ऐसे थै अटल जी – माला तिवारी

ऐसे थै अटल जी – माला तिवारी

अटल जी की द्वितीय पुण्यतिथि:पीएम हाउस को अटलजी कहते थे- बड़ा है, पर यह कांटों भरा ताज है, मसाला पीसने में हाथ में भतीजी को सूजन आई तो मिक्सर गिफ्ट किया था

अटल जी अपनी भतीजी माला के साथ। माला की शादी में तीन दिन ग्वालियर में रहे थे।
माला, अटलजी के बड़े भाई सदाबिहारी की सबसे छोटी बेटी हैं
विदेश मंत्री बनने के बाद माला की शादी में ग्वालियर गए थे अटलजी

पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज दूसरी पुण्यतिथि है (16 अगस्त 2018)। अटलजी का इंदौर से गहरा नाता रहा है। उनकी भतीजी माला तिवारी इंदौर में ही रहती हैं। अटलजी को याद करते हुए उन्होंने बताया – वे बहुत सहल और सहज थे। मेरी शादी पर वे फूलों से बने गहने लेकर दिल्ली से आए थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद जब मैं बच्चों के साथ दिल्ली गई तो उन्होंने पीएम हाउस को दिखाते हुए कहा था- देखो कितना बड़ा और कितना अच्छा है, देखने में अच्छा है, लेकिन यह कांटों से भरा है।

मामला तिवारी अटल फाउंडेशन चलाती हैं।
माला तिवारी अटल जी के बड़े भाई सदा बिहारी की सबसे छोटी बेटी हैं। जब उनसे अटल जी की यादों के बारे में पूछने पर उन्होंने भावुक होकर बताया था कि अटल जी से जुड़े कई प्रसंग उसके यादों के रूप में मौजूद हैं।
माला ने बताया, “मेरी शादी के समय वे तीन दिन ग्वालियर में रहे थे। विदेश मंत्री बनने के बाद वे पहली बार यहां आए थे। उसने बस यह कहना होता था कि हमें क्या चाहिए। उस समय उन्होंने टेप रिकॉर्डर दिलवाया था।”
“मैंने शादी में पहनने के लिए फूलों के गहनों की मांग की थी। इस पर वे दिल्ली से मोंगरे के बने फूल लेकर आए थे। कॉलेज टाइम में मेरे हाथ में फैक्चर हो गया था, दिल्ली में उन्होंने मेरा ऑपरेशन करवाया था।”
“शादी के बाद जब मैंने ससुराल में मसाला पीसा। इस पर जब उनसे मेरी बात हुई तो उन्होंने पूछा कैसे हो तो मैंने कहा कि मसाला पीसने में हाथ बहुत दुखा और सूजन भी आ गई। इस पर अगली बार जब मैं उनसे मिली तो उन्होंने मुझे मिक्सर गिफ्ट की थी।”
“वे हमारी सभी बहनों का ध्यान रखते थे। जब वे प्रधानमंत्री बने तो हमारे बच्चों ने कहा कि नाना हमें पीएम हाउस देखना है। इसके बाद जब मैं दिल्ली गई तो उन्होंने पीएम हाउस में कहा देखाे ये कितना अच्छा, कितना बड़ा है, देखने में है, लेकिन है यह बहुत कांटों भरा।”
माला ने बताया कि पूरे परिवार को फिल्मों का काफी शौक था। दीवाली के अगले दिन पूरा परिवार साथ फिल्म देखने जाता था। हम एक बार हम सभी फिल्म देखने पहुंचे। चाचा जी को देखकर थिएटर का मैनेजर उनके लिए ठंडा लेकर आया। उनके हाथ में ठंडे की बोतल देख सभी का ध्यान फिल्म छोड़ उनकी ओर था। यह देख चाचाजी मुस्कुराए और फिर सभी के लिए ठंडा आया।
वैसे तो चाचाजी जब भी इंदौर आते हमारे घर पर ही खाना होता था। 2003 में इंदौर वे भाजपा के महाअधिवेशन में आए थे, लेकिन प्रोटोकॉल के कारण वे हमसे मिलने घर नहीं आ पाए थे। ऐसे मेंं उन्होंने पूरे परिवार को ही रेसीडेंसी में भोजन के लिए बुला लिया था।

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