बेहतर होने की गुंजाइश लिए ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ नवाचार… कौशल किशोर चतुर्वेदी

बेहतर होने की गुंजाइश लिए ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ नवाचार...
आईपीएस पद्म विलोचन शुक्ल ने झाबुआ जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में नवाचारों की एक श्रृंखला सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के बाद अब पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर के रूप में भी नवाचार की शुरुआत कर दी है। मध्य प्रदेश के इंदौर रेलवे स्टेशन पर गवर्नमेंट रेलवे पुलिस ने स्मार्ट पुलिसिंग का एक बेहतरीन नमूना पेश किया है। स्टेशन पर ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ मुहिम के तहत यात्रियों को एक सुरक्षित और सुगम ऑटो राइड देने के लिए क्यूआर कोड की सुविधा शुरु की गई है। इसका विस्तार सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में भी किया गया है।
इंदौर जीआरपी की अनोखी पहल ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ के तहत ऑटो पर क्यूआर कोड चस्पा किया जा रहा है। अगर कोई रेलवे यात्री किसी दुर्व्यवहार या संदिग्ध गतिविधि की शिकायत करना चाहता है या फिर गलती से उसका कोई सामान ऑटो में छूट गया है, तो क्यूआर कोड के माध्यम से ऑटो चालक की पहचान संभव हो सकेगी। इसके अलावा इसमें एक फीडबैक तंत्र भी शामिल किया गया है। इसमें यात्री यात्रा के बाद ऑटो चालक के व्यवहार और सेवा आदि का मूल्यांकन भी कर सकेंगे।
यह पहल रेलवे स्टेशन परिसर और उसके आसपास संचालित होने वाले ऑटो रिक्शा चालकों की पहचान को डिजिटल रूप से सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर केंद्रित है, जिससे रेल यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव मिल सके। इसके तहत जीआरपी इंदौर स्टेशन और उसके आसपास चलने वाले सभी ऑटो चालकों का एक व्यापक सत्यापन और पंजीकरण कर रही है। पंजीकरण प्रक्रिया में प्रत्येक ऑटो चालक का महत्वपूर्ण विवरण जैसे- नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और पुलिस सत्यापन स्थिति को एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक सत्यापित ऑटो रिक्शा पर एक विशेष क्यूआर कोड स्टिकर और एक अद्वितीय पहचान संख्या लगाई जाएगी। कोई भी यात्री अपनी यात्रा शुरू करने से पहले इस क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर चालक की संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह संदिग्ध गतिविधि या फिर आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई को संभव बनाता है। यदि कोई यात्री किसी दुर्व्यवहार या संदिग्ध गतिविधि की शिकायत करना चाहता है या यदि गलती से उसका कोई सामान ऑटो में छूट जाता है, तो क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त हुई जानकारी से ऑटो चालक की त्वरित पहचान संभव हो सकेगी। इसके अलावा इस प्रणाली में एक फीडबैक तंत्र भी शामिल किया गया है, जहां यात्रीगण अपनी यात्रा समाप्त होने के बाद ऑटो चालक के व्यवहार और सेवा का मूल्यांकन कर सकेंगे। यह फीडबैक मैकेनिज्म न केवल चालकों को बेहतर सेवा देने के लिए प्रेरित करेगा बल्कि जीआरपी को भी अनुशासन बनाए रखने में मदद करेगा।
धार्मिक नगरी उज्जैन में आने वाले यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे पुलिस ने इस सराहनीय पहल का विस्तार वहां भी किया है। इसके तहत अब उज्जैन में महिलाएं और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री निश्चिंत होकर ऑटो में यात्रा कर सकेंगे। इंदौर में सफल शुरुआत के बाद अब उज्जैन में भी हमारी सवारी भरोसे वाली नाम से सुरक्षित ऑटो सेवा शुरू की जा रही है। इसके तहत करीब 350 ऑटो चालकों का पुलिस द्वारा वेरिफिकेशन पूरा किया जा रहा है और सत्यापन के बाद उनके ऑटो पर विशेष क्यूआर कोड लगाया जाएगा। यात्री इस कोड को स्कैन कर ऑटो चालक की पहचान, वाहन विवरण और रूट जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे।
निश्चित तौर पर इस नवाचार के तहत सवारियों की सुरक्षा की गारंटी की सराहना की जानी चाहिए लेकिन अगर इसमें पुलिस द्वारा पहले संचालित किये जा चुके प्रीपेड बूथ के अच्छे पहलुओं को भी शामिल कर लिया जाए तो शायद ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ पूरी तरह से यात्रियों की सुरक्षा का पर्याय बन सकती है। और इस व्यवस्था को क्षेत्र विशेष की जगह पूरे मध्य प्रदेश में एक साथ लागू किया जा सकता है। क्यूआर कोड के तहत गंतव्य स्थान तक के किराये को निर्धारित कर एक सूची चस्पा की जा सकती है। साथ ही यह व्यवस्था भी तय की जा सकती है कि संबंधित ऑटो में यात्रा शुरू करने के साथ ही यात्री की सूचना पुलिस तक भी पहुंच सके। तब शायद ‘हमारी सवारी’ पूरी तरह से ‘भरोसे वाली’ साबित हो सकेगी। और ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ टैग पूरी तरह से अपने नाम को चरितार्थ कर पाएगा। और तभी इस व्यवस्था का उद्देश्य अपराधों पर रोक लगाना, यात्रियों में विश्वास बढ़ाना और ऑटो सेवा को पारदर्शी बनाना पूर्णता को प्राप्त करेगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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