तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले इस शख्स ने लिखा था बाइडेन का भाषण, मिल रही है जमकर वाहवाही

जो बाइडन ने बुधवार को अमेरिका के 46वें राष्‍ट्रपति के तौर पर पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद उन्‍होंने देश के नाम अपना पहला संबोधन भी पढ़ा. एक ओर उनके इस भाषण पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं, तो दूसरी ओर यह भारत के लिए भी बेहद खास था. ऐसा इसलिए क्‍योंकि इसे भारतीय मूल के अमेरिकी विनय रेड्डी   ने तैयार किया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने शपथ लेने के पहले ही अपने प्रशासन में 20 अमेरिकी भारतीयों को स्थान दिया और वह सुर्खियों में हैं।  बाइडन का भाषण लिखने वाले मूलरूप से भारत के तेलंगाना से हैं। करीमनगर जिले का पोथीरेड्डीपेट उनका पुस्तैनी गांव है। विनय रेड्डी की परवरिश अमेरिका के ओहायो में हुई। रेड्डी ने मियामी विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी की। वर्ष 2013-17 में जब बाइडन अमेरिका के उप राष्ट्रपति थे, उस दौरान रेड्डी ही उनके भाषण लिखा करते थे। रेड्डी ऐसे पहले भारतीय अमेरिकी हैं जो नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के भाषण लेखक के तौर पर नियुक्त हुए हैं।

बाइडन का प्रचार भाषण भी लिखा:-  इससे पहले, विनय रेड्डी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जो बाइडन और कमला हैरिस के चुनाव प्रचार के लिए भाषण लिख चुके हैं। विनय रेड्डी की खास बात यह भी है कि जब बराक ओबामा के कार्यकाल में जो बाइडन उप राष्ट्रपति थे, तब वह उनके चीफ स्पीचराइटर भी थे। अब रेड्डी बाइडन का भाषण लिखने वाली टीम के डायरेक्टर हैं।

रेड्डी के पिता 1970 में गए थे अमेरिका:-विनय रेड्डी के पिता का नाम नारायण रेड्डी है। उन्होंने शुरुआती शिक्षा पोथीरेड्डीपेट गांव में ही ग्रहण की। इसके बाद हैदराबाद से एमबीबीएस की पढ़ाई की। वर्ष 1970 में वह अमेरिका चले गए थे। विनय का जन्म अमेरिका में ही हुआ। उनका परिवार का नाता अपने गांव से हमेशा जुड़ा रहा है। गांव में परिवार की अब भी तीन एकड़ भूमि और एक घर है। नारायण रेड्डी और उनकी पत्नी विजया रेड्डी अब भी गांव आते जाते हैं। वह आखिरी बार फरवरी, 2020 में आए थे।

 

पुरानी है परंपरा
खास बात है कि अमेरिका में राष्ट्रपति के भाषण की परंपरा जॉर्ज वॉशिंगटन के समय से चली आ रही है. वॉशिंगटन 30 अप्रैल 1789 को अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने थे. अपने पहले भाषण में उन्होंने नई और मुक्त सरकार के बारे में बात की थी. वहीं, अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने 135 शब्दों की इतिहास की सबसे छोटी स्पीच दी थी. जबकि, 1841 में विलियम हैनरी हैरिसन ने 8455 शब्दों वाली सबसे लंबी स्पीच दी थी.

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