उसे फुटबॉल का बहुत शौक था। वो अक्सर घर में फुटबॉल खेलते-खेलते टीवी और टेबल तक तोड़ देता था। उसने इतने नुकसान किए, कभी डरा नहीं। उस दिन 2800 रुपए अकाउंट से चले गए, वो घबरा गया। हमें यकीन नहीं था कि वो इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
ये कहते हुए अंकिता जैन की आंखें भर आती हैं। दरअसल, अंकिता 13 साल के अक्लंक जैन की बुआ है। इंदौर के बिजनेसमैन के बेटे अक्लंक ने 30 जुलाई को अपने ही घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उसने ये कदम ऑनलाइन गेम में 2800 रु. की मामूली रकम हारने के बाद उठाया था।
अक्लंक ही नहीं बल्कि ऑनलाइन गेम में रकम हारने पर एमपी में पिछले 15 दिनों में 2 और लोग खुदकुशी कर चुके हैं। इनमें एक प्यून है तो दूसरा 18 साल का स्टूडेंट है। इससे पहले अप्रैल में एक पुलिस आरक्षक भी खुदकुशी कर चुका है। वहीं ऑनलाइन गेम में पैसे हारने के बाद एक लॉ स्टूडेंट भी सुसाइड नोट लिखकर घर छोड़ गया था।
उसका मन बदला और वह घर लौट आया। आखिर कैसे ये लोग ऑनलाइन गेम के जाल में फंसे? इसे लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट…?
तीन केस जिसमें रकम गंवाने के बाद सुसाइड किया

कियोस्क सेंटर पर लगी ऑनलाइन गेम की लत डबरा के विकेश ने इसी साल 12वीं पास की थी। पिता उदयभान रावत पेशे से किसान हैं। उसकी दो बहनें हैं। वह घर का इकलौता बेटा था। उसके चाचा का बेटा गांव में ही कियोस्क सेंटर चलाता है। इस दुकान पर चचेरे भाई के साथ विकेश बैठता था। इसी दौरान उसे ऑनलाइन गेम की आदत लग गई।
वह बैटिंग गेम खेलने लगा। इसमें वह 35 हजार रुपए हार गया था। इसी के चलते वह डिप्रेशन में था। खुदकुशी से दो दिन पहले 9 अगस्त को उसने गांव के ही एक व्यक्ति से 30 हजार रुपए उधार लिए थे और उसे कहा था कि दुकान के लिए पैसों की जरूरत है। भैया आ जाएंगे, तो लौटा दूंगा।
बाइक लेकर डबरा की तरफ चला गया डबरा सीएसपी रॉबिन जैन के मुताबिक 11 अगस्त को विकेश बाइक से डबरा की तरफ गया था। वह हथेडा से डबरा के माल गोदाम के पास पहुंचा। यहां बाइक खड़ी की। इस बीच, जब वह घर नहीं पहुंचा, तो परिजन ने तलाश शुरू कर दी। शाम को फोन पर बात हुई, तो उसने कहा कि मैं घर आ जाऊंगा, लेकिन रात तक वह नहीं पहुंचा। मंगलवार शाम डबरा की देहात पुलिस ने परिजन को शव मिलने की सूचना दी।

मम्मी के अकाउंट को गेम से लिंक किया था इंदौर के ऑटोमोबाइल कारोबारी अंकेश जैन के बेटे अक्लंक जैन का एक दिन पहले 30 जुलाई को ही बर्थडे था। परिवार ने धूमधाम से उसका बर्थडे सेलिब्रेट किया था। उसकी बुआ अंकिता बताती हैं कि अक्लंक पिछले कुछ दिनों से ही ऑनलाइन गेम खेल रहा था। उसके पास एक एक्स्ट्रा फोन था, जिसमें सिम कार्ड नहीं था, मगर Wi-Fi से कनेक्ट होता था।
परिवार को इतना तो पता था कि वो गेम खेलता है, लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि वह पैसों से खेल रहा है। उसने अपनी मम्मी के अकाउंट को गेम से लिंक कर दिया था। दो दिन पहले ही उसने मुझे बताया था कि उसका एक ऑनलाइन दोस्त बना है, जिससे उसकी अच्छी दोस्ती हो गई है। मैंने उसे समझाया था कि चाहे दोस्ती कितनी भी अच्छी हो, ऑनलाइन किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

