रिक्शे वाले की बेटी बनी मिस इंडिया की फर्स्ट रनर अप, बयां की संघर्ष की कहानी, कभी खाने के बिना बिताती थीं रातें

हाल ही में तेलंगाना की मानसा वाराणसी ने VLCC फेमिना मिस इंडिया 2020 का खिताब अपने नाम किया. फेमिना मिस इंडिया की टॉप 5 की रेस में ख़ुशी मिश्रा, रति हुल्जी, मनिका शेओकांड, मान्या सिंह और मानसा वाराणसी पहुंची थी. इसके बाद मानसा वाराणसी , मान्या सिंह और मनिका शेओकांड टॉप में पहुंची. ऐसे में फर्स्ट रनरअप रही मान्या सिंह ने अपने इस मुश्किल सफर के बारे में बताया है. इंस्टाग्राम पर अपने स्ट्रगल की कहानी बताते हुए मान्या ने एक पोस्ट शेयर की थी. उन्होंने बताया कि कैसे रिक्शा चालक की बेटी मिस इंडिया के स्टेज तक पहुंच सकती है.

मान्या सिंह के पिता रिक्शा चालक हैं. ऐसे में मान्या को सब कुछ हाथ में नहीं मिला. उसके लिए उन्होंने कड़ी महनत की. कई रात वो बिना खाए नींद लीं. इंस्टाग्राम पर अपने परिवार की तस्वीरों के शेयर करते हुए मान्या ने लिखा, ‘मैंने भोजन और नींद के बिना कई रातें बिताई हैं. मैं कई दोपहर मीलों पैदल चली. मेरा खून, पसीना और आंसू मेरी आत्मा के लिए खाना बने और मैंने सपने देखने की हिम्मत जुटाई. रिक्शा चालक की बेटी होने के नाते, मुझे कभी स्कूल जाने का अवसर नहीं मिला क्योंकि मुझे अपनी किशोरावस्था में काम करना शुरू करना था.’

पढ़ाई के लिए माता-पिता ने गिरवी रखे जेवर
उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे पास जितने भी कपड़े थे, वो खुद से सिले हुए थे. किस्मत मेरे पक्ष में नहीं थी. मेरे माता-पिता ने अपने जेवर गिरवी रखे, ताकी वो डिग्री के लिए परीक्षा फीस दे सकें. मेरी मां ने मेरे लिए बहुत कुछ झेला है. 14 साल की उम्र में, मैं घर से भाग गई.’

शाम को बर्तन साफ किए और रात में कॉल सेंटर में काम किया
आगे उन्होंने बताया, ‘मैं किसी तरह दिन में अपनी पढ़ाई पूरी करने में कामयाब रही. शाम को बर्तन साफ किया करती थी और रात में कॉल सेंटर में काम किया. मैंने स्थानों तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल चला है ताकि मैं रिक्शा का किराया बचा सकूं.’

‘मैं आज यहां वीएलसीसी फेमिना मिस इंडिया 2020 के मंच पर अपने माता-पिता और भाई की वजह से पहुंची हूं. मैं दुनिया को बताना चाहती हूं कि यदि आप अपने सपनों के लिए प्रतिबद्ध हैं तो यह सब संभव है.’

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