Paytm CEO विजय शेखर शर्मा को दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार, बाद में मिली जमानत, जानें क्या है पूरा मामला

दिल्ली पुलिस ने पेटीएम के फाउंडर  विजय शंकर शर्मा को रैश ड्राइविंग करने के आरोप में 22 फरवरी को गिरफ्तार (Arrest) कर लिया था. हालांकि बाद में उन्हें जमानत दे दी गयी थी. मामले के संबंध में दर्ज एक FIR के अनुसार, एक जगुआर लैंड रोवर, जिसे कथित तौर पर विजय शेखर शर्मा द्वारा चलाया जा रहा था, ने अरबिंदो मार्ग पर द मदर्स इंटरनेशनल स्कूल के बाहर डीसीपी (साउथ) के वाहन को टक्कर मार दी थी. घटना 22 फरवरी को हुई और पुलिस ने डीसीपी (साउथ) बनिता मैरी जैकर के ड्राइवर कांस्टेबल दीपक कुमार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी.

डीसीपी साउथ की गाड़ी में मारी थी टक्कर:-दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता सुमन नलवा ने पुष्टि की कि पुलिस ने “शर्मा को गिरफ्तार कर लिया और बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया.” डीसीपी जैकर ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक संपर्क करने पर कांस्टेबल कुमार ने कहा कि वह डीसीपी (जैकर) के साथ तैनात थे और सुबह करीब 8 बजे उनकी गाड़ी को एक पेट्रोल पंप पर ले गए थे. कॉन्स्टेबल प्रदीप ने बताया कि एक ऑपरेटर मेरे साथ था, जब हम मदर्स इंटरनेशनल स्कूल पहुंचे तो वहां ट्रैफिक जाम पाया. मैंने देखा कि लोगों का जमावड़ा अपने बच्चों को (स्कूल के लिए) छोड़ रहा है. मैंने गति धीमी की और प्रदीप को नीचे उतरने को कहा ताकि ट्रैफिक साफ हो सके.

कांन्टेबल ने कहा कि मैं इंतजार कर रहा था कि एक कार साइड से तेज गति से आई और मेरे वाहन को टक्कर मार दी. हरियाणा का रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट था और वह व्यक्ति गाड़ी भगाने में कामयाब हो गया. हमारा वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और प्रदीप ने मुझे सड़क के किनारे पार्क करने के लिए कहा. हमने अपने डीसीपी को सूचित किया और उन्होंने मुझसे कार के बारे में पूछा. हमने उसे बताया कि हमने नंबर नोट कर लिया है और फिर हमने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

पेटीएम ने इस बारे में नहीं दिया कोई जवाब:-प्राथमिकी में, कुमार ने कहा कि वह “ड्राइवर की पहचान कर सकता है”. पुलिस ने परिवहन विभाग की मदद से कार का पता लगाया और पता चला कि यह गुड़गांव की एक कंपनी में पंजीकृत है. कंपनी ने पुलिस को बताया कि उसने वाहन ग्रेटर कैलाश-द्वितीय निवासी शर्मा को दिया था. शर्मा को मालवीय नगर पुलिस स्टेशन बुलाया गया, जहां उन्हें गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा कर दिया गया. हालांकि फोन कॉल, टेक्स्ट मैसेज और ईमेल के जरिए विजय शेखर शर्मा तक पहुंचने के कई प्रयास असफल रहे. संपर्क करने पर पेटीएम के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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