पैसे कटने के नोटिफिकेशन आए तो घबरा गया अंकिता ने बताया कि वो 31 जुलाई का दिन था। वह मेरे पास दौड़कर आया। उसने कहा कि मां के मोबाइल पर पैसे कटने के मैसेज आ रहे हैं। मैंने उसे समझाया कि लोगों के लाखों रुपए चले जाते हैं। अच्छा है कि सिर्फ 2800 रु. ही कटे हैं। उसने कुछ देर तक मेरे साथ बैठकर पढ़ाई की और फिर अपने कमरे में चला गया।
एक घंटे बाद उसके छोटे भाई ने उसे फांसी पर लटकता देखा। उसने उसकी मां को बताया। हम उसे अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

भोपाल का रहने वाला था लक्ष्मीनारायण लक्ष्मीनारायण केवट मूल रूप से भोपाल का रहने वाला था। वह हरदा में पत्नी और पांच साल की बेटी के साथ किराए के मकान में रहता था। उसकी नियुक्ति 2016 में सीहोर में हुई थी। करीब तीन साल पहले ही सीहोर से ट्रांसफर होकर हरदा आया था।
मृतक के बड़े भाई कैलाश मांझी के मुताबिक 9 अगस्त की शाम को पड़ोस में रहने वाली उनकी बहन ने सूचना दी कि भाई ने आत्महत्या कर ली है। जब बहन ने मौके पर जाकर देखा तो घरेलू गैस सिलेंडर की नली लक्ष्मीनारायण के मुंह में थी। वह घर में अकेला था। उसकी पत्नी बेटी के साथ मायके गई हुई थी।
भाई बोला- कर्ज में डूब गया था कैलाश ने बताया कि उसके भाई पर लाखों का कर्ज था। कर्जदारों से परेशान होकर ही उसने यह कदम उठाया है। वह खेल एवं युवक कल्याण विभाग में चपरासी था। विभाग के लोगों का भी कहना है कि लक्ष्मीनारायण पूरे दिन मोबाइल में बिजी रहता था। संभवत: वह कोई ऑनलाइन गेम खेलता था, जिसके कारण वह कर्ज में डूब गया था। हालांकि, पुलिस को लक्ष्मीनारायण के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

ऑनलाइन गेम की वजह से आरक्षक कर्ज में डूबा नितेश वर्मा इंदौर के एरोड्रम इलाके में फर्स्ट बटालियन में पदस्थ था। 24 अप्रैल को सुसाइड से पहले उसने चार वीडियो बनाए थे। इन वीडियो में उसने उन लोगों का जिक्र किया, जिनसे कर्ज लिया था। इसके बाद घरवालों से बात की और चाचा को बताया कि उसने जहर खा लिया है। गंभीर हालत में परिजन उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जांच में पुलिस को पता चला कि नितेश को ऑनलाइन गेम खेलने का शौक था, इससे उस पर कर्ज हो गया था। इसके चलते उसने सूदखोरों से कर्ज ले लिया था। सूदखोर उससे चार गुना ज्यादा रुपए मांग रहे थे।
पिता बोले- 5 लाख रुपए उधार लिए थे नितेश के पिता ने पुलिस को बताया था कि अर्जुन और आकाश ब्याज पर पैसा देने का काम करते हैं। बेटे ने उनसे कर्ज चुकाने के लिए 5 लाख रु. उधार लिए थे। वह उन्हें हर महीने ब्याज की राशि भी दे रहा था। इसके बाद भी उन्होंने राशि लौटाने का कुबूलनामा करवाते हुए वीडियो बनाया था। वायरल करने की धमकी दी जाती थी।
इसी से तंग आकर नितेश ने सुसाइड कर लिया। वह 12 साल से पुलिस की नौकरी में था। उसकी पत्नी नेहा गृहिणी है और 6 साल का एक बेटा भी है। नितेश दो बहनों का इकलौता भाई था।
अब जानिए वो केस जिसमें सुसाइड का ख्याल छोड़ा

ऑनलाइन गेम की आदत, डेढ़ लाख का कर्ज हो गया एलएलबी करने के बाद हर्ष उज्जैन जिला कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहा था। उसी समय उसे ऑनलाइन गेम खेलने की आदत लग गई। हर्ष ने बताया कि मैं टीम बनाकर ऑनलाइन गेम खेलता था। शुरू में मैंने काफी पैसा जीता। मुझे 2 लाख रुपए तक का प्रॉफिट हुआ। इसके बाद मेरा लालच बढ़ता गया, लेकिन मैं हारने लगा।
कुछ ही समय बाद मेरा पैसा खत्म हो गया। मैंने घरवालों से और दोस्तों से पैसा उधार लिया। मैंने सोचा कि गेम से पैसे जीतकर कर्ज चुका दूंगा, लेकिन मैं हारता गया और कर्ज बढ़ता गया। मैंने पापा की बुलेट भी गिरवी रख दी।
कुछ दिनों तक घरवालों से बात छिपाई, लेकिन मैं खुद ही गिल्ट महसूस करने लगा। मैं पूरी तरह से डिप्रेशन में था। 3 अगस्त को मैंने मम्मी-पापा के नाम एक चिट्ठी लिखी और 4 तारीख को दिल्ली जाने वाली ट्रेन में चढ़ गया

