
शादी के समय कन्यादान से इनकार करने वाली आईएएस तपस्या परिहार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वे छतरपुर जिला पंचायत सीईओ हैं। इस बार उन्होंने 50 हजार की रिश्वत देने पहुंचे एक निलंबित शिक्षक को जेल भिजवाया है। शिक्षक का नाम विशाल अस्थाना है। उसे विधानसभा में ड्यूटी से गैर हाजिर होने पर निलंबित किया गया था। पिछले कई दिनों से वह बहाली की कोशिश कर रहा था। इस बार आरोपी शिक्षक बहाली के लिए 50 हजार रिश्वत की रकम को एक लिफाफे में रखकर सीधे उनके दफ्तर पहुंचा था।
आईएएस तपस्या परिहार ने रिश्वत देने के जुर्म में उसे गिरफ्तार करवा दिया। आईएएस तपस्या ने बातचीत में बताया कि मैं इससे पहले दो बार उसे डांट कर भगा चुकी थी। उसे चेतावनी भी दी थी, लेकिन फिर भी उसने ऐसी गुस्ताखी की। सबक नहीं सिखाती तो वह मुझे ही बदनाम करने की कोशिश करता

पुलिस गिरफ्त में आरोपी शिक्षक विशाल अस्थाना, जो आईएएस तपस्या परिहार को 50 हजार रुपए की रिश्वत दे रहा था।
जनसुनवाई में ही रिश्वत का लिफाफा लेकर पहुंचा था आरोपी
आईएएस तपस्या परिहार ने पूरा घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि मैं अपने कार्यालय में बैठी थी। मंगलवार को जनसुनवाई में लोग शिकायत लेकर आ रहे थे। उसी दौरान निलंबित शिक्षक विशाल अस्थाना पहुंचा। उसे प्यून ने रोकने की कोशिश भी की, तो उसके साथ विवाद किया। इसके बाद वह सीधे मेरे पास आ गया। एक लिफाफा देते हुए बोला कि मैडम ये डोनेशन है। मेरी फाइल अटकी हुई है। जब उसने लिफाफे में पैसे दिए तो मैं अवाक रह गई। मेरे पूरे करियर में इस तरह की जुर्रत किसी ने नहीं की थी। इस कारण उसे सबक सिखाना जरूरी हो गया था।
दरअसल, वह मुझे बदनाम करने की मंशा से आया था। पैसा देकर वो हंगामा करना चाहता था। उसकी मंशा भांपकर मैंने सुरक्षाकर्मियों को बुलाया। एसपी को जानकारी दी। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। थाने में मेरी तरफ से आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया है।

आरोपी शिक्षक के खिलाफ चल रही है विभागीय जांच
जिला पंचायत सीईओ तपस्या के मुताबिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय कुपी में तैनात शिक्षक विशाल अस्थाना विधानसभा चुनाव के प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगातार गैर मौजूद रहा। इसके चलते उसे निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराई जा रही है। नोटिस पर उसने जवाब दिए थे कि वह छुट्टी पर था, जबकि उस दौरान सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगी हुई थी। छुट्टी स्वीकृत करने का काम भी मेरे ही पास था। मैंने तो उसे छुट्टी दी नहीं थी, फिर किसकी अनुमति से वह छुट्टी पर था। इसी मामले की विभागीय जांच चल रही थी।
उसकी हरकतें और हंगामा करने की प्रवृत्ति के चलते शिक्षा विभाग के लोग भी जांच करने से कतरा रहे थे और उसे बहाल करने के लिए कहा था, लेकिन जब मैंने स्पष्ट अभिमत देने के लिए कहा तो उसके खिलाफ जांच शुरू हुई। इसी जांच को समाप्त करने के लिए वह मेरे ऑफिस में दो से तीन बार आकर हंगामा कर चुका था।
वह बहुत ही बदतमीजी से बात करता था। यही कारण था कि उसके कार्यालय आने पर मैंने रोक लगा दी थी। जब प्यून उसे रोकने की कोशिश करते, तो वह उनके साथ भी झगड़ा करने लगता था। मंगलवार को आवेदन के बहाने वह रिश्वत वाला लिफाफा लेकर मेरे पास तक पहुंच गया था। मैंने जब उसके खिलाफ शिकायत की तो बैंक में पदस्थ उसके भाई ने आकर भी एफआईआर न करवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं करती तो उलटा मुझ पर ही सवाल खड़े होते। फिर ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ती है।

