पिछले महीने 3 जनवरी को मऊगंज में दो पक्षों के बीच जमीनी विवाद को सुलझाने पहुंचे मऊगंज से बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल अगले दिन से गायब थे। पांडे और मिश्रा परिवार के बीच 30 डेसिमिल जमीन के विवाद में पहुंचे विधायक पर कुछ लोगों ने डीजल डालकर जलाने की कोशिश की।

विधायक के भोपाल में होने की जानकारी मिली तो बीएचएलई स्थित प्रदीप पटेल की बहन के घर पहुंचकर दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की।
प्रदीप पटेल: मैं यहीं भोपाल में था। एक हॉस्पिटल में हमारे यहां के मरीज आते हैं, वहां हमारा सेवा कार्य चलता है। उनके भोजन-पानी, रहने आने-जाने की व्यवस्था करते हैं। हमारी माता जी 90 वर्ष से अधिक आयु की हैं, वो यहीं रहती हैं। हमारे स्टाफ के पास जो काम या आवेदन आते हैं, वो सब हमारा लगातार चल रहा है।

बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल।
प्रदीप पटेल: 3 जनवरी को एक घटना हुई थी। जिसमें कुछ लोगों ने डीजल डालकर मुझे जलाने का प्रयास किया था। उसके वीडियो भी सभी ने देखे थे। घटना के अगले दिन सुबह हमारे निवास पर बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठी हो गई।
कुछ उत्तेजना वाली बातें होने लगीं। तो मुझे लगा कि कहीं टकराहट न हो। इसलिए मैंने अपने कार्यक्रम निरस्त कर दिए थे। मेरी आंख में जरूर चोट लगी थी तो मैं रीवा आ गया था उसके बाद भोपाल आ गया था। तभी से भोपाल में हूं।
आप जिस गैंग की बात कर रहे हैं। मैं बताऊं कि मैंने इस घटना की सूचना थाने में दी। उसके बाद हम यहां आए तो शाम को रीवा में मेरे पास एक फोन आया और मुझे धमकी दी गई कि विधायकी उतार देंगे, देख लेंगे। उसके बाद मैंने मोबाइल बंद कर लिया और भोपाल आ गया था।

प्रदीप पटेल: चूंकि, छोटे-बडे़ मामलों को मिलाकर मेरे ऊपर यह छठवां हमला है। कई बार पथराव हुआ, लोग घायल हुए। लोग घर के बाहर जान से मारने के लिए आ गए। मुझे लगा कि हम तो भोपाल चले आए, लेकिन जो लोग धमकी दे रहे हैं वो घर पर जाएं और ये मैसेज बने कि विवाद हुआ।
मैंने सोचा कि हमारे लोग निकलें या घर के लोग निकलेंगे तो टकराहट हो सकती है। बतौर सावधानी मैंने ये कहा था कि किसी से कुछ मत कहो अपने घर में रहो, कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं हैं।

क्या आपने अपनी पार्टी में या मुख्यमंत्री को ये बातें बताईं थीं?
प्रदीप पटेल: हां, जैसे ही घटना हुई मैंने विधानसभा अध्यक्ष जी, मुख्यमंत्री जी से बात की। उनको आवेदन दिया। उन्होंने उस पर कार्रवाई करवाई। उसके बाद जब फोन आने लगे तो मुझे लगा कि मैं क्षेत्र में जाऊंगा तो टकराहट हो सकती है।
मैंने यह विचार किया कि हम थोड़ा अगर क्षेत्र से दूरी बना लें तो हमारे लोगों के भीतर का आक्रोश थमेगा। यही एकमात्र विकल्प था, क्योंकि टकराना अच्छी चीज नहीं थी। हमने सब लोगों को समझाया कि विधानसभा सत्र आने वाला है जिसके जो काम होंगे सब करेंगे। इसलिए मैं यहां आ गया था।

अपनी ही सरकार में आपको इतनी असुरक्षा क्यों महसूस हो रही है?
प्रदीप पटेल: घटना करने वाले लोग ये क्यों कर रहे हैं? हमारे साथ ही ये क्यों हो रहा है? ये मैं बता सकता हूं कि मैं जब से विधायक बना हूं तो वहां पर जो अवैध नशे का कारोबार है उसके खिलाफ मैंने उसे रोकने के लिए पूरी ताकत लगाई और खूब लड़ाई लड़ी।
प्रशासनिक स्तर पर, भाषणों में भी फील्ड में मैंने खूब बोला। उसको लेकर पकड़-धकड़ भी खूब हुई। मेरे ऊपर पहली बार घर के सामने जो घटना हुई थी उसमें ये हुआ ही था कि नशे का सामान पकड़ गया था। उसके प्रतिशोध में वो नाराज होकर मेरे ऊपर हमला करने आए थे। हमारे यहां कई स्पॉट थे जहां बसों में लूट हो जाती थीं।

