देश की एक तिहाई शहरी आबादी कोरोना पॉजिटिव, दिसंबर 2020 तक हुए सीरो सर्वे का दावा

हाल ही में किए गए एक सीरो सर्वे में कोरोना संक्रमित हुए लोगों का एक चौंकाने वाला डेटा सामने आया है। सेरो पोजिटिव टेस्ट में दिसंबर 2020 तक 31 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी मिले हैं। यह सीरो सर्वे 12 शहरों में किया गया है। जिसमें आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम भी शामिल हैं। सीरोलॉजी डेटा की माने तो अब तक एक तिहाई शहरी निवासी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी दावा किया कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में सीरो पॉजिटिविटी की दर 31 फीसदी से कहीं ज्यादा हो सकती है. सीरो सर्वे की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन में 4.4 लाख सैंपल शामिल किए गए थे, जोकि एक प्राइवेट लैब की चेन के द्वारा इकट्ठा किए गए थे.

ऑडिट के मुताबिक विशाखापत्तनम् में जिन लोगों का सीरो सर्वे के लिए टेस्ट किया गया, उनमें से 33.8 फीसदी लोगों में कोविड एंटीबॉडी मिली. इस अध्ययन को कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च के शोधकर्ताओं और ए वेलुमनी और थाइरोकेयर लैब्स के सी. निकम ने साझा रूप से अंजाम दिया. सीरो सर्वे के लिए देश भर में 2200 कलेक्शन प्वाइंट्स पर खुद के द्वारा टेस्ट करवाने वाले 31 प्रतिशत लोगों में कोविड एंटीबॉडी मिली है.

पुणे में सबसे ज्यादा सीरो पॉजिटिविटी:-शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी वर्ग की महिलाओं में सीरो पॉजिटिविटी की दर 35 फीसदी थी, जबकि पुरुषों में इसकी दर 30 फीसदी थी. उन्होंने कहा कि सीरो पॉजिटिविटी उन इलाकों में कम देखने को मिली, जहां बचपन में लोगों ने चेचक के टीके लगवाए थे. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट राजीव जयदेवन ने कहा कि पुणे में सबसे ज्यादा 69 प्रतिशत सीरो पॉजिटिविटी देखने को मिली है. उन्होंने कहा कि अध्ययन में शामिल 12 शहरों में देश के एक तिहाई कोविड मामले हैं. अगर इसमें दूसरी लहर को भी जोड़ दिया जाए तो वायरस संक्रमण के शिकार लोगों की संख्या 31 फीसदी से ज्यादा होगी.

जयदेवन ने कहा कि भारत में 77 प्रतिशत लोग 2 कमरों के मकान में रहते हैं. ऐसे में लोगों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं है. वायरस के और ज्यादा संक्रामक होने के बाद दो कमरों के मकान में रहने वाले लोगों के संक्रमित होने की संभावना 90 फीसदी से ज्यादा हो जाती है.

उन्होंने कहा कि अलग-अलग शहरों में संक्रमण का चरम अलग-अलग टाइम पर देखने को मिला है. पिछले साल जून और दिसंबर में दिल्ली में कोरोना का चरम (पीक) देखने को मिला था, चेन्नई में कोरोना का चरम जहां जुलाई में आया, वहीं पुणे में संक्रमण का चरम सितंबर में नजर आया. जयदेवन ने कहा कि अगर पूरे देश की बात करें तो पिछले साल सितंबर के मध्य में संक्रमण का चरम देखने को मिला था.

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