देश में इस साल के पहले छह महीनों में बाघों की मौत के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2025 तक कुल 107 बाघों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है।

मृत बाघों में 20 शावक भी शामिल हैं, जो भविष्य में बाघों की आबादी के लिए गहरी चिंता का विषय बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान भारत में बाघ संरक्षण की दिशा में खतरे की घंटी है।
सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से सामने आई हैं। मध्य प्रदेश में 29 और महाराष्ट्र में 28 बाघों की मौत हुई है। इन मौतों के कारणों में शिकार, बीमारी, आपसी संघर्ष और मानव हस्तक्षेप प्रमुख माने जा रहे हैं।
वर्ष 2021 से अब तक देश में कुल 666 बाघों की मौत हो चुकी है। इन बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए घटना की जांच के आदेश दिए हैं। मंत्रालय ने राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और जल्द ही इस पर एक व्यापक समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है।
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