
मध्यप्रदेश में 27 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होने हैं। कमलनाथ सरकार को डुबोकर सत्ता समुद्र में कमल का फूल खिलाने वाले ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ जिन 22 विधायकों ने तथा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थक 2 विधायकों ने पलटी मारी थी उनमें 14 विधायकों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभागों के साथ मंत्री बनाया है। इन 14 मंत्रियों में राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत तथा जलसंसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने मंत्रिमंडल के पहले ही खेफ में शपथ ली थी और आगामी 20 सितंबर तक इन्हें प्रावधान के अंतर्गत विधानसभा सदस्य के रूप चुनकर आना होगा, या मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना होगा। यदि मुख्यमंत्री ने चाहा तो इन दोनों मंत्रियों की समय सीमा पार होने के बाद दोबारा शपथ 6 महीने के लिये फिर से होगी। रहा सवाल अन्य एक दर्जन मंत्रियों का तो इन्हें भी नवंबर महीने तक हर हाल में चुनाव जीतकर विधानसभा का सदस्य बनना होगा, या फिर से शपथ लेनी होगी।
खोज खबर यह है कि ग्वालियर चंबल इंदौर और उज्जैन संभाग जहां जहां विधानसभा उप चुनाव होने वहां के संभाग आयुक्त एवं सभी जिलाधीशों ने एक स्वर में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजते हुए असमर्थता जाहिर की है, और कहा है कोरोना संक्रमण जितनी तेजी से फैल रहा है, उसके अनुसार सारा शासकीय अमला तो कोरोना के नियंत्रण में सक्रीय रहेगा। मतदान केन्द्रों पर मतदान कराने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पी.पी.ई. किट्स पहनाकर भी चुनाव कार्य में लगा दिये जाये तो कानून एवं व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल का अभाव रहेगा। सूत्रों के अनुसार भेजी गई रिपोर्ट में सभी कलेक्टर यह कह रहे हैं कि कोरोना महामारी के इस भयावह संक्रमण को देखते हुए विधानसभा के उप चुनाव फिलहाल संभव ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश में लहु-लुहान होते तथा लाशों का दंश झेल रही जनता को चुनाव के लिए इस समय कैसे बाध्य किया जा सकता है। एक रिपोर्ट में तो यह भी कहा गया है कि आने वाले 4 महीनों के भीतर त्योहार ठीक से मनाने की स्थिति में भी कोरोना की वजह से जनता नहीं रहेगी। इस सब कारणों का हवाला देते हुए कलेक्टर द्वारा शायद यही कहा गया है कि फिलहाल इस साल चुनाव ना हो तो बेहतर होगा। हालांकि निर्वाचन आयोग को विषम से विषम परिस्थितियों में चुनाव कराने में महारथ हासिल है, परन्तु कोरोना नियंत्रण में भी चुनाव आयोग ‘महारथी’ बन जाये इसकी संभावना नहीं है। यह बात अवश्य है कि चुनाव समय में नहीं होने की स्थिति में मध्यप्रदेश के तीन बड़े राजनेता तनाव पर है। इन तीन नेताओं में महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया की चिंता सबसे बड़ी है क्योंकि उनके समर्थक 14 मंत्रियों का क्या भविष्य होगा। दूसरा सवाल उठेगा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा आरोप लगाया जायेगा कि मुख्यमंत्री जानबूझकर चुनाव टाल रहे हैं। वे राष्ट्रपति शासन की मांग करेंगे। चुनाव समय पर नहीं होने से कुछ मंत्री भी बुरी तरह असमंजस में हैं कि उनका आखिर क्या होगा। कुछ मंत्रियों के बारे में रिपोर्ट है कि उनका चुनाव में जीतना कठिन हो जायेगा, जबकि कुछ मंत्री अपने-अपने क्षेत्र में जीत के प्रति आत्मविश्वास में लवरेज है, चुनाव चाहे कभी भी हो, अभी तो सत्ता का सुख भोगो। घबराहट सब में है, शासकीय मशीनरी से लेकर चुनाव आयोग की टीम में भी है, परन्तु इसका हल खोजे बिना चुनाव समय पर होंगे संभावना बिल्कुल नहीं है। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बो लुआब यह है कि मध्यप्रदेश में 27 विधानसभा क्षेत्रों के उप चुनावों पर कोरोना का ग्रहण लगा हुआ है। जब तक कोरोना का इलाज घोषित नहीं होता तब तक शायद चुनावों की तारीख भी घोषित नहीं होगी, और ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश के सभी 27 विधानसभा उपचुनाव जनवरी 2021 तक टाल दिये जाये या फिर बिहार राज्य के आम चुनावों के साथ कराये जायें तो आश्र्चय नहीं होगा।