नशे के कारण स्थानीय लोग आवाज नहीं उठाते?
प्रदीप पटेल: हमारे यहां एक ब्राह्मणों का गांव जमोई है। वहां 20-22 लोग जिनमें युवा, बच्चे भी कोरेक्स के नशे के कारण खत्म हुए। किसी का लिवर खराब हो रहा, किसी का एक्सीडेंट हो रहा। उनके माता-पिता रो रहे। इस कारण से मुझे लगा कि मुझे इसमें कंट्रोल करना है। हमारी सरकार और मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर खूब कार्रवाईयां हुईं और लोग जेलों में ठूंसे। इसलिए बौखलाहट में लोग ये सब कर रहे हैं।

भास्कर: नशे के कारोबार को आपके क्षेत्र में बढ़ावा कौन दे रहा है?
प्रदीप पटेल: हमारे यहां कांग्रेस के एक लीडर हैं उन्होंने मंच से बोला था कि कोरेक्स और गांजे का छोटे-मोटे लोग कारोबार करते हैं तो मैं उनकी मदद करता हूं। उन्हें उन नशा कारोबारियों की बेरोजगारी दिख रही है। लेकिन उन्हें ये नहीं दिख रहा कि उस नशे के कारण हजारों लोग मर रहे हैं।
ये किसने कहा था?
प्रदीप पटेल: हमारे यहां कांग्रेस के पूर्व विधायक रहे हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम में ये कहा था उनके समय में ये सब चीजें हुईं। वो सब ऐसे लोग हमारे खिलाफ थे। सोशल मीडिया में लोग धमकी देते हैं। उनका हमारे कारण नुकसान हो रहा है तो टकरा रहे हैं। मेरे ऊपर इतनी बार हमले होने के बाद मैं लगा हूं।
अब आप मऊगंज कब जा रहे हैं?
प्रदीप पटेल: विधानसभा सत्र के बाद जाऊंगा।
क्या अब डर-भय का माहौल नहीं हैं?
प्रदीप पटेल: क्षेत्र की जनता के लिए मेरा यह मैसेज था कि आप उन लोगों से टकराएं नहीं। उस टकराव को रोकने के लिए मेरे पास यही विकल्प था। वरना हमारे पास वोट है, इतनी बड़ी पार्टी है कार्यकर्ता हैं, उनके अंदर क्रोध होता है अपने कार्यकर्ताओं को रोकना हमारा काम है। अगर हम भी उनकी तरह टकराने लगें तो उनमें और हमारे में क्या अंतर रह जाएगा?

भास्कर: सोशल मीडिया पर ये भी कहा जा रहा था कि आपकी उस जमीन पर नजर थी?
प्रदीप पटेल: नहीं, मेरा कोई मतलब नहीं। मुझे विनोद मिश्रा जी ने फोन किया। उनकी 70 साल की उम्र है। उनके बेटे हैं नहीं, उनकी जमीन में जबरन कब्जा हो रहा था। उन्होंने शिकायत की और स्टे लिया। पटवारी, तहसीलदार ने ये बात मुझे बताई।
स्टे लेने के बाद उनकी जमीन पर कब्जा करके बोर कर लिया। अब वो कहां जाएं बच्चे हैं नहीं लड़ सकते नहीं। बहुत जगह पर ऐसा करते हैं। उनको लगा कि विधायक जी को बोल देंगे तो साईलेंट हो जाएंगे। मैं तो जनता के लिए काम कर रहा हूं।
वहां पर पुलिस ने समय पर एक्शन नहीं लिया। मैं तो डीआईजी को बताकर गया था। कि मैं वहां जा रहा हूं। मैं ये सोचकर गया था कि दोनों पक्षों को बिठाकर समझा देंगे। लेकिन, वो तो अपराधी प्रवृत्ति के लोग हैं। शुरुआत में दो घंटे तक मैं वहां बैठा रहा एक ऑनलाइन मीटिंग भी वहीं से अटैंड की।
अचानक दो तीन घंटे बाद ऐसा लगता है कि लोग प्लानिंग करके गालियां देते हुए आए और कहा डीजल लेकर आओ मुझे खत्म कर देंगे। फिर गांव के कुछ लोगों ने मुझे बचाया। फिर अंतिम समय में एसडीओपी भी वहां पहुंच गईं उन्होंने कहा कि विधायक जी आप यहां से जाइए।

क्या विधानसभा में भी इस मामले को उठाएंगे?
प्रदीप पटेल: विधानसभा में क्या उठाना, हम तो लगेंगे। इनके जैसे लोग तो पहले छह बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन बचाने वाला ऊपर बैठा है। हमारी सरकार कोरेक्स और नशे के कारोबार को ध्वस्त करने में लगी है।
क्या इसके पीछे नशे का कारोबार है?
प्रदीप पटेल: ये पूरे नशा माफिया है। स्टे नहीं मानेंगे, कानून नहीं मानेंगे। जो इस तरह के लोग है उनको हमसे दिक्कत है।

क्या सुरक्षा बढ़ाने की बात हुई है?
प्रदीप पटेल: अब उनके पास जो फीडबैक सुरक्षा की दृष्टि से आएगा तो वे करेंगे, लेकिन एरिया सेंसटिव है बॉर्डर का क्षेत्र है टकराहट हो रही है तो इस विषय में विचार करेंगे।