कमर और पेट की चर्बी कोरोना रिकवरी में बन सकती है बाधा, जानें एक्सपर्ट्स की राय

फिटनेस का प्रतीक मानी जाने वाली पतली कमर अब कोविड के इलाज के दौरान भी काम आ सकती है. वहीं अगर कमर मोटी है तो समझ लीजिए की ये चिंता की बात हो सकती है. कोविड के इलाज के दौरान सामने आया है कि अगर मरीज दूसरी बीमारियों से जूझ रहा है, तो उसके इलाज और ठीक होने में खासी परेशानियां आ रही हैं. मोटापा भी अब कोविड के इलाज में एक अहम चुनौती बनकर कर सामने आ रहा है. मोटे मरीजों को जहां ठीक होने में समय लग रहा है, वहीं उन्हें हाई वेंटीलेशन प्रेशर की जरूरत भी पड़ती है.

डॉक्टरों ने कहा कि जिन युवाओं ने पिछले एक साल में पेट की चर्बी को बढ़ाया है वह भी मोटे व्यक्ति के रूप में ज्यादा जोखिम में है. पेट पर बढ़ी चर्बी वाले लोगों के मुकाबले दुबले लोग कोविड से तेजी से ठीक हुए हैं. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों ने आगाह किया है कि लोगों के पास अभी खुद को गंभीर कोविड होने से बचाने के लिए अपनी फिटनेस और फिजिक में सुधार करने का समय है.

क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. इमरान नूर मोहम्मद ने कहा कि ऐब्डमन प्रेशर के कारण फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है. सीने और पेट पर फैट के कारण फेफड़े सिकुड़े हुए रहते हैं. जिसके चलते फेफड़ों को काम करना मुश्किल हो जाता है. मोटे रोगियों को भी अधिक समय के लिए बिपेप की आवश्यकता होती है और वेंटिलेटर की अधिक जरूरत पड़ती है. शरीर में फैट के कारण सूजन जैसे मार्क बहुत अधिक हैं. यदि पेट सपाट है तो कोरोना से रिकवरी तेज होती है.

‘मोटापा कम उम्र में एक जोखिम का कारक’:-डॉ मोहम्मद ने कहा कि कई मोटे रोगियों के लिए प्रोन पोजिशन भी संभव नहीं है. ये लॉजिस्टिक चुनौती हैं, जबकि ट्रीटमेंट समस्याएं ऑक्सीजन मास्क के आकार से संबंधित हैं, जो अक्सर उपलब्ध नहीं होती हैं. किंग्सवे अस्पताल के कोविड प्रभारी डॉ. हर्षवर्धन बोरा ने कहा कि कोरोना की पहली लहर में भी मोटापा कम उम्र में एक जोखिम कारक था. चूंकि लोग लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर घर पर रहे, जिसके कारण उनका वजन बढ़ गया. व्यायाम की कमी परेशानियों को बढ़ाती है. मोटापे के मरीज ट्रीटमेंट के दौरान जल्दी ठीक नहीं होते हैं क्योंकि उन्हें हायर वेंटीलेटर प्रेशर की आवश्यकता होती है. यहां तक कि प्रतिरोधक स्लीप एपनिया इस समूह के बीच ऑक्सीजन सैचुरेशन स्तर को कम रखती है.

‘रोजाना एक से दो घंटे करें व्यायाम’:-सेनगुप्ता अस्पताल के निदेशक डॉ. शांतनु सेनगुप्ता ने कहा कि जिन लोगों ने टीका लगवा लिया है और नियमित रूप से व्यायाम कर रहे रहे हैं उनकी अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम होती है. हमें उम्मीद है कि कोरोना की तीसरी लहर नहीं आएगी, लेकिन यह एक ऐसा समय है जब लोग फिटनेस पर 1 या 2 घंटे रोजना खर्च करें. वजन बढ़ना असामान्य आहार के कारण होता है. टीकाकरण के साथ-साथ एक अच्छा स्वास्थ्य आहार और व्यायाम कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण है.

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