
कार्तिक मास –‘ दीप दान का महापर्व– जरूर पढ़े व दीप दान पद्धति का लाभ ले —-
?प्राचीन हनुमान मंदिर मुकेरिपुरा इंदौर ।पं बद्रीप्रसाद जी पुजारी ज्योतिष संस्थान ✌संस्थापक स्व. पं राधेश्याम जी शर्मा ?
? ।। मंगलमय दीप पूजन —- दीप दान ।। ?
?कार्तिक मास मे अगर सबसे अधिक पुण्य हे तो वह गंगा स्नान व दीप दान का — —- —–
?आप सभी कार्तिक मास मे पूर्ण मास या धनतेरस से भाई दूज व त्रिरात्रि– कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से कार्तिक पूर्णिमा तक दीप दान — करते हे । या वर्ष मे बहुत से पर्व उत्सवो पर दीप दान करते है । या प्रतिदिन दीप दान करते हे तो दीप दान के नियमो का पालन करेगे तभी जिस देवी देवता पितरो के लिए दीप दान करते है दीप दान उन्हे प्राप्त होता हे व आपके मनोवंछित फलो की प्राप्ति होती हे । सुख समृद्धि सौभाग्य धन वैभव विद्य संतान सुख की प्राप्ति व जो कामना से आप दीप दान करते है वह कामना पूर्ण होती है । पितरो की कृपा व उन्हें सद्गति प्राप्त होती हे ।
?दीप दान — का अर्थ आप मंदिर मे तीर्थ मे गौ शाला मे गुरू के स्थान पर चौराहे पर देव वृक्ष पर पवित्र नदी सरोवर तालाब कुआं पर शमशान भूमि पर घर पर तुलसी मे — घी या तेल का दीपक लगाते हे उसे दीप दान कहते है । बहुत से लोग सिर्फ जल मे दीपक छोडने को ही दीप दान समझते है । आप जहा भी दीपक लगा रहे हे वह दीप दान की ही श्रेणी है ।
?दीप दान का मुख्य समय — ब्रह्म मुहूर्त , शाम को संध्या काल से प्रदोष काल यह दीप दान का मुख्य समय है । इसके अलावा पर्व उत्सव के समय अनुसार आप दीप दान कर सकते हे ।
?दीपक केसे हो—
?प्रतिदिन. सभी जगह दीपक लगाने के लिए स्वर्ण, रजत, ताम्र, पीतल, मिट्टी या सप्त धान्य के मिश्रित आटे के दीपको का उपयोग कर सकते है।
?मिट्टी के दीपक व आटे से बने , पत्ते से बने हुए दीपक का उपयोग सिर्फ एक बार ही होता हे उसके बाद उन्हे पुनः दीपक लगाने हैतु नही लिया जाता हे वह विसर्जन कर देना चाहिए अगर आप पुन उसमे दीपक लगाते हे तो उसका कोई लाभ नही वरन दरिद्रता का भोग करना पडता है ।
?सिर्फ पात्र दीपक स्वर्ण, रजत, ताम्र, पीतल, कान्सा के दीपक आप पुन धोकर उपयोग ले सकते हे ।
?दीपक को जल से शुद्ध करके शुद्ध पात्र मे रखकर. तैल या घी से परिपूर्ण करके प्रज्वलित करे —
?दीप ज्यौति की गंध अक्षत पुष्प साल से या दीपक की पंचोपचार पूजन करके —
?प्रर्थान करे -‘
?शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।?
?””दीप ज्योति: परं ज्योति:, दीपज्योतिर्जनार्दन: ।
दीपो हरतु में पापं, दीपज्योर्तिनमोस्तुते ।।?
”
?””शुभं करोति कल्याणम् , आरोग्यं सुखसम्पदा:।
“””धर्मस्यशत्रुविनाशाय, आत्मज्योति: नमोस्तुते ।।?
“?”आत्मज्योति: प्रदीप्ताय, ब्रह्मज्योति: नमोस्तुते ।
“”ब्रह्मज्योति: प्रदीप्ताय, धर्मज्योति: नमोस्तुते ।।?
?प्रार्थना करके दीप को साष्टांग प्रणाम करे ।
फिर पात्र मे दीपक को लेकर सभी जगह दीप दान करे।
?दीपक को भूमि पर या जहां भी रखे बिना आसन के न रखे ।पहले चावल. पुष्प पत्ते या कोई पात्र अादि का आसन रखकर उसके ऊपर दीपक रखे । दीपक की ज्यौति पूर्व या उतर दिशा मे होना चहिए । सिर्फ यम के निमित्त दीपक की ज्योति दक्षिण दिशा मे होना चहिए।
?बिना कोई आसन दिये दीपक भूमि पर रखने से धन की हानि होती है।
?इसलिए आप सभी दीप दान करते समय सभी दीपक किसी आसन पर रखे ।
?हम आज यह देखते है जब जल मे तीर्थ नदी तालाब पुष्करणी मे दीप दान करते हे तो वह कागज– प्लास्टिक– डिस्पोजल– के दोने मे पृष्ठ के डिब्बों मे भक्त जन दीप दान कर देते है यह सरासर गलत व दुराचार हे । हम ओर दोष के भागी बनते है । यह गलत पद्धति का हम बदले ।
? हमे जल का दीप दान सिर्फ पत्ते से बने दीपको मे पत्तों पर ही दीप दान करना चाहिए।
? मोमबत्ती को दीपमालिका उत्सव मे न लगावें।
?आप इस कार्तिक मास मे दीप दान का लाभ जरूर करे धर्म अर्थ काम मोक्ष चारो पुरुषार्थ को प्राप्त करे ।
?मंदिर पुजारी पं राजाराम शर्मा — 9826057023?
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????असतो मा सद्गमय ????
????तमसो मां ज्योतिर्गमय????
???? मृत्योर्मा अमृतं गमय????