
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसे लेकर मंथन के बीच खबर आई है कि CM चयन से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मनोहरलाल खट्टर को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है। खट्टर हरियाणा के मुख्यमंत्री हैं। वे जब पहली बार सीएम बने थे, तब हरियाणा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ही थे। खट्टर और विजयवर्गीय की जुगलबंदी तब पूरे देश में चर्चा आई थी। दरअसल, विजयवर्गीय पहली बार में हरियाणा जिताकर लाए तो पार्टी ने उनका कद बढ़ाते हुए राष्ट्रीय महासचिव (जून 2015 में) बना दिया था। इस चुनाव में बीजेपी ने हरियाणा विधानसभा की 90 में से 47 सीट जीती थी। वहीं इसके पहले हुए 2009 के चुनाव में बीजेपी मात्र 4 सीट ही जीत पाई थी। ध्यान रहे कि हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर के अलावा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के लक्ष्मण और पार्टी की राष्ट्रीय सचिव आशा लकडा को ऑब्जर्वर बनाया गया है।
खट्टर की मध्य प्रदेश की पॉलिटिक्स में एंट्री के बाद विजयवर्गीय समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। 2014 के हरियाणा चुनाव में खट्टर की जीत का श्रेय विजयवर्गीय को मिला था। कार्यकर्ताओं सहित समर्थक विधायक रमेश मेंदोला का कहना है कि कार्यकर्ताओं के साथ जनभावना भी है कि विजयवर्गीय मुख्यमंत्री बने।
हरियाणा चुनाव के बाद प्रदेश में सक्रियता कम कर दी थी विजयवर्गीय ने
बीजेपी नेताओं की माने तो हरियाणा विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाए जाने के बाद से ही विजयवर्गीय ने MP की राजनीति में अपनी सक्रियता को कम कर दिया था। हरियाणा के बेहतर नतीजों के बाद पार्टी ने उन्हें लगातार राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां देना शुरू कर दी थी। इसके चलते विजयवर्गीय मप्र के बजाय देश के अन्य हिस्सों में पार्टी के लिए ज्यादा सक्रिय नजर आए। राष्ट्रीय नेतृत्व के सीधे आदेशों पर लगातार प्रवास करने के बाद यह तय माना जा रहा था कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व अपनी टीम में शामिल कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगा। जून 2015 में पार्टी ने विजयवर्गीय को महासचिव बनाने की घोषणा कर दी थी।
विजयवर्गीय ने महासचिव बनते ही दे दिया था मंत्री मंडल से इस्तीफा
विजयवर्गीय को पार्टी ने जैसे ही महासचिव का पद दिया, वैसे ही उन्होंने मप्र सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। विजयवर्गीय मप्र के मंत्रिमंडल में साल 2003 से जुलाई 2015 तक रहे। महासचिव बनाने के बाद उन्हें पार्टी ने पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभारी बनाया था। जहां पर पार्टी ने लोकसभा चुनाव में तो भारी जीत हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार गई थी। वहीं 2023 के मप्र विधानसभा चुनाव में पार्टी ने विजयवर्गीय को इंदौर की 9 सीटों के साथ ही मालवा-निमाड़ की 66 सीट की जवाबदारी सौंपी थी। जिसमें से वह 48 सीट जीताने में सफल रहे थे।
ऑब्जर्वर केवल विधायकों से राय लेने और पार्टी का मैसेज सुनाने आते हैं
खट्टर के ऑब्जर्वर बनने से किसे फायदा होगा इसको लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि सीएम कौन बनेगा यह तो दिल्ली से ही तय होगा। ऑब्जर्वर की भूमिका केवल विधायकों से राय लेने और आलाकमान का मैसेज सभी विधायकों तक पहुंचाने की होती है। ऑब्जर्वर आलाकमान का फैसला लेकर आते हैं और लोकतांत्रिक तरीके से उस पर अमल कराते हैं।
बुधवार को बोले थे विजयवर्गीय – सीएम का फैसला रविवार तक संभव
इधर, बुधवार को दिल्ली से भोपाल पहुंचे बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि रविवार को मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सभी समीकरण सामने आएंगे। विजयवर्गीय ने आगे कहा था कि मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर आलाकमान फैसला करेगा। वहीं मीडिया के सवाल आपको नई जिम्मेदारी दी जाती है, बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है, आप उसको निभाएंगे?) पर बोले थे कि अभी मेरे पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी है मैं अभी राष्ट्रीय महामंत्री हं।