
अवैध शराब की पोर्टेबल फैक्ट्री में देसी के अलावा व्हिस्की, बीयर और रम भी तैयार की जा रही है।
दमोह जिले के पथरिया में खेतों में नकली शराब बनाई जा रही है। ये शराब दमोह के अलावा छतरपुर, सागर और पन्ना समेत 12 से ज्यादा जिलों में सप्लाई हो रही है। नकली शराब बनाने का एक अड्डा के कैमरे में कैद हुआ है। शराब माफिया से रिपोर्टर ने डील की तो वह भोपाल तक नकली शराब सप्लाई करने के लिए राजी हो गया।
मध्यप्रदेश में नकली शराब के नेटवर्क को जानने के लिए रिपोर्टर ने 15 दिन तक पड़ताल की। इस पड़ताल के 3 अहम पॉइंट्स पता चले। कुछ महीने पहले पुलिस ने अवैध शराब बनाने की फैक्ट्री को सीज किया था। शराब बनाने वालों को गिरफ्तार भी किया था।
माफिया ने अवैध शराब का कारोबार फिर शुरू कर दिया। खेत और खुले मैदान में अवैध शराब की पोर्टेबल फैक्ट्री बना ली। यहां देसी के अलावा अंग्रेजी शराब जैसे व्हिस्की, बीयर और रम भी केमिकल के जरिए तैयार की जा रही है।
शराब बनाने की पोर्टेबल फैक्ट्री तक पहुंचने में रिपोर्टर की नल-जल योजना में काम करने वाले एक मजदूर ने मदद की। उसने जंगल के भीतर का रास्ता बताया और रिपोर्टर पैदल ही उस फैक्ट्री तक पहुंचा
शराब बनाने वाला बोला- यह जगह हर तरह से सेफ है दमोह जिले के पथरिया के जंगल में खेतों की मेड़ पर नकली शराब बनाई जा रही है। यहां एक खेत में पेड़ों के झुरमुट के बीच एक भट्टी जल रही थी, जिस पर ड्रम रखा था। ड्रम में रखे केमिकल को वाष्पीकृत कर प्लास्टिक के डिब्बों में भरा जा रहा है और फिर इसमें कुछ केमिकल मिलाए जा रहे थे। वहां मौजूद शख्स ने किसी तरह की हैरानी जताने के बजाय पूछा- बोलो कैसे आना हुआ?
रिपोर्टर ने उससे पूछा कि क्या हमारे आने के बारे में पहले से पता था? उसने बताया कि आपकी पल-पल की खबर मुझे मिल रही थी। हमारे लोग चौकन्ने हैं, जो हर आने-जाने वाले पर नजर रखते हैं। इस शख्स ने पहले तो शराब देने से इनकार किया, लेकिन बातचीत के बाद राजी हो गया। ये भी कहा कि जितनी चाहेंगे, उतनी शराब मिल जाएगी।
उसने ये भी बताया कि उसके खिलाफ पहले भी कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अब यहां सेफ जगह शराब बना रहा है। रिपोर्टर ने उससे शराब को लेकर डील की।

