
कृषि कानूनों से जुड़े मामले में किसानों की शंकाओं और शिकायतों पर विचार के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का फैसला कांग्रेस कोरास नहीं आया है. कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने इस मामले में ट्वीट किया है. क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘लोकतंत्र में कानून, जनप्रतिनिधियों द्वारा बनाए जाते हैं न कि माननीय कोर्ट या कमेटियों के द्वारा…कोई भी मध्यस्थता, बहस या चर्चा किसानों और संसद के बीच ही होनी चाहिए.”
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन से उत्पन्न स्थिति का समाधान खोजने के प्रयास में तीनों विवादास्पद कानूनों के अमल पर रोक लगाने के साथ ही किसानों की शंकाओं और शिकायतों पर विचार के लिये एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. कोर्ट ने हरसिमरत मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (पूर्व निदेशक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन), अनिल धनवत के नाम कमेटी के सदस्य के तौर पर सुझाए हैं. बहरहाल, किसान नेताओं ने कहा है कि SC की तरफ से नियुक्त किसी भी समिति के समक्ष वे किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेना चाहते. किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने मंगलवार को कहा, ‘हमें लगता है कि ये सरकार की शरारत है कि ये सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए कमेटी ले आए. कमेटी के सारे सदस्य, सरकार को सही ठहराते रहे हैं. ये लोग प्रेस में आर्टिकल लिखकर क़ानूनों को सही ठहराते रहे हैं. तो ऐसी कमेटी के सामने क्या बोलें.’
सिद्धू से पहले कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि कृषि कानून मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो चिंता ज़ाहिर की उसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन जो चार सदस्यीय कमेटी बनाई वो चौंकाने वाला है. ये चारों सदस्य पहले ही काले कानून के पक्ष में अपना मत दें चुके हैं ये किसानों के साथ क्या न्याय कर पाएंगे, यह बड़ा सवाल है.