एमजीएम मेडिकल कॉलेज स्टाफ नर्स भर्ती घोटाले में शासन ने थी चेतावनी – फर्जी नियुक्तियों पर तत्काल हो कार्रवाई, बावजूद नहीं की कार्रवाई

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स भर्ती घोटाले में 3 साल बाद ही शासन ने भी चेतावनी दी थी। कहा था कि नियुक्ति फर्जी तरीके से हुई हों तो तत्काल कार्रवाई करें। शासन की तरफ से प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेज व सरकारी अस्पतालों में भी यह पत्र पहुंचा था। बावजूद एमजीएम कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई नहीं की।

जबलपुर हाई कोर्ट ने मनसुखलाल सराफ विरुद्ध अरुण कुमार तिवारी व अन्य के केस में 6 अगस्त 2015 को ​फैसला सुनाया था। उसी के तारतम्य में मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव ने 9 नवंबर 2015 को प्रदेशभर के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, पैरामेडिकल काउंसिल, नर्सिंग काउंसिल, मेडिकल यूनिवर्सिटी को पत्र लिखकर निर्देशित किया था।

इस पत्र में स्पष्ट किया था कि विभागीय भर्ती नियम का पालन न करते हुए की गई है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाए। तब एमजीएम मेडिकल कॉलेज में डीन डॉ. एमके राठौर थे। उन्होंने भी पत्र को अनदेखा किया और एमजीएम में इस तरह के प्रकरणों की जांच नहीं करवाई। प्रदेश में 6 सरकारी नर्सिंग कॉलेज हैं। फर्जीवाड़ा किए जाने के दौरान भी इन सभी नर्सिंग कॉलेज से प्रतिवर्ष 300 स्टाफ नर्स प्रशिक्षण लेकर निकलती थीं। बावजूद राजस्थान के पुरुषों को स्टाफ नर्स के लिए नियुक्ति दे दी गईं।

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