
उज्जैन प्राधिकरण में वर्ष 2012 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर मकान का आंवटन फर्जी दस्तावेज के आधार पर हुआ था। मामले में शिकायत के बाद केवल जांच कर ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसके बाद फिर शिकायत हुई तो पुलिस ने 12 वर्ष बाद प्रकरण दर्ज कर मामले में प्राधिकरण के बाबू और एक सर्विस प्रोवाइडकर को गिरफ्तार किया है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के संभागीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय कौर कमेटी के सदस्य संजय चौबे ने 1985 में दिवंगत हो चुके सागर जिले के खुरई निवासी स्वर्गीय सुदामा प्रसाद अग्रवाल के नाम पर वर्ष 2012 में उज्जैन विकास प्राधिकरण में हुए फर्जीवाडे की शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि फर्जीवाडे को तत्कालिन बाबू प्रवीण गहलोत और सर्विस प्रोवाइडर आशीष अग्रवाल ने मिलकर अंजाम दिया है। हालांकि इसके पहले भी शिकायत हुई थी, तब जांच कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब 12 वर्ष बाद फिर शिकायत हुई तो पुलिस ने जांच के बाद बाबू प्रवीण गहलोत और सर्विस प्रोवाइडर आशीष अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जिन्हे रिमांड पर लिया जा रहा है। इस मामले में ओर भी नाम सामने आ सकते है।
ऐसे किया था फर्जीवाड़ा
पुलिस ने बताया कि सर्विस प्रोवाइडर आशीष अग्रवाल मृतक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुदामा प्रसाद अग्रवाल का नाती है। वर्ष 2012 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने एक विज्ञप्ति निकाली थी, जिसमें एलपी भार्गव नगर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के कोटे का मकान खाली बताया गया था। बाबू प्रवीण गहलोत और आशीष अग्रवाल ने मिलकर योजना बनाई की। प्रवीण को आशीष ने बताया उसके नाना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है और उनकी मृत्यु हो गई है। दोनों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर कुटरचित दस्तावेज तैयार किए। दस्तावेज में मृतक सेनानी का आय प्रमाण पत्र, शपथ पत्र नोटरी से तैयार करवाकर मृत सेनानी के नाम से एलपी भार्गव नगर का मकान आवंटित करा लिया था।