
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फैशन शो में रैंप वॉक कर सभी को चौंका दिया। इस दौरान मंत्री सिंधिया के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार भी रैंप वॉक करते दिखाई दिए। दोनों नेताओं के बीच रैंप पर गजब का तालमेल देखने को मिला। दोनों नेताओं ने अपने पहनावे से भी लोगों को काफी प्रभावित किया।
दिल्ली के भारत मंडपम में तीन दिवसीय अष्टलक्ष्मी महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव के दौरान शनिवार को फैशन शो आयोजित किया गया। शो के दौरान लोग उस समय चौंक उठे जब केंद्रीय मंत्री सिंधिया रैंप वॉक करते नजर आए। उनके साथ सुकांत मजूमदार भी दिखाई दिए। रैंप वॉक के दौरान मंत्री सिंधिया ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की चमचमाती एरी सिल्क जैकेट पहनी हुई थी, जिसमें मंत्री का कुछ अलग अंदाज दिखाई दिया।
राजनीति के साथ फैशन शो में दिखा जलवा
राजनीति के मंचों से अलग फैशन शो में सिंधिया का अलग अंदाज देखने को मिला. अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ सिंधिया का जलवा रैंप पर भी कायम रहा। उन्होंने किसी प्रोफेशनल मॉडल की तरह रैंप वॉक किया।
पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को माना जाता है अष्टलक्ष्मी का रूप
बता दें कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को अक्सर ‘अष्टलक्ष्मी’ या समृद्धि के आठ रूप भी कहा जाता है। अष्टलक्ष्मी महोत्सव पूर्वोत्तर क्षेत्र के जीवंत वस्त्र उद्योग, हस्तशिल्प और अद्वितीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का अभूतपूर्व मंच है। महोत्सव में इन राज्यों के भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों को दिखाया जा रहा है।
महोत्सव में गोलमेज सम्मेलन का भी आयोजन
अष्टलक्ष्मी महोत्सव में विशेष निवेशक गोलमेज सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसमें राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों, उद्यमियों, व्यापार जगत की हस्तियों और निवेशकों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संवाद को बढ़ावा, निवेश के अवसरों की खोज और पूर्वोत्तर भारत के लिए अभिनव सहयोग को बढ़ावा देना है।

गोलमेज सम्मेलन में राज्यों की ओर से दी गईं प्रस्तुतियां
पूर्वोत्तर भारत में कृषि, हस्तशिल्प, हथकरघा, पर्यटन और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने के मकसद से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) ने गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। इसमें राज्यों की ओर से प्रस्तुतियां दी गईं। गोलमेज सम्मेलन में कुल 2326 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव सामने आए। सरकार के मुताबिक अष्टलक्ष्मी महोत्सव का मकसद विरासत और नवाचार के बीच तालमेल और संतुलन बनाना है।

