एमपी। फर्जी नौकरी, हथियारों की तस्करी और धोखाधड़ी…सलाखों के पीछे पहुंची महिला ठग कुसुम भदौरिया, नौकरी लगवाने का देती थी झांसा; अधिकारी और नेता बनकर करती थी ठगी – देखें VIDEO

कुसुम भदौरिया को कोर्ट ने दस साल की सजा सुनाई।

तारीख- 17 जुलाई 2021

भिंड की महिला थाना पुलिस को सूचना मिली कि एक महिला भोपाल के सचिवालय में नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम ऐंठ रही है। उसके अन्य गलत कामों में भी शामिल होने की आशंका है।

सूचना को पुख्ता करने के लिए पुलिस की एक टीम बनाई गई। टीम को गलत काम में लिप्त होने के सबूत मिल गए। इस पर टीम अवैध हथियार की खरीदार बनकर महिला के घर पहुंच गई। जैसे ही महिला डीएसपी पूनम थापा समेत टीम को पूजा घर में लेकर गई। यहां रखे हथियार देखकर टीम की आंखें चौंधिया गईं।

टीम ने सर्चिंग की तो महिला के घर से सरकारी विभागों की 8 नकली सील, दर्जनभर फर्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी आईडी कार्ड समेत अन्य कई तरह के फर्जी सरकारी दस्तावेज मिले। देशी पिस्टल और इंसास राइफल के कारतूस भी बरामद हुए।

पुलिस ने FIR दर्ज की और मामला कोर्ट पहुंचा। 8 मई 2025 को भिंड कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया और आरोपी कुसुम भदौरिया को 10 साल जेल और 1 लाख 60 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। केस में सह आरोपी रहे एक व्यक्ति को बरी कर दिया।

कोर्ट से लेकर भिंड के यदुनाथ नगर की गलियों की तह तक जाकर इस केस की पड़ताल की। यह जानने की कोशिश की कि खुद को कभी पत्रकार तो कभी नेता, अधिकारी बताने वाली महिला कैसे दलाली और फिर गंभीर अपराधों में लिप्त हो गई। पढ़िए, सलाखों के पीछे पहुंची महिला ठग की कहानी…

पहले देखिए केस से जुड़ी दो तस्वीरें…

पूजा घर में छिपा रखा था हथियारों का जखीरा पुलिस के अनुसार जुलाई 2021 में सूचना मिली थी कि यदुनाथ नगर निवासी कुसुम भदौरिया गलत कामों में लिप्त है। वह अवैध हथियारों की तस्करी भी करती है। डीएसपी पूनम थापा ने टीम के साथ मिलकर महिला को पकड़ने की प्लानिंग की। टीम ने पिस्टल खरीदी का फर्जी सौदा किया और महिला के घर पहुंची।

आरोपी के घर से पिस्टल, इंसास कारतूस और कई स्कूल-कॉलेजों की फर्जी सीलें बरामद हुईं। पूछताछ में आरोपी ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करना भी स्वीकारा। भोपाल सचिवालय में भृत्य की नौकरी लगाने के नाम पर युवकों से एक लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक वसूले थे। रकम लेने के बाद वह युवकों को लंबे समय तक टालती रही और नौकरी का झूठा आश्वासन देती रही।

पुलिस ने सख्ती की तो कुसुम ने फूप के रहने वाले राजनारायण शर्मा का नाम अपने सहयोगी के तौर पर लिया। इसके आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर मामला भिंड कोर्ट में पेश किया। करीब चार साल तक मामला कोर्ट में चला।

10 लाख लेकर फर्जी तरीके से काउंसिलिंग कराई मुरैना निवासी देवेंद्र शर्मा से कुसुम ने सचिवालय में नौकरी लगवाने के नाम पर 10 लाख रुपए लिए थे। इसके बाद फर्जी तरीके से काउंसिलिंग कराई और फर्जी आदेश थमाया। देवेंद्र ने ही पुलिस को शिकायती आवेदन सौंपा था।

पुलिस को महिला के पास से भोपाल, दिल्ली, भिंड के कई अखबारों के ID कार्ड मिले थे। जांच में पता चला कि यह महिला लोगों को ठगते समय कभी खुद को पत्रकार बताती थी, तो कभी अफसर। इतना ही नहीं मौका पड़ने पर नेता भी बन जाती थी। महिला से अखबारों के कार्ड के अलावा कई स्कूल-कॉलेजों, सरपंच, सचिव, SDM सहित दूसरें अफसरों की सीलें बरामद हुईं थी।

पुलिस पूछती तो चुप्पी साध लेती थी महिला ठग  टीम ने जब ठगी का जाल फैलाने वाली कुसुम भदौरिया की पड़ताल की, तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। तत्कालीन महिला थाना प्रभारी रत्ना जैन ने बताया कि आरोपी महिला को हथियार तस्करी के संदेह में पकड़ा गया था। उसके पास से बड़ी संख्या में कूटरचित दस्तावेज, सील, अवैध हथियार और कारतूस बरामद हुए थे।

पूछताछ के दौरान महिला ने ज्यादा कुछ नहीं बताया था। हथियार और कारतूसों के मामले में वह शातिर बदमाश की तरह पेश आई। उसने बताया था कि ये सामान पैतृक है। ज्यादा कुछ पूछने पर वह हर सवाल पर चुप्पी साध लेती थी।

