कोरोना की नई चुनौती – दोबारा संक्रमण की

कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के सामने जो नई चुनौती आ खड़ी हुई है, वह है इसके दोबारा संक्रमण की। दुनिया के 210 से ज्यादा देश कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे हैं। जनसाधारण के लिए वैक्सीन की अनुपलब्धता के बीच हर दिन कोरोना के मामले बढ़ तो रहे हैं, लेकिन दवाओं और उपचार के अन्य तरीकों की बदौलत लोग तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। हालांकि कोरोना से एक बार ठीक हो जाने के बाद लोग फिर से कोरोना संक्रमित हो रहे हैं और दोबारा संक्रमण के ऐसे मामलों ने चिंता बढ़ाई है। आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मुताबिक, भारत में भी दोबारा संक्रमण के तीन मामले सामने आए हैं। दोबारा संक्रमण के मामलों की पहली बार पुष्टि करते हुए आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने दोबारा संक्रमित होने की समय सीमा 100 दिन तय किए जाने की बात कही है।

कोरोना के दोबारा संक्रमण के पहले मामले की आधिकारिक पुष्टि अगस्त के आखिरी सप्ताह में हुई थी, जब हांगकांग में 33 वर्षीय युवक के केस ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा। वह युवक मार्च में पहली बार संक्रमित हुआ था और फिर अगस्त में दोबारा कोरोना पॉजिटिव पाया गया। हालांकि अब भी कुछ विशेषज्ञों का यही कहना है कि दोबारा संक्रमण के मामले दुर्लभ हैं। उनके मुताबिक, जो मरीज इस वायरस से पूरी तरह रिकवर नहीं हो पाते तो ऐसी स्थिति में उसके दोबारा संक्रमण होने की संभावना बनी रहती है। इसे बीमारी का पलटना या वापस लौटना भी कहा जा सकता है।

आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव का कहना है, “अबतक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह नहीं बताया कि कोई व्यक्ति 90 दिन, 100 दिन या 120 दिन बाद दोबारा संक्रमित हो सकता है। लेकिन हमने इसकी समय सीमा 100 दिन तय कर दी है। किसी मरीज के ठीक होने के 100 दिन बाद दोबारा संक्रमित होने का खतरा रहता है। डब्ल्यूएचओ की तरफ से हमें कुछ डाटा मिला है, जिसमें दुनियाभर में दोबारा संक्रमण के दो दर्जन मामलों की चर्चा है। दोबारा संक्रमित होने वाले लोगों से टेलीफोन पर बात कर कुछ और डाटा एकत्र करने की कोशिश की जा रही है।”

शरीर में कबतक बनी रह सकती है एंटीबॉडी?
हांगकांग वाले मामले में साढ़े चार महीने के अंदर शख्स के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडी खत्म हो गई थी। आईसीएमआर के मुताबिक, कई अध्ययनों में भी यह सामने आया है कि एक बार संक्रमित होने वाले व्यक्ति के शरीर में आमतौर पर चार महीने तक एंटीबॉडीज मौजूद रहती है। इससे पहले 50 दिन के अंदर एंटीबॉडी खत्म होने की भी बात कही जा चुकी है। वहीं, मुंबई के जेजे अस्पताल में की गई एक स्टडी में पाया गया कि तीन से पांच हफ्ते पहले कोरोना पॉजिटिव हुए लोगों में से 90 फीसदी लोगों में महज 38.8 फीसदी एंटीबॉडी ही बची थी।

अमेरिका की एरिजोना विश्वविद्यालय में हुए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में कम से कम पांच महीने के लिए कोरोना महामारी के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लगभग छह हजार लोगों के नमूनों में उत्पन्न हुए एंडीबॉडी का अध्ययन करने के बाद यह बात कही है। शोध के मुताबिक, जब वायरस कोशिकाओं को पहली बार संक्रमित करता है तब प्रतिरक्षा तंत्र, वायरस से लड़ने के लिए कुछ देर जीवित रहने वाली प्लाज्मा कोशिकाओं को तैनात करता है जो एंटीबॉडी उत्पन्न करती हैं। यह एंटीबॉडी पांच महीने तक रह सकती है।

क्या वैक्सीन के बाद भी रहेगा खतरा?
एक सवाल यह भी है कि वैक्सीन से विकसित हुई एंटीबॉडी लोगों के शरीर में कितने दिनों तक रह पाएगी! या फिर टीकाकरण अभियानों से पैदा हुई हर्ड इम्यूनिटी की स्थिति कबतक कोरोना से बचा पाएगी? न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुरोध पर रिपोर्ट की समीक्षा करने वालीं येल यूनिवर्सिटी के इम्यूनोलॉजिस्ट यानी प्रतिरक्षाविद् अकीको इवासाकी का कहना है कि टीकाकरण के बाद इस संभावना पर तो विराम लगेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रूप से विकसित हुई इम्यूनिटी बीमारी को रोकती है, लेकिन दोबारा संक्रमण को भी किस हद तक रोकेगी, यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वायरस या बैक्टीरिया संक्रमण होने पर शरीर में एंटीबॉडीज बनती हैं। अलग-अलग बीमारियों में एंटीबॉडीज बनने का समय अलग-अलग होता है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में वायरस से लड़ने के लिए विकसित होने वाली एंटीबॉडी ही वायरस को दोबारा लौटने से रोकती है। लेकिन इस एंटीबॉडी की भी वैधता होती है। इवासाकी ने कहा कि हर्ड इम्यूनिटी विकसित करने के लिए एक मजबूत, सुरक्षित और कारगर वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी, जो बीमारी और दोबारा संक्रमण की संभावना, दोनों को रोके।

 

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