मध्यप्रदेश में सरकारी इंजीनियरों के हर रोज कारनामे सामने आ रहे हैं। ताजा कारनामा बरेली-पिपरिया स्टेट हाईवे का है। पुल ढहने से एक बाइक सवार की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए।
अब मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) तीन सदस्यीय टीम से जांच करवा रहा है। ये टीम 7 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। वहीं, लापरवाही के चलते प्रबंधक एए खान को सस्पेंड भी कर दिया गया।
एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि रायसेन के ब्रिज की सही ढंग से देखरेख नहीं हुई। सरियों में जंग लग गई थी। जॉइंट में कचरा भरा था। यह जिम्मेदारों को नहीं दिखा। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सिर्फ यह एक नहीं, बल्कि ऐसे 3 मामले और हैं, जिनमें खराब इंजीनियरिंग के नमूने सामने आ चुके हैं। 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज को लेकर पहले ही भोपाल सुर्खियों में रह चुका है। फिर मेट्रो के 2 स्टेशन भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। भोपाल बायपास का 100 मीटर का हिस्सा भी लापरवाही की वजह से धंस गया। इन नमूनों को सिलसिलेवार जानिए…।
सबसे पहले ताजा मामला…ब्रिज गिरने का रायसेन जिले के बरेली-पिपरिया स्टेट हाईवे पर नयागांव में सोमवार को पुल ढह गया। हादसे में घायल बाइक सवार देवेंद्र सिंह धाकड़ (35) की मौत हो गई। वह अपनी बहन की विदाई कर लौट रहा था।
हादसे के समय पुल के नीचे मरम्मत कार्य चल रहा था और छह मजदूर काम कर रहे थे। पुल ढहते ही मजदूरों ने दौड़कर जान बचाई। हालांकि, एक मजदूर मलबे की चपेट में आकर घायल हो गया। सभी घायलों के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं।
यह मुद्दा विधानसभा में भी गूंज उठा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के बावजूद पुल पर ट्रैफिक नहीं रोका गया और न ही डायवर्जन किया गया। विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि सड़कों और पुलों का गिरना सरकार में भ्रष्टाचार का उदाहरण है और यह सुशासन पर सवाल खड़े करता है।

किसी और के पास थी जिम्मेदारी, दूसरे को कर दिया सस्पेंड रायसेन जिले में गिरे पुल को लेकर एमपीआरडीसी अफसरों की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में प्रबंधक मैनेजर एए खान को निलंबित किया गया है, लेकिन वे भोपाल संभागीय कार्यालय में पदस्थ हैं। आदेश में कहा गया है कि पुल उनकी देखरेख में बन रहा था, लेकिन खान वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मदद के लिए ब्रिज पर पहुंचे थे।
जबकि ब्रिज का पूरा कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारी एडिशनल जनरल मैनेजर विक्रम सिंह ठाकुर के पास है। उनके पदस्थापना आदेश में भी बरेली-पिपरिया रोड, स्टेट हाईवे 31 और 62 का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद एजीएम ठाकुर को केवल शोकॉज नोटिस थमाकर छोड़ दिया गया, जबकि प्रथमदृष्टया जिम्मेदारी उन्हीं पर थी।
अब जिम्मेदार अधिकारी कह रहे हैं कि 7 दिन में जांच का जिम्मा कमेटी को सौंपा है। उसमें साफ हो जाएगा कि पुल का जिम्मा किसके पास था। खान या ठाकुर में से जो भी जिम्मेदार होंगे, उन पर विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री बोले- पुल कांग्रेस शासनकाल में बना, मरम्मत चल रही थी दूसरी ओर, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह पुल कांग्रेस शासनकाल में बना था और इसकी मरम्मत चल रही थी। एमपीआरडीसी के एमडी से रिपोर्ट मांगी गई है और संबंधित इंजीनियर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा, इंजीनियरों के अनुसार ट्रैफिक रोकने जैसी स्थिति नहीं थी।
बीजेपी और कांग्रेस के सवाल-जवाब के बीच इस मामले में पुल के संधारण की जिम्मेदारी में लापरवाही पर प्रबंधक एए खान को निलंबित कर दिया गया। वहीं, मौजूदा और पूर्व संभागीय प्रबंधकों व सहायक महाप्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। मुख्य अभियंता गोपाल सिंह की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई। अगले सात दिन में रिपोर्ट देना है, जिसमें से दो दिन बीत चुके हैं।
क्या खामी रही- एक्सपर्ट के अनुसार, ब्रिज की मरम्मत के दौरान ट्रैफिक डायवर्ट किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से एक तरफ नीचे काम चलता रहा और ऊपर से गाड़ियां गुजरती रहीं। इससे ब्रिज लोड नहीं सहन कर पाया।
अचानक धंसा भोपाल बायपास, जांच में मिली गड़बड़ी
करीब 55 किलोमीटर लंबे भोपाल बायपास के कल्याणपुरी के पास लगभग 100 मीटर का हिस्सा 13 अक्टूबर को 20 फीट तक धंस गया था। दरअसल, रेलवे ओवरब्रिज (ROB) से यह रेनफोर्स्ड अर्थ वॉल की सड़क जुड़ी है। इसमें इंजीनियरों की लापरवाही देखने को मिली थी।
एक्सपर्ट के अनुसार कंपनी ने रेनफोर्स्ड अर्थ वॉल (आरई वॉल) को तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं बनाया। इस वजह से नीचे पानी भर रहा था। वहीं, 5 से 6 साल बीत जाने के बावजूद मेंटेनेंस भी नहीं हुआ। एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार कंपनी ने समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया। इस वजह से 2020 में कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया गया था। इससे पहले भी 2017 में कंपनी ब्लैकलिस्ट की गई थी। इसके बावजूद अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।
इसके बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री सिंह ने जांच कमेटी बैठाई थी। जिसने 27 अक्टूबर को रिपोर्ट दे दी। जिसमें एमपीआरडीसी की जीएम सोनल सिन्हा को मुख्यालय अटैच किया गया। वहीं, एजीएम संजीव जैन पर भी कार्रवाई हुई थी। अब नए सिरे से मरम्मत हो रही थी, जिसमें करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
क्या खामी रही- ब्रिज के पास ही बारिश का पानी जमा था, जिसने मिट्टी को कमजोर कर दिया। वहीं, जीएम सिन्हा और एजीएम जैन ने निरीक्षण नहीं किया। इसी लापरवाही की वजह से सड़क धंस गई।

