
धार – भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव के रुप मे मनाया जाता है । मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री ने विशेष मुलाकात मे विस्तृत रुप से बताया कि इस वर्ष भी जन्माष्टमी को लेकर भ्रम की स्थिति है । जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त को दिन मनाया जा रहा है । हिंदू धर्म के अनुसार जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है । विद्वानों में इस बार जन्माष्टमी की तारीख को लेकर मतभेद है । कुछ विद्वानों का कहना है कि जन्माष्टमी 18 अगस्त गुरुवार को है , जबकि अन्य बुद्धजीवियों के अनुसार 19 अगस्त शुक्रवार को है ।
डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक इस साल 18 अगस्त गुरुवार को मालवा के समयानुसार मध्य रात्रि 12:37 बजे आरंभ होकर अगले दिन 19 अगस्त शुक्रवार को मध्य रात्रि 01:43 बजे तक रहेगी । साथ ध्रुव योग रहेगा । इस बार रोहिणी नक्षत्र नही आ रहा है । अतः जन्माष्टमी 19 अगस्त शुक्रवार को ही मनाई जाएगी । निशिध पूजन मुहूर्त मध्य रात्रि 12:03 से 12:46 बजे तक 43 मिनट का समय रहेगा ।
डाॅ. अशोक शास्त्री ने बताया की जन्माष्टमी का त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वंही मथुरा – वृंदावन एवं नाथद्वारा मे भी दिनांक 19 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी । मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह मे देवकी की आठवी संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को पैदा हुए। उनके जन्म के समय अर्धरात्रि (आधी रात) थी , चन्द्रमा उदय हो रहा था और उस समय रोहिणी नक्षत्र भी था । इसलिए इस दिन को प्रतिवर्ष कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक कृष्ण जन्माष्टमी का मुहूर्त जब……
1. अष्टमी पहले ही दिन आधी रात को विद्यमान हो तो जन्माष्टमी व्रत पहले दिन किया जाता है ।
2. अष्टमी केवल दूसरे ही दिन आधी रात को व्याप्त हो तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाता है ।
3. अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो और अर्धरात्रि (आधी रात) में रोहिणी नक्षत्र का योग एक ही दिन हो तो जन्माष्टमी व्रत रोहिणी नक्षत्र से युक्त दिन में किया जाता है।
4. अष्टमी दोनों दिन आधी रात को विद्यमान हो और दोनों ही दिन अर्धरात्रि (आधी रात) में रोहिणी नक्षत्र व्याप्त रहे तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाता है ।
5. अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो और अर्धरात्रि (आधी रात) में दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र का योग न हो तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाता है ।
6. अगर दोनों दिन अष्टमी आधी रात को व्याप्त न करे तो प्रत्येक स्थिति में जन्माष्टमी व्रत दूसरे ही दिन होगा ।
डाॅ. शास्त्री ने बताया कि वैष्णवों के मतानुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी । ध्यान रहे कि वैष्णव और स्मार्त सम्प्रदाय मत को मानने वाले लोग इस त्यौहार को अलग – अलग नियमों से मनाते हैं ।
हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार वैष्णव वे लोग हैं , जिन्होंने वैष्णव संप्रदाय में बतलाए गए नियमों के अनुसार विधिवत दीक्षा ली है । ये लोग अधिकतर अपने गले में कण्ठी माला पहनते हैं और मस्तक पर विष्णुचरण का चिन्ह (टीका) लगाते हैं । इन वैष्णव लोगों के अलावा सभी लोगों को धर्मशास्त्र में स्मार्त कहा गया है । दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि – वे सभी लोग, जिन्होंने विधिपूर्वक वैष्णव संप्रदाय से दीक्षा नहीं ली है , स्मार्त कहलाते हैं ।
जन्माष्टमी व्रत व पूजन विधि
1. इस व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारणा से व्रत की पूर्ति होती है।
2. इस व्रत को करने वाले को चाहिए कि व्रत से एक दिन पूर्व (सप्तमी को) हल्का तथा सात्विक भोजन करें। रात्रि को स्त्री संग से वंचित रहें और सभी ओर से मन और इंद्रियों को काबू में रखें।
3. उपवास वाले दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें।
4. हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल से स्नान (छिड़ककर) कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएँ। अब इस सूतिका गृह में सुन्दर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश स्थापित करें।
5. साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या सुन्दर चित्र की स्थापना करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम क्रमशः लेते हुए विधिवत पूजन करें।
6. यह व्रत रात्रि बारह बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फ़ी और सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है।
डाॅ. शास्त्री ने अनुसार इस दिन देश के समस्त मंदिरों का श्रृंगार किया जाता है । श्री कृष्णावतार के उपलक्ष्य में झाकियाँ सजाई जाती हैं । भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करके झूला सजा के उन्हें झूला झुलाया जाता है ।
स्त्री – पुरुष रात के बारह बजे तक व्रत रखते हैं । रात को बारह बजे शंख तथा घंटों की आवाज से श्रीकृष्ण के जन्म की खबर चारों दिशाओं में गूँज उठती है। भगवान कृष्ण जी की आरती उतारी जाती है और प्रसाद वितरण किया जाता है ।
डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है उनके लिए कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत किसी वरदान से कम नहीं साबित होता है। इसके अलावा संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत काफी फलदायी माना जाता है । जन्माष्टमी का व्रत करने से इन राशियों के जातकों को विशेष फल मिलने वाला है ।
कर्क :~ इस राशि का स्वामी चंद्रमा है । इस दिन पूजा-पाठ से चंद्रमा को बल मिलेगा और आपकी तरक्की के द्वार खुल जाएंगे । जन्माष्टमी का दिन इन राशि के जातकों के लिए बहुत शुभ होगा । भगवान कृष्ण की कृपा से आपका कई दिनों से अटका काम पूरा हो जाएगा या शुरू हो जाएगा । वहीं श्रीकृष्ण की पूजा से मन को शांति मिलेगी और सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। इस राशि के जातकों के लिए धन लाभ के योग भी बन रहे हैं ।
वृश्चिक :~ कर्क राशि के त्रिकोण में होने की वजह से चंद्रमा की इस राशि पर विशेष कृपा होगी । इस राशि के जातकों के लिए धन प्राप्ति के योग बने हैं । खास तौर पर पढ़ाई कर रहे छात्रों को पढ़ाई में मन लगेगा और परीक्षा में अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे । नौकरी या व्यवसाय करने वाले लोगों को भी अपने कार्यक्षेत्र में आमदनी होगी ।
कुंभ :~ इस राशि के लिए जन्माष्टमी का व्रत बहुत शुभ परिणाम देगा । आप किसी विवाद में उलझे हैं, या मन में परेशानी है , कोई रास्ता नहीं निकल रहा , तो इस व्रत करने से बहुत लाभ होगा । आपका मन शांत होगा और समाधान दिखने लगेगा । चंद्रमा मन का कारक होता है । अगर चंद्रमा की कृपादृष्टि हुई तो मन काबू में रहेगा और बेहतर फैसला ले सकेंगे । आर्थिक उन्नति के भी योग बन रहे है ।
डाॅ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351
~: शुभम् भवतु :~