इंदौर RPF TI पर केस दर्ज करने का आदेश, चोरी के आरोपियों को कस्टडी में डंडे-बेल्ट से मारा,प्लायर से उंगलिया दबाई – देखें VIDEO

आरपीएफ टीआई देवेश गोल्हानी पर कोर्ट ने केस दर्ज करने आ देश दिया है।
महू के तत्कालीन रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) इंस्पेक्टर देवेश गोल्हानी के खिलाफ स्पेशल रेलवे न्यायिक मजिस्ट्रेट वरूण चौहान ने 31 जुलाई को केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। टीआई गोल्हानी पर चोरी के आरोपी को कस्टडी में डंडे-बेल्ट से बुरी तरह से पीटने और प्लायर से उंगलियां दबाने का आरोप है।
इस मामले में खास बात यह है कि कोर्ट में पेश करने से पहले जब आरोपियों का मेडिकल परीक्षण हुआ तो डॉक्टर ने चोट से इनकार कर दिया। लेकिन शाम को दोबारा कोर्ट के निर्देश पर जांच हुई तो साबित हो गया कि आरोपियों को चोट लगी है। कस्टडी में उनके साथ मारपीट हुई है। इसके बाद कोर्ट ने टीआई गोल्हानी पर धारा 323,330, 166 और 166क में केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट में ये साबित हुआ कि आरोपी रवि और ओंकार के साथ कस्टडी में मारपीट की गई। कोर्ट ने चोट कन्फर्म होने के बाद संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपियों के स्टेटमेंट लिए। जांच बैठाई गई। जांच के बाद कोर्ट ने मेडिकल दस्तावेज और आरोपियों के बयान के आधार पर तत्कालीन टीआई देवेश गोल्हानी और अन्य पुलिसकर्मियों को मामले में प्रथम दृष्ट्या आरोपी माना है। केस की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2024 को होगी।

मामले में तत्कालीन टीआई देवेश गोल्हानी ने आरोपों को झूठा बताते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। जानिए सिलसिलेवार क्या है पूरा मामला…

रेलवे का 50 किलो तांबे का तार चुराने का आरोप

इंदौर में तब आरपीएफ निरीक्षक रहे देवेश गोल्हानी ने 8 मार्च 2024 को तार चोरी के संदेह में आरोपी रवि, निवासी इंदौर को हिरासत में लिया था। गोल्हानी पर दोनों को अवैध तरीके से कस्टडी में रखने का आरोप है। रवि के साथी आरोपी ओंकार को 6 मार्च 2024 को हिरासत में लिया था।

9 मार्च 2024 को रेलवे पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट में दोनों आरोपियों ने शरीर पर चोट के निशान बताते हुए कहा कि आरपीएफ थाना प्रभारी देवेश गोल्हानी और अन्य 3-4 पुलिसकर्मियों के द्वारा उनके साथ बुरी मारपीट की गई है।

पुलिसकर्मियों ने बयान लिया। कोर्ट ने आरोपियों की चोट देखी। दोनों को हाथ पैर-कमर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोट आई थी। कोर्ट पेशी के दौरान आरोपियों की तरफ से एडवोकेट आशीष शर्मा ने आवेदन दिया था। जिसमें पुलिस कस्टडी में मारपीट के आरोप लगाए थे।

मौखिक परिवाद पर ही कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा। जहां से चोट की पुष्टि हुई और कहा गया कि चोट 24 घंटे पुरानी है। आरोपी पुलिस की कस्टडी में थे, इससे माना गया कि चोट इस दौरान ही लगी है।

प्लायर से उंगलियां दबाई, डंडे और बेल्ट से मारा

आरोपी रवि ने कोर्ट को बताया कि 8 मार्च 2024 को उसे आरपीएफ ने पकड़ा और कहा कि उसने रेलवे का तार काटा है।

उसे पुलिस कस्टडी में उलटा लटका कर मारा गया। जिससे कमर, पैर, हाथ, पीठ सहित अन्य जगह चोट लगी।

उंगलियां प्लायर से दबाई गई। डंडे और बेल्ट से पीटा गया। चाकू निकालकर उसे बोला गया कि उंगलियां काट देंगे। जैसा कहा गया है वैसा ही कहना वरना एनकाउंटर कर देंगे।

पुलिस वालों ने कहा कि कोर्ट में चोट के बारे में मत बताना।

महू जीआरपी थाने के दो-तीन लोगों ने मारपीट की

सुबह दोनों आरोपियों के शरीर पर नहीं थे चोट के निशान

दोपहर को एमवाय में फिर हुआ मेडिकल, शरीर पर सूजन, चोट के निशान मिले

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