देहात-शहर में सामंजस्य की कमी, ग्रामीण इलाकों में हैंडल नहीं हो पा रहे हैं साइबर क्राइम.. यूपी पैटर्न पर बना इंदौर और भोपाल का पुलिस कमिश्नरी सिस्टम; फिर भी खामियां

शहर में संसाधन होने से चेकिंग में परेशानी नहीं आती, लेकिन ग्रामीण में दिक्कत है।

पुलिस कमिश्नरी सिस्टम: देहात-शहर में सामंजस्य नहीं, संसाधन बंट गए

बड़ी समस्या: देहात में साइबर क्राइम हैंडल नहीं हो पा रहे हैं

इंदौर-भोपाल में उत्तर प्रदेश के पैटर्न पर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम बनाया गया है। फिर भी हमने वहां का पूरा सिस्टम लागू नहीं किया। इसके तीन साल बाद भी हमारे सिस्टम में खामियां सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी समस्या देहात और शहरी पुलिस का अलग होना है। यूपी में इस सिस्टम में देहात और शहर एक ही कमान के हाथ में है। अब अफसरों ने भी इसे एक करने के लिए प्रस्ताव देने की बात कही है।

पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद से देहात और शहरी पुलिस अलग-अलग सिस्टम पर काम कर रही है। ग्रामीण के 12 थाने कमिश्नरी से अलग हो चुके हैं। इससे लॉ एंड ऑर्डर, आपसी तालमेल, ट्रांसफर, बल की कमी, संसाधनों का आभाव, पुलिस लाइन नहीं होने जैसे मुद्दे हैं। यह परेशानी अब बड़े रूप में दिखने लगी है।

ग्रामीण क्षेत्र में साइबर क्राइम से निपटे के साधन भी नहीं

शहर में साइबर क्राइम से निपटने के लिए अच्छे संसाधन और ट्रेंड टीम है, जबकि ग्रामीण इलाकों में ऐसा नहीं है। कई बार देखने को मिला है कि ग्रामीण के केस ही दर्ज नहीं हुए हैं या उनका निकाल नहीं हो पाया है।

लॉ एंड ऑर्डर के लिए बल और संसाधन भेजने में भी परेशानी

बड़ी मुसीबत लॉ एंड ऑर्डर के दौरान बल भेजने में आती है। पिछले दिनों हातोद, मानपुर बड़गोंदा में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ी थी। देरी से बल पहुंचा था। यदि शहरी पुलिस से तालमेल होता तो नजदीकी थाने से बल चला जाता।

जाम और इमरजेंसी में दिक्कत: एक अफसर ने बताया कि कई बार ग्रामीण इलाकों में जाम लगता है जो शहर तक आता है। जब तक जाम ग्रामीण इलाके में होता है, शहर की पुलिस नहीं देखती। पहले इंदौर पुलिस डाइवर्शन, जाम और अन्य इमरजेंसी में दूसरे जिलों से भी संपर्क कर लेती थी। साथ ही ग्रामीण इलाकों में हुई मॉस केजुअल्टी में मदद करती थी।

ट्रांसफर, सैलरी और क्वार्टर: पहले ग्रामीण और शहरी इलाकों में जाने के लिए जवानों के ट्रांसफर एसपी और आईजी स्तर पर होते थे। अब भोपाल से होने लगे हैं। कई जवानों के क्वार्टर इंदौर में है, लेकिन वे देहात में पदस्थ हैं। यदि देहात में भी क्वार्टर हों तो परेशानी दूर हो जाएगी। ग्रामीण पुलिस की सैलरी भी शहरी के खातों से बंट रही है।

पुलिस लाइन में कुछ नहीं : पुलिस कमिश्नरी विभाजन के बाद ग्रामीण इलाके के लिए महू में एक पुलिस लाइन खोली गई। वहां अभी तक कोई साधन नहीं है। आरआई हैं, लेकिन उनके पास बल और ढंग के कमरे भी नहीं है।

रिवेरा फार्म हाउस जैसे घटनाक्रम: पिछले दिनों आजाद नगर एसीपी ने दबिश देकर रिवेरा फार्म हाउस पर रेव पार्टी पकड़ी थी। बाद में पता चला कि ये इलाका खुड़ैल में आता है। तब भी दोनों इलाकों में कार्रवाई को लेकर पुलिस उलझन में आई थी। कई इलाके ऐसे हैं, जहां ग्रामीण और शहर में टकराव है।

12 थाने शहर से अलग

ग्रामीण एसपी के अंतर्गत 12 थाने देपालपुर, महू, बेटमा, चंद्रावतीगंज, शिप्रा, सांवेर, गौतमपुरा, हातोद, किशनगंज, बड़गोंदा, सिमरोल और खुड़ैल आते हैं। अफसरों का कहना है यदि एक ग्रामीण डीसीपी बना दें और इन थानों को दूसरे डीसीपी के सर्कल से मिलो दें तो व्यवस्था सुधर जाएगी।

जिलेभर की पुलिस एक होना चाहिए

हम भी चाहते हैं इंदौर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाके पुलिस के हिसाब से एक होना चाहिए। सभी जगह कमिश्नरी सिस्टम से काम होना चाहिए। हमने कई खामियां देखी हैं जिन पर विचार चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही ग्रामीण और शहरी हिस्सा एक हो जाएगा।

– मनोज श्रीवास्तव, एडिशनल पुलिस कमिश्नर, इंदौर

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