
कोरोना संकट के बीच होने वाले मानसून सत्र के लिए सदन को नए तरीके से तैयार किया जा रहा है। इसी को लेकर राज्यसभा अध्यक्ष ने मानसून सत्र के लिए अगस्त के तीसरे सप्ताह तक पूरी तैयारी का निर्देश दिया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के आरंभ में मानसून सत्र की शुरूआत होने की संभावना है ।
उधर राज्य सभा सचिवालय की तरफ से कहा गया है कि सदन के कक्ष में चार बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन लगाने के अलावा कई उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा सदन की चार गैलरियों में छह छोटी स्क्रीन, गैलरियों में ऑडियो कंसोल, पराबैंगनी कीटाणुनाशक विकिरण, ऑडियो-विज़ुअल सिग्नल के संचरण के लिए दो सदनों को जोड़ने वाले विशेष केबल, पॉली कार्बोनेट शीट को सदन के कक्ष से आधिकारिक गैलरी को अलग करना शामिल है। ये सभी व्यवस्थाएं, कोरोनो वायरस संक्रमण को ध्यान में रखते हुए रोकथाम और बचाव के तहत अपनाई जा रही हैं और यह सब सदन के इतिहास में भी पहली बार हो रहा है। सदन को चार-चार घंटे के लिए आयोजित करने पर विचार
कोरोना महामारी के बावजूद केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसमें सांसद शारीरिक रूप से उपस्थित होंगे। इसके तहत प्रति दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही चार-चार घंटे के लिए आयोजित करने पर भी विचार किया जा रहा है। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय ने सरकार को संसद सत्र के संबंध में कुछ सुझाव दिए हैं। इसके बाद सरकार द्वारा जल्द इस सिलसिले में अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
इसके साथ ही इस सुझाव पर भी विचार किया जा रहा है कि संसद सत्र का आयोजन केंद्रीय कक्ष में दो सत्रों में किया जाए। पहले सत्र में चार घंटे लोकसभा की कार्यवाही हो और दूसरे सत्र में चार घंटे राज्यसभा की कार्यवाही हो।
कोरोना संक्रमण के चलते विलंब हो चुका मानसून सत्र
सूत्रों के अनुसार मानून सत्र को लेकर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर अभी विचार कर रही है और इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है। कोरोना महामारी के कारण संसद के मानसूत्र सत्र में पहले ही विलंब हो चुका है। इसके अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है।