रिसर्च में दावा:मॉडर्ना की COVID-19 वैक्सीन 3 महीने तक शरीर में एंटीबॉडी को बने रहने में करती है मदद

देश-दुनिया में कहर ढा रहे कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ विकसित की जा रही वैक्‍सीन को लेकर कंपनियों और संस्‍थानों ने इसके प्रभावीकरण के कई दावे किए हैं. इन्‍हीं में एक से मॉडर्ना की कोरोना वैक्‍सीन  है. कंपनी का कहना है कि यह वैक्‍सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 94 फीसदी तक प्रभावी है.

मॉडर्ना की वैक्सीन को लेकर गुरुवार को एक स्टडी में कहा गया है कि Moderna की COVID-19 Vaccine से मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली में शक्तिशाली एंटीबॉडी का उत्पादन होता है, जो कि कम से कम से तीन महीने तक रहता है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिज़ीज़ेज़ (NIAID) के शोधकर्ताओं ने क्लीनिकल ट्रायल के पहले चरण से 34 व्यस्क प्रतिभागियों के इम्युन रिस्पॉन्स का अध्ययन किया है. इनमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं. एनआईएआईडी ने मॉडर्ना के साथ मिलकर वैक्सीन को विकसित किया है.

शोधकर्ताओं ने न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में कहा है कि SARS-CoV-2 वायरस को मनुष्य की कोशिकाओं पर हमला करने से रोकने वाले एंडीबॉडी का सभी प्रतिभागियों में स्तर वैक्सीन के तीन महीने के बाद तक ऊपर बना रहा है. हालांकि, एंडीबॉडी की संख्या में समय के साथ थोड़ी गिरावट देखी गई, जो कि अपेक्षित थी.”

वैक्सीन, जिसे mRNA-1273 भी कहा जाता है, दो इंजेक्शन 28 दिन के अंतराल में लोगों को दिए गए थे. स्टडी में कहा गया है कि समय के साथ एंडीबॉडी की संख्या भले ही कम हो गई हो, लेकिन जरूरी नहीं है कि यह चिंता का कारण हो.

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