नौकरी लगाने एडवांस में साढ़े तीन लाख लिए थे महिला के हाथों ठगे गए मुरैना के सिकरौदा निवासी जुगल किशोर शर्मा ने बताया कि करीब पांच साल पहले उनकी मुलाकात कुसुम भदौरिया से हुई थी। यह मुलाकात उनके बहनोई जगदीश शर्मा के जरिए हुई थी। कुसुम ने भोपाल सचिवालय में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। 6 लाख रुपए में सौदा तय हुआ।

कुसुम के बुलाने पर मैं और मेरे जीजा जगदीश शर्मा भोपाल गए। वहां होटल में दो दिन रुकवाया और अंकसूची, आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज ले लिए। वहां, एक युवक इंटरव्यू लेने भी आया। इसके बाद कुसुम ने साढ़े तीन लाख रुपए एडवांस के तौर पर ले लिए। बाकी राशि जॉइनिंग लेटर मिलने के बाद देने को कहा। इसके बाद हम वापस लौट आए।

इसके बाद जब भी नौकरी का पूछा, उसने एक ही जवाब दिया, जल्द कॉल लेटर आएगा। ज्यादातर बातचीत बहनोई जगदीश ही किया करते थे।

 

जगदीश शर्मा बोले- मैं उसे नहीं जानता  जगदीश शर्मा से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने ठग महिला से जान-पहचान की बात स्वीकारी। उन्होंने बताया कि साले की नौकरी लगवाने के लिए कुसुम को पैसा दिया था। हमने उनसे पूछा- कुसुम किस तरह से लोगों को ठगती थी। बेरोजगारों को ठगने का क्या तरीका अपनाती थी… उन्होंने पूछा आप कौन हैं।

जैसे ही हमने  जिक्र किया, उन्होंने फोन कट कर दिया। दूसरी बार कॉल करने पर जगदीश बोले- मैं उसे नहीं जानता। पाली के रमेश और फूप के राजनारायण से बात करिए।

जब राजनारायण शर्मा से संपर्क किया और ठगी महिला के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनका कुसुम भदौरिया से कोई संपर्क नहीं था। उन्हें झूठा फंसाया गया।

जांच में सहयोग नहीं करने पर जताई कड़ी नाराजगी कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि आरोपी महिला ने भोले-भाले युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ की और गंभीर अपराधों को अंजाम दिया। इनके चलते उसे सजा सुना दी। वहीं, पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण सहआरोपी राजनारायण शर्मा को दोषमुक्त करार दिया गया।

जांच के दौरान कुसुम ने पुलिस के साथ कोई सहयोग नहीं किया। यहां तक कि उसने अपने मोबाइल का पासवर्ड तक नहीं बताया। पुलिस ने इस बात का उल्लेख रिपोर्ट में किया, जिस पर कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई और इसे न्यायिक प्रक्रिया का अपमान बताया।

इंसास कारतूस कहां से आए, यह अब तक रहस्य छापेमारी के दौरान महिला के पास इंसास राइफल के कारतूस मिले थे। ये कारतूस उसके पास कहां से आए थे, इस बारे में उसने पुलिस को कुछ नहीं बताया। हालांकि, पूछताछ में एक बार कुसुम ने बताया था कि उसके पास इंसास कारतूस सीआरपीएफ से आए थे।

सीआरपीएफ में इसका कोई मिलने वाला था। इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी और अब तक रहस्य बनी हुई है। बाद में पुलिस ने भी इस दिशा में कोई पड़ताल नहीं की।

बता दें, इंसास राइफल (INSAS) भारत में विकसित एक स्वदेशी असॉल्ट राइफल है, जिसे ऑर्डनेंस फैक्ट्री में भारतीय सेना के लिए तैयार जाता है। पहली बार इसका उपयोग 1999 के कारगिल युद्ध में हुआ था। यह भारत की आत्मनिर्भर सैन्य तकनीक का प्रतीक रही है।

पूछताछ करने वाले अफसरों को सम्मोहित करने की कोशिश इस केस की जांच में शामिल रहे पुलिस अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि कुसुम भदौरिया बेहद चालाक किस्म की अपराधी है। उसने पूछताछ के दौरान पुलिस को बहुत बार घुमाने की कोशिश की। बार-बार अपने स्टेटमेंट्स बदले।

उन्होंने बताया कि कुसुम का स्वभाव तांत्रिक किस्म का लगता था। उसके हाथ में कट के निशान दिखाई दिए थे। पूछने पर उसने बताया था कि पूजा के दौरान वह रोजाना अपना रक्त माता को भेंट करती थी। उसने पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारियों को भी सम्मोहित करने की कोशिश की। काफी देर तक आंखों में देखने की कोशिश करती थी। उसके मोबाइल के पीछे भी मंत्र लिखा मिला था।

फैसले से पहले भागने की फिराक में थी कुसुम फैसले वाले दिन जब कुसुम को भनक लगी कि उसे सजा होने वाली है, तो वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुई। जबकि दूसरा आरोपी राजनारायण शर्मा समय पर कोर्ट पहुंचा। इस पर न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने तत्काल महिला थाना पुलिस से कहा कि महिला आरोपी को खोजकर अदालत में पेश किया जाए।

महिला थाना प्रभारी क्रांति राजपूत ने टीम के साथ कुसुम के घर दबिश दी, जहां वह कपड़ों का बैग लगाकर भागने की तैयारी में थी। पुलिस ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने कुसुम को सेंट्रल जेल, ग्वालियर भेज दिया। अगले दिन अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया।

 

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