मथुरा-वृंदावन गया तो मन को शांति मिली हर्ष ने बताया कि मुझे सुसाइड करने के ख्याल आ रहे थे, लेकिन हिम्मत नहीं पड़ी। दिल्ली में दिन भर घूमा फिर रात को भोपाल जाने वाली ट्रेन में बैठकर भोपाल आ गया। यहां से मथुरा-वृंदावन जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। यहां दो दिन तक रहा। संतों के प्रवचन सुने। मंदिर के दर्शन किए तो मन हल्का हुआ।
एक लड़के के फोन से घर बात की तो पता चला कि माता-पिता परेशान हैं। छोटी बहन बीमार पड़ गई है। मैं सीधा घर पहुंचा। पापा-मम्मी मुझे देखकर खुश हुए। मैंने उनसे माफी मांगी। उन्होंने मुझे सपोर्ट किया।

पिता बोले- अनहोनी की आशंका से डर गया था हर्ष के पिता जगदीश ने बताया कि जैसे ही मुझे हर्ष का सुसाइड नोट मिला मैं बेहद डर गया। मुझे लगा कि वाकई में वो कोई बड़ा कदम न उठा ले। लेटर में उसने न ढूंढने की बात लिखी थी। मैंने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से मदद मांगी। क्या उन्हें पता था कि हर्ष परेशान है? ये पूछने पर जगदीश बोले- पिछले 15 दिनों से उसका बर्ताव अजीब था। वह गुमसुम रहने लगा था।
मुझे लगा तो था कि वह परेशान है। लगा कि वह अभी नौकरी की तलाश कर रहा है। कहीं ट्राय करते हैं और कामयाबी नहीं मिलती तो व्यक्ति नर्वस होता है। मैं उसे एक या दो दिन में समझाने वाला था, लेकिन उससे पहले उसने ये कदम उठा लिया। जब वह लौटा और उसने पूरी बात बताई तो मैंने उसे समझाया और सपोर्ट भी किया। जान से बढ़कर पैसा नहीं होता।

समझिए कैसे गेमिंग में पैसे गंवाते हैं लोग
साइबर एक्सपर्ट महेश श्रीवास्तव कहते हैं कि ऑनलाइन गेम्स में कई ऐसे फीचर्स होते हैं जिससे गेम खेलने वालों को इसकी आदत लग जाती है। किसी भी तरह से गेमर से पैसा वसूल करना ये ऑनलाइन गेम का टारगेट होता है इसके लिए वो अलग-अलग तरह से हथकंडे इस्तेमाल करते हैं।
प्रीमियम फीचर का लालच देना: महेश श्रीवास्तव बताते हैं कि कई ऐसे गेमिंग एप होते हैं, जो प्रीमियम फीचर के बदले पैसों की डिमांड करते हैं। बच्चों को अक्सर ऐसे गेम्स की लत लगती है और प्रीमियम फीचर के लिए परिजन के अकाउंट का उपयोग कर फीचर पर्चेस करते हैं और पैसे गवां देते हैं।
प्रिडिक्शन के बदले करोड़ों जीतने का लालच: श्रीवास्तव के मुताबिक सैकड़ों बेटिंग एप हैं, जो प्रिडिक्शन पर आधारित होते हैं। किसी भी क्रिकेट , फुटबाल या अन्य मैचों में ऑनलाइन टीम बनाने के बदले करोड़ों में पैसे जीतने का लालच देते हैं, बदले में एक मामूली रकम ही वसूलते हैं। कम पैसे लगाने पर ज्यादा पैसे जीतने की लालच में लोग थोड़ा-थोड़ा करके पैसे गवां देते हैं।
गेंबलिंग एप में जीत का चस्का लगाकर: श्रीवास्तव कहते हैं कि कुछ गेंबलिंग एप होते हैं जो गूगल प्ले स्टोर पर नहीं मिलते। इनके लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए मिलती है। ये सीधे सीधे सट्टा खिलाते हैं। पहले सट्टा खेलने वाले को जीत का चस्का लगाते हैं। उसके बाद जब वो हारने लगता है तो और ज्यादा जीतने के लालच में पैसा गवां देता है।
