
भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के दायरे को बढ़ाते हुए एक मई से वैक्सीनेशन अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है। एक मई से 18 साल से 45 साल के बीच के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगेगा। देश में 18 साल से अधिक उम्र के लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आज यानी 28 अप्रैल से कोविन पोर्टल (cowin.gov.in) या फिर आरोग्य सेतु ऐप पर रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। देश में फिलहाल, 45 साल से अधिक लोगों को ही वैक्सीन दी जा रही है।
इस बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनियाभर से हर रोज नई-नई रिसर्च सामने आ रही है। एक ताजा रिसर्च के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन की एक डोज संक्रमण फैलने की रफ्तार में 50 प्रतिशत तक की कमी कर सकती है। स्टडी के मुताबिक, यदि किसी शख्स को फाइजर या एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की एक डोज दी जाती है तो उसके संक्रमित होने पर घर में मौजूद अन्य सदस्यों में संक्रमण फैलने के खतरे में 50 फीसदी तक की कमी आ सकती है।
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (PHE) की रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग वैक्सीन की पहली खुराक लेने के तीन हफ्ते बाद संक्रमित हो गए थे, उनसे उनके घर के अन्य सदस्यों में वायरस के ट्रांसमिशन की संभावना 38 से 49 फीसदी कम थी, वैक्सीन नहीं लगवाने वालों की तुलना में.
ब्रिटिश हेल्थ सेक्रेटरी मैट हैनकॉक ने कहा, “यह बहुत अच्छी खबर है- हम जानते हैं कि वैक्सीन लोगों की जान बचाती है और इस स्टडी के आंकड़ों से यह पता चलता है कि वैक्सीन घातक वायरस के ट्रांसमिशन को कम करने में भी मददगार है.”
उन्होंने कहा, “यह स्टडी इस तथ्य को मजबूत करती है कि वैक्सीन महामारी से निकलने में सबसे बेहतर विकल्प है क्योंकि यह आपको और आपसे आपके घर में दूसरे लोगों को संक्रमण के खतरे से बचने में मदद करती है.”
स्टडी में 24,000 घरों से 57,000 से ज्यादा कॉन्टैक्ट्स का आंकड़ा लिया गया है, जो कि कोरोना वैक्सीन लगवाने वालों के संपर्क में थे. इनकी तुलना करीब 10 लाख ऐसे लोगों से की गई जो वैक्सीन नहीं लगवाने वाले संक्रमितों के संपर्क में थे.