‘मान’ ने बढ़ाया पूरी दुनिया में धुड़मारास गांव का ‘सम्मान’… जगदलपुर से कौशल किशोर चतुर्वेदी

मान’ ने बढ़ाया पूरी दुनिया में धुड़मारास गांव का ‘सम्मान’…
जगदलपुर से 
कभी नक्सली खौफ में डरा सहमा जगदलपुर, अब निडर होकर विकास की तरफ चल पड़ा है। पर्यटन क्षेत्रों पर पर्यटकों की भीड़ दिखाई देने लगी है। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ भ्रमण पर आए पीआईबी प्रेस टूर के तीसरे दिन
जगदलपुर के आसपास, हमने अनूठे स्थलों का भ्रमण किया। पर सबसे ज्यादा खुशी धुड़मारास गांव के मानसिंह बघेल से मिलकर हुई, जिन्होंने साबित कर दिया है कि एक अकेला व्यक्ति ठान ले तो जगदलपुर के गाँव को पूरी दुनिया में पहचान और सम्मान दिला सकता है। एक अकेला व्यक्ति ठान ले तो बिना किसी सरकारी मदद के गाँव के 35 आदिवासी परिवारों को आत्मनिर्भर भी बना सकता है और समृद्धि का नया इतिहास रच सकता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों में बफर जोन में बसा धुड़मारास  एक आदिवासी गांव है, जिसे संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने 2024 में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया है। कांगेर नदी के किनारे स्थित यह गाँव बांस राफ्टिंग, कयाकिंग और पारंपरिक जनजातीय ‘होमस्टे’ धुरवा डेरा के लिए प्रसिद्ध है, जो पर्यटकों को अनूठा प्राकृतिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करता है। यह भारत का एकमात्र गांव है जिसे 60 देशों के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में चुना गया है। और यह सब मानसिंह की सोच और दूरदर्शिता का अनूठा उदाहरण है।
ग्रामीण मानसिंह का कहना है कि जब शासन, प्रशासन ने नहीं सुनी, हमें कहीं रोजगार नहीं मिला तो प्रकृति ने हमें रोजगार दिया। गांव की जीवनदायिनी कांगेर नदी में बैंबू राफ्टिंग करवाने का प्लान किया। ईको टूरिज्म विलेज के लिए गांव को डेवलप किया गया। इसके लिए ग्रामीणों ने कांगेर नदी के लोकेशन को चुना। बांस की नाव बनाई। फिर बैंबू राफ्टिंग शुरू की। हालांकि, इसके लिए इन्हें कोई ट्रेनिंग नहीं मिली थी। गांव में कयाकिंग और बैंबू राफ्टिंग की सुविधा है। सभी ग्रामीणों ने मिलकर ग्रामसभा में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया। जिसके अध्यक्ष मान सिंह बने। समिति में गांव के कुल 31 से 35 घरों से एक-एक सदस्यों को शामिल किया गया। सभी लोग तैराकी में माहिर हैं। बैंबू राफ्टिंग पहले खुद की। फिर सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रचार करवाया। जैसे-जैसे सोशल मीडिया के माध्यम से इसका प्रचार होता गया, टूरिस्ट की संख्या बढ़ती गई। यहां ग्रामीणों ने मिलकर होम स्टे भी बना दिया। जिसमें बस्तर आर्ट से लेकर, बस्तर के व्यंजन को शामिल किया। पिछले करीब डेढ़ साल में बारिश के 3 महीने को छोड़कर हर महीने लगभग 2 हजार से 2500 पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। जिसका रिकॉर्ड भी ये अपने पास रखे हैं। मान सिंह के होम स्टे धुरवा डेरा में बस्तर के व्यंजनों ने हम सभी को आनंदित कर दिया। मानसिंह की पत्नी सुमित्रा द्वारा
बनाया गया स्वादिष्ट भोजन सभी को भाग गया। पपीता मटर, आमट, झुरगा, कुकड़ी भाजी आदि सब्जियों के साथ दाल, रोटी, चावल के साथ रागी और चावल मिलाकर बनाया गया पेज का स्वाद हमें हमेशा याद रहेगा। स्थितियाँ यह हैं कि इस गाँव में पहुँचकर हर किसी के मन में मान सिंह के प्रति सम्मान का भाव पैदा हो जाता है। और अब उनके होमस्टे में देश दुनिया के पर्यटक दस्तक दे रहे हैं।
