मध्यप्रदेश। बाइक हादसे में कोमा गए डॉक्टर के पिता ने लगाया 75.50 लाख क्लेम — इंदौर में कोर्ट ने क्लेम राशि बढ़ाकर 81.95 लाख देने के दिए आदेश – देखें VIDEO

इंदौर में कोर्ट ने एक इंश्योरेंस कंपनी को डॉक्टर के परिवार को 81.95 लाख रुपए देने का आदेश दिया। इंश्योरेंस कंपनी को यह राशि दो साल के ब्याज सहित कुल 95 लाख रुपए चुकानी होगी।

दरअसल, बड़वानी जिले के रहने वाले होम्योपैथिक डॉक्टर हरीश गोले (45) का 4 साल पहले एक्सीडेंट हो गया था, जिसके बाद से वे कोमा में हैं। डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि उनके होश में आने की कोई उम्मीद नहीं है। लेकिन डॉ. हरीश के माता-पिता को अभी भी आस है कि उनके बेटे को एक दिन होश आएगा।

इंदौर कोर्ट ने डॉक्टर के परिवार को दो साल की सुनवाई के दौरान का ब्याज भी देने के आदेश दिए।

डॉ. हरीश के परिवार ने इलाज के लिए कोर्ट में 75.50 लाख रुपए के क्लेम का केस दायर किया था। मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टर के बयान के आधार पर कोर्ट ने माना कि हरीश 100% कोमा में हैं और ताउम्र इसी स्थिति में रहेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने क्लेम राशि में 5 लाख रुपए की बढ़ोतरी करते हुए 81.95 लाख रुपए देने के आदेश दिए। ब्याज समेत ये राशि 95 लाख रुपए है।

प्रदेश में संभवत यह पहला मामला है, जब कोर्ट ने पीड़ित पक्ष द्वारा मांगी गई राशि से 5 लाख रुपए अधिक का मुआवजा मंजूर किया है।

डॉ. हरीश गोले (45) पिछले चार साल से कोमा में हैं।

तेज रफ्तार बाइक ने मारी थी टक्कर

डॉ. हरीश गोले का बड़वानी जिले के मेनीमाता में खुद का होम्योपैथिक क्लिनिक था। 2 मार्च 2021 को वे बाइक से बलवाड़ी से धवली रोड स्थित अपने क्लिनिक जा रहे थे। तभी एक बाइक सवार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में डॉ. गोले के सिर, चेहरे और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उनका प्राथमिक इलाज वरला (सेंधवा) के प्राथमिक अस्पताल में किया गया। फिर गणेश मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, धुलिया रेफर किया गया।

इंदौर में तीन हॉस्पिटल में चला इलाज

अस्पताल में हालत में कोई सुधार न होने पर सीएचसी हॉस्पिटल, इंदौर भेजा गया, जहां डेढ़ माह तक उनका इलाज चला। इस दौरान सिर और रीढ़ की हड्डी की सर्जरी हुई। इसके बाद उन्हें आनंद हॉस्पिटल में 15 दिन तक रखा। फिर डीएनएस हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, लेकिन यहां एक दिन बाद ही उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

सिर में गहरी चोट से कोमा में गए

सिर में गहरी आंतरिक चोट लगने के कारण डॉ. गोले पूरी तरह होश में नहीं आ सके। घर में ही पिछले चार साल से वे बिस्तर पर हैं। उन्हें ट्यूब के माध्यम से जूस, दूध और दवाइयां दी जा रही हैं। माता-पिता उनकी दिन-रात देखभाल कर रहे हैं।

एक साल बाद पिता ने लगाया क्लेम केस

डॉ. हरीश के बुजुर्ग पिता सोहनलाल गोले पेशे से किसान हैं। मां बीना घर संभालती हैं। बेटे की गंभीर स्थिति और इलाज में हुए भारी खर्च को देखते हुए, उन्होंने 7 जनवरी 2022 को अपने वकील अरुण त्रिपाठी के माध्यम से जिला कोर्ट, इंदौर में क्लेम केस दायर किया।

यह मामला बाइक सवार दिनेश पिता धरमसिंह तरोले (निवासी वरला), बाइक मालिक संदेश तरोले और दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दर्ज किया गया। याचिका में बेटे के इलाज में हुए खर्च और परिवार की आजीविका को ध्यान में रखते हुए 75 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति की मांग की गई।

