“भोपाल–इंदौर के बीच 145 किमी का नया हाईस्पीड एक्सप्रेसवे: एनएचएआई ने 6000 करोड़ से अधिक लागत वाले तीन लेआउट का प्रस्ताव भेजा, 2 घंटे में सफर संभव”

पश्चिमी बायपास से इंदौर के पूर्वी रिंग रोड तक भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस वे बनेगा, दूरी 55 किमी घटकर 145 किमी रह जाएगी, 2 घंटे में पहुंच सकेंगे

भोपाल के वेस्टर्न बायपास के साथ ही इंदौर जाने के लिए एक और एक्सप्रेसवे की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने केंद्र सरकार को वेस्टर्न बायपास के आखिरी प्वाइंट से इंदौर की ईस्टर्न रिंग रोड तक एक्सप्रेस-वे बनाने का प्रस्ताव भेजा है। इससे भोपाल से इंदौर की दूरी 200 किमी से घटकर लगभग 145 किमी हो जाएगी। डेढ़ से दो घंटे के भीतर इंदौर पहुंचना संभव होगा।

अभी भोपाल से इंदौर की यात्रा में साढ़े तीन से चार घंटे लगते हैं। हाईस्पीड एक्सप्रेसवे की लागत 6000 से 8000 करोड़ रुपए होगी। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नुवाल के अनुसार, एक्सप्रेस हाईवे के तीन विकल्प बनाए गए हैं। इनमें दो विकल्प वेस्टर्न बायपास से इंदौर ईस्टर्न रिंग रोड के हैं। इन दोनों के अलाइनमेंट में थोड़ा अंतर है। एक विकल्प मंडीदीप से ईस्टर्न रिंग रोड है। केंद्र सरकार से जिसकी मंजूरी मिलेगी, उस पर आगे काम होगा।

कमलनाथ सरकार में मंडीदीप से इंदौर तक एक्सप्रेस हाईवे का प्लान बना था। बाद में सरकार बदलने पर यह ठंडे बस्ते में चला गया।

इसलिए पड़ी है जरूरत… मेहतवाड़ा से लेकर डोडी तक ट्रैफिक दबाव अधिक होने से एक्सीडेंट हो रहे हैं। {कुबेरेश्वर धाम में बार-बार इकट्ठा होने वाली भीड़ से होने वाली अव्यवस्था को दूर करना है। {सीहोर, आष्टा और सोनकच्छ के लोग सामान्य ट्रैफिक के लिए भी मौजूदा हाईवे का उपयोग करते हैं।

पीपीपी मोड पर विकसित होंगे इंडस्ट्रियल क्षेत्र: एक्सप्रेस-वे के बीच-बीच में इंडस्ट्रियल क्षेत्र भी विकसित होंगे। किसानों के साथ एमओयू कर औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर सकेंगे।

मंडीदीप-पीथमपुर कनेक्टिविटी बढ़ेगी मंडीदीप और पीथमपुर, यानी प्रदेश के दो बड़े इंडस्ट्रियल एरिया की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। एक्सप्रेस हाईवे के दोनों ओर नए इंडस्ट्रियल एरिया भी डेवलप हो सकते हैं।

3 जिलों की 1100 हेक्टेयर से अधिक भूमि होगी अधिग्रहित

भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट के लिए भोपाल, सीहोर और देवास इन तीन जिलों की करीब 1100 हेक्टेयर से अधिक जमीन का अधिग्रहण होगा। केंद्र सरकार द्वारा अंतिम लेआउट की मंजूरी के बाद सीमांकन और अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।

इसके साथ ही केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद ही यह विचार होगा कि यह एक्सप्रेस हाईवे बीओटी, एनयूटी या किसी अन्य मॉडल पर बनाया जाए। टोल आदि का निर्णय भी उसके बाद ही होगा।

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