रिपोर्टर: शराब खरीदनी थी।
शराब सप्लायर: हाथ में मोबाइल है, वीडियो बना रहे हो क्या?
रिपोर्टर: नहीं, मोबाइल तो बंद है। आप चेक कर लो।
शराब सप्लायर: बताओ कब और कितनी चाहिए?
रिपोर्टर: बीयर, व्हिस्की के अलावा देसी भी चाहिए।
शराब सप्लायर: अभी नहीं मिलेगी। काम चालू है, आप आधे घंटे बाद आओ।
रिपोर्टर: ठाकुर साहब (माफिया) ने बोला है। जहां बन रही है, वहां चले जाओ।
शराब सप्लायर: कहां से हो और कहां ले जाना है?
रिपोर्टर: सागर से हूं और भोपाल ले जाना है।
शराब सप्लायर: रुको, मैं बात करता हूं।
(इसके बाद सप्लायर ने किसी लक्ष्मण नाम के शख्स को कॉल किया। कुछ देर बाद वह रिपोर्टर के पास आया।)
शराब सप्लायर: बात हो गई। बोलो, क्या चाहिए?
रिपोर्टर: क्वालिटी कैसी रहेगी?
शराब सप्लायर: हमारे पास वो क्वालिटी है, जो किसी के पास नहीं मिलेगी। सभी नशे फेल हो जाएंगे।
रिपोर्टर: आप सरकारी बुलवाते हैं या खुद बनाते हैं?
शराब सप्लायर: हम खुद बनाते हैं। व्हिस्की वैसी ही मिलेगी, जो ठेकों पर मिलती है।
रिपोर्टर: सुना है आसपास के जिलों में आप ही सप्लाई करते हैं।
शराब सप्लायर: दमोह, जबलपुर, सागर सहित कई जगह हम लोग ही देते हैं।
शराब सप्लायर: आपको कितनी चाहिए, बताओ?
रिपोर्टर: आप कितनी भेज सकते हैं?
शराब सप्लायर: रोज 500-1000 लीटर… जितनी चाहिए, उतनी मिल जाएगी।
रिपोर्टर: इतनी दिख तो नहीं रही है।
शराब सप्लायर: हमारा चार-पांच जगह सेटअप है।

रिपोर्टर: मुझे बताया था कि फैक्ट्री में शराब बन रही है।
शराब सप्लायर: फैक्ट्री पर छापा पड़ गया था, इसलिए पुलिस ने बोला- साइड में काम करते रहो। आप तो माल बोलो, कितना चाहिए? पहले पी लो, फिर ले जाओ।
रिपोर्टर: मुझे रोज 200 से 300 लीटर चाहिए होगी।
शराब सप्लायर: आपको जितना चाहिए, मिल जाएगी। मौके पर पहुंचा भी देंगे, कोई नहीं रोकेगा।
रिपोर्टर: पैकिंग कैसी रहेगी?
शराब सप्लायर: ओरिजिनल। वो जिम्मेदारी तो हमारी है, हम पैक करके देंगे।
रिपोर्टर: आपकी रेट को लेकर बात हुई क्या?
शराब सप्लायर: नहीं। आपकी क्या बात हुई?
रिपोर्टर: क्वाटर की एक बोतल के 21 रुपए की बात हुई है।
शराब सप्लायर: नहीं हो पाएगा। हम 25 रुपए में देते हैं।
रिपोर्टर: 25 रुपए में तो बीयर की बोतल दे रहे हैं।
शराब सप्लायर: नहीं हो पाएगा। चाहिए हो तो लो, नहीं चाहिए हो तो मत लो।
रिपोर्टर: पेमेंट कैसे होगा?
शराब सप्लायर: पहले ही देने होंगे, कैश में।

निगरानी का सिस्टम, दूसरे के इलाके में सप्लाई नहीं शराब सप्लायर से डील करने के बाद रिपोर्टर ने इनका नेटवर्क समझने के लिए माफिया से ही जुड़े कुछ लोगों से बात की। उन्होंने बताया कि अवैध शराब बनाने वाले 5 से 6 लोग हैं। सभी का एरिया तय है। कोई भी एक-दूसरे के एरिया में शराब की सप्लाई नहीं करता।
पुलिस का डर नहीं है क्या? जवाब मिला- पुलिस से सेटिंग है। हर किसी का अपना नेटवर्क है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस शराब सप्लायर से रिपोर्टर डील करके आया है, उसकी पूरी जानकारी पहुंच रही थी। सबूत के तौर पर उन्होंने बातचीत के ऑडियो भी सुनाए। जहां शराब बनती है, वहां रातभर लोग घूमते हैं। पुलिस या किसी की गाड़ी को देखकर तुरंत ही सूचना देते हैं।
टैक्स नहीं देना पड़ता इसलिए भाव कम पथरिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब रातभर बिकती है। शराब को बेचने वाले भी बेहद सतर्क रहते हैं। जो रेगुलर कस्टमर हैं, उन्हें ही शराब दी जाती है। रिपोर्टर भी यहां मजदूरों का ठेकेदार बनकर शराब लेने पहुंचा। बेचने वाले ने दो देसी शराब की बोतल और एक बीयर 150 रुपए में दी।
उससे इतनी सस्ती शराब बेचने का कारण पूछा तो बोला- हमको टैक्स थोड़े न लगता है, मगर नया चेहरा देखकर उसने रिपोर्टर से कई सवाल पूछे।
दुकानदार: कहां से आए हो भाई, यहां के तो नहीं लगते।
रिपोर्टर: पास के गांव में काम चल रहा है, मजदूरों के लिए शराब लेनी थी।
दुकानदार: पुलिस का डर रहता है, इसलिए पूछना पड़ता है।
रिपोर्टर: चिंता मत करो मैं पुलिस नहीं हूं।

