
इंजीनियर बेटी मेरा एक कंधा थी। उस रईसजादे ने मेरा कंधा तोड़ दिया। मैं अपना दर्द किसको बताऊं। चार दिन से किसी के आंसू नहीं रुके। मैं गरीब हूं। अकेला हूं। कैसे उस रईसजादे का सामना कर पाऊंगा। इतना तक सुना है कि ये लोग अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन जैसे लोगों से जुड़े हैं। ऐसे में अकेले लड़ना मुमकिन नहीं। जनता साथ दे, तो मैं लड़ने के लिए तैयार हूं।’
यह दर्द बताते हुए पुणे हादसे में जबलपुर की इंजीनियर बेटी को खाेने वाले सुरेश कोष्टा के आंसू छलक जाते हैं। सुरेश बिजली कंपनी में कार्यालय सहायक हैं। इकलौती बेटी की मौत के बाद वे पूरी तरह टूट चुके हैं।
टीम मृतक अश्विनी कोष्टा के जबलपुर में सैनिक सोसायटी स्थित घर पहुंची।
यहां पिछले चार दिन से परिवार के सदस्यों के आंसू रुके नहीं हैं। पिता को आज भी विश्वास नहीं हो रहा कि बेटी इस दुनिया में नहीं रही। उन्होंने घटना वाली रात का पूरा मंजर बताया। साथ ही, बताया कि लौटते समय पुणे से जबलपुर के 18 घंटे कैसे गुजरे।
पुणे में पोर्श कार ने दो इंजीनियर्स को कुचला
18 मई की रात 2.15 बजे पुणे में बाइक सवार अश्विनी कोष्टा और अनीश अवधिया को हाई स्पीड पोर्शे कार ने कुचल दिया था। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। अश्विनी जबलपुर और अनीश उमरिया का रहने वाला था। कार पुणे के बिल्डर का नाबालिग बेटा नशे में धुत होकर चला रहा था। वह 12वीं पास की खुशी में पार्टी कर लौट रहा था। घटना के दौरान लोगों ने बताया- संकरी सड़क पर कार 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरी और एक बाइक को टक्कर मारते हुए आगे जाकर रुक गई। मंगलवार को दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

अश्विनी 14 जनवरी को बर्थडे सेलिब्रेट करने जबलपुर आई थी।
बेटी के दोस्त ने ढाई बजे किया कॉल- 15 मिनट बाद हम रवाना
अश्विनी के पिता सुरेश कोष्टा ने बताया, ‘18 और 19 मई की दरमियानी रात करीब ढाई बज रहे थे। मैं अपने कमरे में सो रहा था। अचानक ही मोबाइल पर फोन की घंटी बजी। सामने से आवाज आती है कि अंकल, मैं अश्विनी का दोस्त बोल रहा हूं, आप जल्दी पुणे आ जाइए। मैंने पूछा कि आखिर ऐसा क्या हो गया है कि अभी आना होगा। उसने बताया कि अश्विनी का एक्सीडेंट हो गया है। इतना सुनते ही मेरे हाथ-पैर फूल गए। तुरंत ही बेटे और पत्नी को जगाया। उनको बिना बताए कार लेकर रवाना हो लिए। रास्ते में पत्नी ने पूछा, तब मैंने हिम्मत करते हुए बताया कि अश्विनी का एक्सीडेंट हो गया है।
19 मई की सुबह 7 बजे हम नागपुर पहुंचे। वहां से पहले अहमदाबाद और फिर फ्लाइट से पुणे पहुंचे। शाम 5 बजे हम पुणे के सरकारी अस्पताल के पीएम हाउस पहुंच गए थे। यहां अश्विनी का शव रखा था। शरीर पर चोट के निशान थे। उन पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। उसे वहां देखने वाला कोई नहीं था। ऐसा लग रहा था कि घटना के बाद उसे लावारिस की तरह रख दिया हो।