90 डिग्री एंगल वाला ऐशबाग ब्रिज
भोपाल में ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण मई 2022 में शुरू हुआ था, जिसे 18 महीने में बनना था, लेकिन अब तक यह शुरू नहीं हो सका है। 18 करोड़ रुपए से बने ब्रिज की लंबाई 648 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है। इसमें से ब्रिज का 70 मीटर हिस्सा रेलवे का है।
छह महीने पहले यह ब्रिज 90 डिग्री मोड़ वाली डिजाइन और खराब इंजीनियरिंग की वजह से देशभर में सुर्खियों में रहा। इसके मीम्स तक बन गए। पीडब्ल्यूडी मंत्री सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से जांच कराई थी।
एनएचएआई ने ब्रिज को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें 35-40 किमी प्रति घंटा से अधिक गति से गाड़ी नहीं चलाने का सुझाव दिया गया है। इससे अधिक स्पीड में गाड़ी चली तो हादसा होने का खतरा है। रिपोर्ट के बाद टर्निंग वाले हिस्से को फिर से बनाने की सहमति बनी, लेकिन यह काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
क्या खामी रही- ब्रिज की डिजाइन में ही खामी रही। निर्माण में हुई गंभीर लापरवाही पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 अफसरों को सस्पेंड कर दिया था। इनमें दो सीई सहित सात इंजीनियर्स शामिल हैं। एक सेवानिवृत एसई के खिलाफ विभागीय जांच की गई।
आरओबी का त्रुटिपूर्ण डिजाइन प्रस्तुत करने पर निर्माण एजेंसी एवं डिजाइन कंसल्टेंट, दोनों को ब्लैक लिस्ट किया गया।

मेट्रो के 2 ठिगने स्टेशन भोपाल में एम्स से करोंद तक मेट्रो की ऑरेंज लाइन पर काम चल रहा है। सुभाष नगर से एम्स तक प्रायोरिटी कॉरिडोर है, जिसमें कुल 8 स्टेशन हैं। इन्हीं में से दो स्टेशन- सरगम टॉकीज और केंद्रीय स्कूल की ऊंचाई कम होने का मामला सुर्खियों में रह चुका है। सरगम टॉकीज का मामला पिछले साल सामने आया था। इसके बाद नीचे से सड़क की खुदाई कर दी गई। हालांकि, सड़क इतनी नीचे हो गई है कि बारिश के दिनों में जलभराव के हालात बनेंगे।
केंद्रीय स्कूल मेट्रो स्टेशन का ताजा मामला है। सड़क से स्टेशन की ऊंचाई 5 मीटर ही है। इस वजह से डंपर भी नहीं गुजर सकता। अब आधा मीटर खुदाई और की जा रही है। हालांकि, बाद में मेट्रो कॉरपोरेशन ने तय पैमाने के अनुसार ही काम किए जाने का दावा किया है।
क्या खामी रही- दोनों स्टेशन की ऊंचाई कम रही। जब खामी सामने आई तो सड़क की खुदाई की गई। इस वजह से सड़क से ट्रैफिक बंद किया गया है

ये भी बड़ी चूक…करोड़ों की बिल्डिंग में मीटिंग हॉल ही नहीं बनाया लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए। अब पास की खाली 0.25 एकड़ जमीन कलेक्टर से मांगी गई है। नई बिल्डिंग में 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे, यानी जनता के पैसे की बर्बादी…।

खास बात ये है कि बिल्डिंग निर्माण के दौरान तीन आईएएस अफसर बतौर निगम कमिश्नर के रूप में तैनात रहे। बावजूद किसी को यह नहीं दिखा।
क्या खामी रही- तत्कालीन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी के समय डिजाइन बनी, लेकिन बिल्डिंग की लागत कम करने के चक्कर में मीटिंग हॉल शामिल नहीं किया गया। इस कारण बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन मीटिंग हॉल के लिए अब 10 करोड़ रुपए अलग से खर्च किए जाएंगे। कलेक्टर से जमीन भी मांगी गई है।