जानिए, कैसे बनाई जाती है नकली शराब अवैध शराब का धंधा करने वाले एक शख्स ने नाम न बताने की शर्त पर इसकी पूरी प्रोसेस बताई। उसने कहा- नकली या अवैध शराब बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी केमिकल बाजार में आसानी से मिलते हैं। कलर, सुगंध और स्वाद के लिए भी केमिकल का इस्तेमाल होता है। इससे शराब पीने वाले नकली और असली शराब में फर्क महसूस नहीं कर पाते। शराब की खाली बोतलें भी आसानी से कबाड़ियों से मिल जाती है।

नकली शराब की वजह से 32 साल के बेटे को खोया अवैध शराब केमिकल्स और सस्ते एसेंस मिलाकर बनाई जा रही है। इनकी पैकिंग भी ऐसे की जाती है, जिससे वह असली जैसी लगे। आसपास के ग्रामीण कहते हैं कि शराब पीने से कई लोग बीमार पड़े हैं, मगर प्रशासन ऐसे मामलों को दबा देता है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दिनों केवलारी गांव की महिलाओं ने अवैध शराब को लेकर विरोध किया था। इस दौरान पुलिस के साथ महिलाओं का विवाद हो गया था। समझाइश के बाद मामला शांत हो पाया।
हमारी मुलाकात पथरिया नगर पालिका में भगवा सिंह से हुई, जो अवैध शराब की शिकायत करने पहुंचे थे। भगवान सिंह ने कहा- इसी शराब की वजह से मेरे 32 साल के बेटे राजू की मौत हो चुकी है।
उसने बताया कि पुलिस ने सिर्फ दिखावे के लिए एक-दो बार नकली शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों को सीज किया, लेकिन असल में माफियाओं को पूरी छूट दी गई है। खेतों और गांवों में बड़ी मात्रा में नकली देसी और अंग्रेजी शराब तैयार हो रही है।

पथरिया में 5-6 शराब माफिया सक्रिय दमोह जिले के पथरिया में अवैध शराब बनाने का यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है। यहां 5-6 शराब माफिया सक्रिय हैं। इन्होंने आसपास के 12 गांव के लोगों को अवैध शराब बनाने के काम में शामिल किया है। पथरिया के पास बोतराई गांव के रामभरोसे ठाकुर ने बताया- कुछ दिन पहले पुलिस ने शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
रामभरोसे कहते हैं- अवैध कारोबार में पुलिस और प्रशासन की भी मिलीभगत है। गांव के लोग कई बार पुलिस को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। जब भी कोई अधिकारी सख्ती दिखाने की कोशिश करता है, तो उसे ट्रांसफर की धमकी दी जाती है।

टीआई बोले- कोई शराब बनाए और मुझे पता न चले पथरिया में आबकारी विभाग और पुलिस ने एक घर में अवैध शराब फैक्ट्री का खुलासा किया था। यहां से 1.70 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया था। वहीं, पिछले साल एक सरकारी शराब दुकान में आबकारी विभाग ने 112 पेटी अवैध शराब जब्त की थी।
जांच के दौरान दुकान के कर्मचारियों के पास शराब के दस्तावेज नहीं मिले थे। पथरिया थाने के टीआई सुधीर बेगी कहते हैं- हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। पिछले 4 महीनों में हमने अवैध शराब के 26 से ज्यादा केस बनाए हैं। रात्रि गश्त भी बहुत सख्ती से की जाती है। ऐसा हो नहीं सकता कि मेरे क्षेत्र में कोई शराब बनाए और पता न चले।
