महाराष्ट्र महानगर पालिका चुनाव: बिना मतदान महायुति की 68 सीटों पर जीत, बीजेपी-शिवसेना आगे; नामांकन वापसी पर आपत्ति के बाद चुनाव आयोग करेगा जांच

महाराष्‍ट्र में महानगर पालिका चुनावों में अभी मतदान की तारीख कुछ दूर है, लेकिन कई सीटों पर निर्विरोध उम्‍मीदवार चुने गए हैं. अब इन उम्‍मीदवारों की निर्विरोध जीत को लेकर सवाल उठने लगे हैं, जिसके बाद राज्‍य चुनाव आयोग ने इस मामले में कुछ सीटों पर जांच के आदेश दिए हैं.

जांच पूरी होने के बाद ही निर्विरोध चुने गए उम्‍मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी. चुनाव आयोग जांच के जरिए पता लगाएगा कि आखिर क्‍या दबाव या लालच के काण कुछ उम्‍मीदवारों ने अपने नामांकन वापस लिए थे.

महाराष्‍ट्र में महानगर पालिका चुनावों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई है. आरोप-प्रत्‍यारोप और चुनावी प्रचार के बीच इन चुनावों में महायुति गठबंधन के 68 उम्‍मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है. मतदान में अभी वक्‍त है और ऐसे में महायुति के एक साथ इतने उम्‍मीदवारों के निर्विरोध जीतने पर सवाल उठ रहे हैं.

कल्याण-डोंबिवली बना बीजेपी का गढ़!

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस प्री-पोल जीत में बीजेपी सबसे आगे निकल गई है. महायुति के निर्विरोध जीते कुल 68 उम्‍मीदवारों में से सबसे ज्‍यादा भाजपा के 44, एकनाथ शिंदे के नेतृत्‍व वाली शिवसेना के 22 और अजित पवार के नेतृत्‍व वाली राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2 उम्‍मीदवार शामिल हैं.

बीजेपी के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी कल्याण-डोंबिवली से आई है. यहां पार्टी के 14 नगरसेवक निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जिसने यह साफ कर दिया है कि इस क्षेत्र में महायुति की पकड़ कितनी मजबूत है.

महायुति को बड़ी बढ़त, चुनाव आयोग करेगा जांच

बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों द्वारा नामांकन वापस लेने के चलते चुनावी मैदान खाली होने से महायुति को यह बड़ी बढ़त मिली है. हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध चुनाव होने पर अब सवाल भी उठने लगे हैं. चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है.

खबर के मुताबिक, चुनाव आयोग अब इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि क्या उम्मीदवारों ने अपनी मर्जी से नाम वापस लिए हैं या उन पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव था.

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