कोर्ट की ऐसी चली प्रोसिडिंग

कोर्ट में तीन बार स्ट्रेचर पर लाए गए डॉ. हरीश

दो साल तक चली सुनवाई के दौरान तीन बार डॉ. हरीश को कोमा की हालत में चलित स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। यहां कोर्ट की टीम ने उनका प्रत्यक्ष परीक्षण किया और उनकी मौजूदा स्थिति का आकलन किया। दरअसल, इस तरह के मामलों में कोर्ट के समक्ष पीड़ित की वास्तविक स्थिति को देखना जरूरी होता है। डॉ. हरीश 4 साल से कोमा में हैं, इसलिए उन्हें एक सुरक्षित वाहन में कोर्ट परिसर तक लाया गया, जहां बाहर ही उनका परीक्षण किया गया।

डॉ. हरीश के पिता सोहनलाल गोले किसान हैं और पिछले 4 साल से बेटे का देखभाल कर रहे हैं।

इनकम टैक्स नहीं भरा था तो यह माना आधार

एक अहम पहलू यह रहा कि डॉ. हरीश इनकम टैक्स नहीं भरते थे। परिवार ने भी कोई ऐसा प्रमाण भी पेश नहीं किया। हालांकि, वे एक होम्योपैथिक डॉक्टर थे और उन्होंने बीएएमएस की डिग्री प्राप्त की थी, इसलिए कोर्ट ने न्याय दृष्टांत के आधार पर कुछ मामलों का हवाला देते हुए निर्णय लिया।

कोर्ट ने एक होम्योपैथिक डॉक्टर की औसत आय 25,000 रुपए प्रति माह मानी और यह भी स्वीकार किया कि डॉ. हरीश भविष्य में 14 साल तक काम कर सकते थे। इस अवधि में उनकी आय बढ़कर नियमानुसार 31,000 रुपए प्रति माह तक हो सकती थी, लेकिन अब यह संभव नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने 81.95 लाख रुपए का क्लेम मंजूर किया।

75 लाख रु. की मांग, कोर्ट ने 81 लाख रुपए किए मंजूर

इलाज और स्थायी विकलांगता को लेकर कोर्ट का फैसला गोले परिवार के एडवोकेट अरुण त्रिपाठी के मुताबिक, कोर्ट ने माना कि डॉ. हरीश पिछले चार साल से कोमा में हैं और उन्हें लगातार चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होगी। इस आधार पर अलग से 5 लाख रुपए इलाज के लिए स्वीकृत किए गए। इसके अलावा, इलाज पर हुए 18 लाख रुपए के खर्च को भी मंजूरी दी गई।

वकील ने बताया, डॉ. अभय पालीवाल ने परीक्षण के दौरान पाया कि डॉ. हरीश 90% कोमा में हैं। स्थायी रूप से मानसिक विकलांग हो चुके हैं। इसका सीधा असर उनकी आत्म-देखभाल, व्यक्तिगत गतिविधियों, संवाद क्षमता, समझदारी और कार्यक्षमता पर पड़ा है, जो पूरी तरह शून्य हो गई है।

4 साल में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, इसलिए परिवार ने डॉ. पालीवाल द्वारा जारी इंडियन डिसएबिलिटी इवैल्यूएशन एंड असेसमेंट प्रमाणपत्र भी अदालत में पेश किया।

सबसे अहम बात यह रही कि कोर्ट ने डॉ. हरीश की मानसिक स्थिति को स्थायी विकलांगता के रूप में स्वीकार किया। वे बोलने, चलने और सुनने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं, इसलिए 52 लाख रुपए मानसिक विकलांगता के लिए स्वीकृत किए गए। कुल 81.85 लाख रुपए के क्लेम का आदेश दिया गया और सिर की चोट को स्थायी माना गया।

कोर्ट ने डॉ. हरीश को 100% मानसिक विकलांग मानते 81.95 लाख का क्लेम मंजूर किया है। अब परिवार ज्यादा राशि के लिए हाईकोर्ट में अपील करेगा।

अरुण त्रिपाठी

एडवोकेट

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