पुणे में सिर्फ 5 घंटे बिताए। ऐसा लगा कि जैसे, हम यहां पूरी तरह अकेले हैं। कोई मदद करने को तैयार नहीं था। पोस्टमार्टम के बाद रात 11 बजे मैं और मेरी पत्नी बेटी का शव लेकर एंबुलेंस से जबलपुर के लिए निकले। बेटा कार में था। पुणे से जबलपुर तक का सफर 18 घंटे में तय किया। जिस रफ्तार से एम्बुलेंस चल रही थी, उस दौरान कई बार बॉडी हिल भी रही थी।
ऐसे में 10 से 11 बार एम्बुलेंस को रोककर देखा गया कि बर्फ तो नहीं पिघल रहा है। कई बार ऐसा भी हुआ कि बाॅडी तिरछी हो जाती थी। इस सफर को जिंदगी भर नहीं भूल सकते। जैसे-तैसे 20 मई की रात 7 बजे जबलपुर पहुंचे। फिर 21 मई को अश्विनी को ग्वारीघाट में अंतिम संस्कार किया गया।’
अगले महीने मेरे जन्मदिन की तैयारी कर रही थी
सुरेश कोष्टा से पूछा कि सुबह का सबसे पहला काम क्या था? यह सुनते ही आंसू आ गए। उन्होंने बताया, ‘पूजा करने से पहले बेटी से बात करता था। पुणे गए उसे पांच महीने से ज्यादा समय बीत गया था, पर कोई ऐसा दिन नहीं था कि बेटी से बात ना हुई हो। पापा जी क्या खाना खा रहे हो आज? कौन से कपड़े पहनकर ऑफिस जा रहे हैं? पापा जी ये मत खाना, आपके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होगा। ऐसी न जाने कितनी बात रोजाना होती थीं। अगले महीने मेरा जन्मदिन है, जिसकी तैयारी वो पुणे में बैठकर कर रही थी।’

अनीश ग्रेजुएशन करने के लिए पुणे गए थे। कॉलेज के बाद यहीं जॉब लग गई। हादसे में अनीश की भी मौत हो गई। वह उमरिया का रहने वाला था।
रईसजादे ने तोड़ दिया मेरा एक कंधा
सुरेश कोष्टा ने बताया, ‘मेरे दो बच्चे हैं। दोनों ही बुढ़ापे का कंधा थे। उस रईसजादे ने एक कंधा तोड़ दिया। किसको बताऊं मैं अपना दर्द। कोई नहीं सुनने वाला। चार दिन हो गए हैं। घर का कोई भी ऐसा सदस्य नहीं है, जिसकी आंखों के आंसू रुके हों। अश्विनी के पिता ने कहा कि जो मेरी बेटी के साथ हुआ। भविष्य में ऐसी घटना किसी और के साथ ना हो, इसलिए ऐसा कानून बने कि ऐसे लाेगों पर सख्त कार्रवाई की हो।’
कोर्ट के पास कार्रवाई का अधिकार
जबलपुर हाईकोर्ट के वकील विशाल बघेल के मुताबिक पुणे हिट एंड रन केस का मुख्य आरोपी की उम्र 17 साल 8 महीने है। बालकों के संरक्षण 2015 अधिनियम के तहत अगर किशोर बोर्ड ये पाता है कि जो बच्चा 16 साल उम्र से अधिक और 18 साल से कम है, तो उसके अपराध, मानसिक स्थिति और क्रियाकलापों को देखते हुए धारा 18 के तहत संबंधित बालक न्यायालय को भेज सकता है। इसके बाद उस कोर्ट को ही आगे की कार्रवाई करना होता है।

हादसे के बाद पोर्शे कार की हालत। इस कार की कीमत करीब 3 करोड़ रुपए है।
ओडिशा में नाबालिग को सुनाई थी 20 साल की सजा
ओडिशा में जुलाई 2020 में 17 साल के लड़के ने बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी थी। बच्ची का शव 9 दिन बाद घर से 500 मीटर दूर मिला था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर किशोर न्यायालय में पेश किया। मामले में कोर्ट ने मामले को जघन्य मानते हुए किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई।

राहुल गांधी और देवेंद्र फडणवीस ने भी किया ट्वीट
मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘X’ पर वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा, ‘अगर ओला-उबर, ऑटो, बस और ट्रक ड्राइवर गलती से किसी को मार देते हैं तो 10 साल की सजा हो जाती है। अमीर घर का लड़का पोर्शे कार से दो लोगों की हत्या कर देता है तो उससे सिर्फ निबंध लिखवाया जाता है। बस ड्राइवर से क्यों नहीं लिखवाया?’
उधर, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है। फडणवीस ने कहा कि दो लोगों की मौत के बावजूद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नरम रुख अपनाया। जबकि, पुणे पुलिस ने बोर्ड को दिए अपने आवेदन में कहा था कि आरोपी के उम्र 17 साल और 8 महीने है।