और अब बात करें कांगेर घाटी नेशनल पार्क की। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान (1982) और जैवमंडल अभ्यारण्य है, जो अपनी आश्चर्यजनक भू-आकृति, घने वनों और गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है। जगदलपुर के पास 200 वर्ग किमी में फैला यह पार्क कांगेर नदी के तट पर है और यहाँ तीरथगढ़ जलप्रपात व कुटुमसर जैसी चूना पत्थर की गुफाएं मुख्य आकर्षण हैं। कुटुमसर गुफा भारत की सबसे गहरी चूना पत्थर की गुफाओं में से एक माना जाता है। गुफा के अंधेरे वातावरण और जलकुंडों में विशेष प्रकार की ‘अंधी मछलियाँ’ पाई जाती हैं, जो बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग विकसित हुई हैं। यहाँ स्टैलेक्टाइट्स (ऊपर से लटकते पत्थर) और स्टैलेग्माइट्स (नीचे से ऊपर उठते पत्थर) की मनमोहक कलाकृतियाँ देखने को मिलती हैं। गुफा के अंतिम छोर पर एक प्राकृतिक शिवलिंग जैसी आकृति भी है, जिसकी स्थानीय लोग पूजा करते हैं। गुफा के भीतर कई प्राकृतिक कक्ष और नीचे जाने वाले मार्ग हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए इसमें कंक्रीट का पक्का रास्ता बनाया गया है। इसकी मुख्य सुरंग लगभग 200 मीटर लंबी है, जिसमें कई पार्श्विक और नीचे की ओर जाने वाले मार्ग हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे लंबी गुफाओं में से एक है। कोटमसर गुफा दंडकारण्य के ऐतिहासिक एवं पौराणिक क्षेत्र में स्थित है, जो रामायण में उल्लिखित वन क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। गुफा में प्रवेश करते समय मन में जितना भय पैदा होता है, अंदर जाने के बाद हमें अपना यह फैसला उतना ही संतुष्टि से भर देता है।
तीरथगढ़ जलप्रपात भी जगदलपुर से 35 किलामीटर की दूरी पर स्थित मनमोहक जलप्रपात है। इसकी मोहक छटा मन मोह लेती है। मुनगाबहार नदी पर स्थित यह जलप्रपात चन्द्राकार रूप से बनी पहाड़ी से 300 फिट नीचे सीढ़ी नुमा प्राकृतिक संरचनाओं पर गिरता है, पानी के गिरने से बना दूधिया झाग एवं पानी की बूंदों का प्राकृतिक फव्वारा मन को मन्द-मन्द भिगो देता है।तीरथगढ़ झरने भारत के सबसे ऊँचे झरनों में से एक हैं।
हमने खौफ का पर्याय झीरम घाटी भी देखी। यह जगदलपुर के पास स्थित एक अत्यंत संवेदनशील इलाका है। यह 25 मई 2013 को हुए सबसे भीषण नक्सली हमले के लिए जाना जाता है, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल, विद्या चरण शुक्ला, उदय मुदलियार, फूलो देवी नेताम सहित 30 नेताओं की शहादत ने सभी आँखों को नम कर दिया था। सुरक्षा कारणों से यहाँ की स्थिति पर आज भी निरंतर कड़ी निगरानी रखी जाती है। जहां हमला हुआ था वहां झीरम घाटी शहीद स्मारक बनाया गया है, जो पूरी तरह से सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालांकि सुरक्षाकर्मी घाटी पर अपनी नजर रख रहे हैं।
सामान्य तौर पर, पर्यटकों को यह सभी पर्यटक स्थल आवाज़ दे देकर बुलाते हैं। और जो यहां एक बार पहुंच जाता है वह
संतुष्टि और आनंद के अनुभवों को भुला नहीं सकता। पर्यटकों के आने से स्थानीय लोगों को भी बेहतर रोजगार के साधन मिल रहे हैं। आदिवासियों
के स्वाभिमान और सम्मान को भी यहाँ आकर करीब से देखा जा सकता है। गरीबी भले ही हो, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता न करने वाला उनका चेहरा हम सभी को बहुत कुछ सिखाता नजर आता है। आदिवासी महिलाएं आर्थिक तौर पर बराबरी से भागीदारी करती नजर आती हैं। तो यही कहा जा सकता है कि जगदलपुर आकर मानसिंह के आत्मनिर्भर गाँव को अवश्य ही देखना चाहिए और पर्यटन की दृष्टि से कांगेर घाटी नेशनल पार्क और यहाँ स्थित कुटुमसर की गुफाएँ, तीरथगढ़ जलप्रपात हमें एक विशिष्ट अनुभव कराते हैं। और झीरम घाटी जैसे स्थान नक्सलवाद के घृणित चेहरे से रूबरू करा देते हैं। सबसे ज्यादा संतुष्टि यही देखकर मिलती है कि ‘मान’ ने पूरी दुनिया में धुड़मारास गांव का जो ‘सम्मान’ बढ़ाया है, उसका अनुसरण कर हर युवा आत्मनिर्भरता की सीढ़ी पर चढ़ सकता है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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