी संतुष्टि महसूस होगी । विद्यार्थी शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और आपको कार्यस्थल या नौकरी के मोर्चे पर भी बेहतर अवसर मिलेंगे । स्वास्थ्य के लिहाज से आप शारीरिक और मानसिक रूप से थकावट महसूस कर सकते हैं इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग / ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है । कुंभ राशि में बुध वक्री , आपके रिश्ते , मित्रता को प्रभावित कर सकता है इस दौरान गलतफहमियों के चलते झड़प होने की संभावना है इसलिए सावधानी से आगे बढ़ें ।
मीन :~ मीन राशि के जातकों के लिए बुध चौथे और सातवें घर का स्वामी है और यह आपके अष्टम भाव में वक्री गति करेगा परिवर्तन और अनुसंधान का कारक भाव कहा जाता है । अष्टम भाव में बुध के वक्री के दौरान आपको कुछ अशुभ परिणाम मिलने की आशंका है । बुध का वक्री इंगित करता है कि आपकी माँ को कुछ स्वास्थ्य समस्या हो सकती है , जो आपके लिए चिंता और मानसिक तनाव का कारण होगा । वैवाहिक जीवन पर नजर डालेें तो आपको कुछ उतार – चढ़ाव और मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है । व्यावसायिक रूप से व्यापार और साझेदारी में कुछ मतभेद या लड़ाई – झगड़े होने की भी संभावना है क्योंकि इस दौरान आप अपने साझेदार पर बहुत संदेह कर सकते हैं । स्वास्थ्य जीवन की बात की जाए तो आपको परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर खर्च करना पड़ सकता है क्योंकि उनके बीमार पड़ने के आसार हैं । आर्थिक रूप से आप संपत्ति के नवीनिकरण पर कुछ खर्च कर सकते हैं । ससुराल से आपके बेहतर संबंध होंगे और ससुराल पक्ष के लोगों से कुछ उपहार भी आपको मिल सकते हैं । यह आपके लिए रचनात्मक गतिविधियों का अभ्यास करने के लिए एक अच्छा समय है जैसे – लेखन , नृत्य , फोटोग्राफी , या पेंटिंग आदि ।
बुध के अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय
1. बुध ग्रह से जुड़ी सामग्रियों जैसे – हरा वस्त्र , साबुत मूंग , हरे फल , कांसा , हाथी
2. किन्नरों को बुधवार के दिन हरी चूड़ियां दान करें।
3. बुधवार के दिन तोते को पिंजरे से मुक्त करें।
4. पढ़ाई के लिए किसी विद्यार्थी को धर्मशास्त्र की पुस्तकें प्रदान करें।
5. बहते जल में 250 ग्राम साबुत मूंग प्रवाहित करें।
ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को शुभ ग्रह माना गया है।
बुध तर्क शक्ति, गणित , संचार , लेखन , व्यापार, वाणी और बुद्धि का कारक होता है।
बुध स्वभाव से युवा और सात्विक ग्रह है।
बुध ग्रह सर्वदा बलि होता है।
बुध अच्छे ग्रहों के साथ शुभ फल देता है लेकिन क्रूर ग्रह का साथ मिलने पर बुरा फल देता है।
बुध ग्रह त्रिदोष यानि वात , पित्त और कफ का कारक भी होता है।
बुध मिथुन एवं कन्या राशि का स्वामी होता है।
बुध कन्या राशि में यह उच्च भाव में रहता है।
बुध मीन राशि में नीच भाव में स्थित होता है ।
बुध ग्रह प्रमुख रूप से बुद्धि , तर्क शक्ति , गणित , व्यापार और चेतना आदि का कारक कहा जाता है।
बुध शुक्र और शनि के मित्र हैं
बुध मंगल और चंद्रमा से शत्रुवत व्यवहार रखता है।
बुध रंगों में हरा रंग और रत्नों में पन्ना बुध की प्रिय वस्तु है।
बुध के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में तरक्की मिलती है।
बुध ग्रह सूर्य से युति करके बुधादित्य योग का निर्माण करता है ।
ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351
–: शुभम् भवतु :–