रिश्वत लेने वालों की तरह देने वालों पर भी कार्रवाई का है प्रावधान
पहले रिश्वत लेने वाला ही अपराधी माना जाता था। बाद में केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक-2018 संसद में पास कराया। इसमें रिश्वत देने वाले को सात साल तक की जेल की सजा या जुर्माना या दोनों सजा देने का प्रावधान किया गया है।
वहीं रिश्वत लेने वाले के लिए कम से कम तीन साल और ज्यादा से ज्यादा सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान जोड़ा गया। इस संशोधन के बाद भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के दो साल में निपटारे का प्रावधान किया गया है। इसी संशोधन के तहत आरोपी शिक्षक विशाल अस्थाना के खिलाफ छतरपुर के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एसपी अमित सांघी के मुताबिक सात साल से कम सजा के प्रावधान के चलते आरोपी को थाने से ही जमानत दे दी गई है। रिश्वत वाली रकम को जब्त कर लिया गया है।
शिक्षक को जेल भिजवाने वाली तपस्या के बारे में जान लें
नरसिंहपुर जिले की करेली से लगे जोवा गांव की रहने वाली तपस्या परिहार 2017 बैच की आईएएस हैं। तीन भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। छोटी बहन प्रतिज्ञा परिहार करेली जनपद पंचायत की निर्विरोध अध्यक्ष हैं। भाई दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। उनकी दादी कुंवर परिहार नरसिंहपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। पिता विश्वास परिहार पिछले 35 सालों से जोवा ग्राम पंचायत के निर्विरोध सरपंच हैं।
तपस्या की प्रारंभिक शिक्षा करेली (नरसिंहपुर) स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से हुई है। 8वीं से 12वीं तक केंद्रीय विद्यालय नरसिंहपुर में चाचा-चाची और दादी के साथ रहकर पढ़ाई की। पुणे से लॉ की पढ़ाई की। फिर पांच साल का कोर्स पूरा कर दिल्ली तैयारी करने चली गई थी। दूसरे प्रयास में 2017 में (परीक्षा व चयन 2018 में) 23वीं रेंक के साथ उनका आईएएस में चयन हुआ था।

तपस्या परिहार अपने परिजन के साथ।
दिसंबर 2021 में कन्यादान से इनकार कर आई थीं सुर्खियों में
तपस्या परिहार की शादी 12 दिसंबर 2021 को पचमढ़ी में हल्द्वानी (उत्तराखंड) के रहने वाले IFS अधिकारी गर्वित गंगवार से हुई। दोनों की 2018 में मसूरी में ट्रेनिंग के दौरान मुलाकात हुई थी। शादी के वक्त तपस्या ने कन्यादान के रस्म से इनकार कर दिया था। तब उनका ये कदम काफी सुर्खियों में रहा था।
तपस्या ने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि मेरा दान कोई कैसे कर सकता है। भले ही वह मेरा परिवार है, पर उन्हें भी ये अधिकार नहीं कि मुझे किसी को दान कर दें। कन्यादान के पीछे की सोच से ही परेशानी है।
जहां तक मैं इसके बारे में सोच और समझ पाई हूं कि इसके पीछे का ख्याल ये रहता है कि कन्या को एक परिवार से दूसरे परिवार को सौंपा जा रहा है। मैं कैसे अपने परिवार को छोड़ दूं और उस परिवार को ही अपना परिवार मानूं। मैं तो दोनों परिवारों को छोड़ने वाली नहीं हूं। हालांकि, उनके इस कदम से दादी खुश नहीं थीं, लेकिन बाद में पूरा परिवार उनके फैसले के साथ मजबूती से खड़ा रहा। उनकी शादी बिना कन्यादान की रस्म के पूरी हुई थी।