
भोपाल के मेट्रो स्टेशन में ऑटोमैटिक फेयर कनेक्शन सिस्टम लगाने वाली ‘असिस गार्ड’ कंपनी तुर्किये की है।
मध्यप्रदेश के 2 बड़े शहर भोपाल और इंदौर में मेट्रो के ऑटोमैटिक फेयर कनेक्शन सिस्टम लगाने वाली ‘असिस गार्ड’ कंपनी तुर्किये की है। एक साल पहले कंपनी ने 53 स्टेशनों में सिस्टम लगाने के लिए 186.52 करोड़ रुपए में ठेका लिया था। इसी कंपनी को लेकर अब सियासत गरमा गई है।
डॉ. मोहन सरकार में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयर्गीय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा- इसी कंपनी के ड्रोन पाकिस्तान ने भारत पर गिराए थे। मंत्री विजयवर्गीय का विरोध उस समय आया है, जब इंदौर में मेट्रो के कमर्शियल रन को 10 दिन बचे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को भोपाल से वर्चुअल तरीके से कमर्शियल रन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। वहीं, भोपाल में भी मेट्रो का काम कमर्शियल रन के लिए आखिरी दौर में चल रहा है।
कंपनी ने इंदौर और भोपाल के 5-5 यानी 10 स्टेशनों पर सिस्टम भी लगा दिए हैं। वहीं, भोपाल के 3 स्टेशन पर काम चल रहा है। यदि कंपनी का अनुबंध समाप्त होता है तो इंदौर और भोपाल मेट्रो का भविष्य क्या रहेगा।
सबसे पहले जानिए, मंत्री विजयवर्गीय क्या बोले 19 मई को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ‘X’ पर एक पोस्ट लिखी। जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्र सर्वोपरि…भारत विरोधी मानसिकता का कोई स्थान नहीं। हमारे लिए राष्ट्रधर्म सर्वोपरि है। जो भी भारत की संप्रभुता के विरुद्ध खड़ा होगा, वह चाहे कोई भी क्यों न हो, उसके साथ किसी भी प्रकार की सहानुभूति या सहयोग असहनीय है।

मंत्री विजयवर्गीय ने आगे लिखा- गंभीर तथ्य यह है कि यही कंपनी असिस वर्तमान में भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में डिजिटल प्रणाली के कार्य के लिए अनुबंधित है। इस संदर्भ में अधिकारियों को तथ्यों की गहन एवं निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
यदि यह पाया जाता है कि कंपनी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोधी तत्वों से संबंध है अथवा इसके उत्पादों का उपयोग भारत की सुरक्षा के विरुद्ध हुआ है तो कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा। हम राष्ट्र के सम्मान, सुरक्षा और आत्मगौरव के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
मंत्री ने बयान क्यों दिया? कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय ने बताया- सूत्रों के अनुसार, ‘असिस गार्ड’ के ड्रोन कथित तौर पर पाकिस्तान द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किए गए थे। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कंपनी की भूमिका की गहन जांच की जाए। यदि यह साबित होता है कि कंपनी या उसके उत्पाद भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, तो उसका अनुबंध तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।


मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने असिस गार्ड से यह अनुबंध पिछले साल जून में किया था।
अब जानिए, ‘असिस’ को भोपाल-इंदौर में क्या काम मिला एमपी मेट्रो कॉर्पोरेशन ने मेट्रो स्टेशनों पर ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन के लिए साल 2024 में इंटरनेशनल टेंडर कॉल किए थे। कुल 3 कंपनियों ने टेंडर भरे थे। इनमें से एक तुर्किये की असिस इलेक्ट्रॉनिक ब्लिसिम सिस्टमेलेरी भी शामिल है जबकि दो अन्य कंपनी- एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और शेलिंग फॉस्क ग्लोबल डिजिटल टेक्नोलॉजी थीं।
230 करोड़ रुपए के टेंडर कॉल के मुकाबले तुर्किये की कंपनी ने 186 करोड़ 52 लाख रुपए की राशि टेंडर में दी थी। दूसरे स्थान पर एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड ने 204.57 करोड़ का प्रस्ताव सौंपा था। इस हिसाब से तुर्किये की कंपनी को टेंडर हासिल हो गया।
टेंडर मिलने के बाद कंपनी ने स्टेशनों पर सिस्टम लगाने भी शुरू कर दिए। भोपाल में सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन पर गेट्स लगाए जा चुके हैं जबकि डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स में काम चल रहा है।
इंदौर में भी 5 स्टेशन- गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक सिस्टम इंस्टॉल किया जा चुका है। भोपाल और इंदौर के पहले फेस के कुल 53 स्टेशनों पर कंपनी काम करेगी। कंपनी के जिम्मे सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम है। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करेगी।

कंपनी को लेकर क्या फैसला, यह तय नहीं मंत्री विजयवर्गीय के बयान के बाद कंपनी को लेकर मेट्रो कॉर्पोरेशन क्या फैसला लेगी, यह तय नहीं है। अफसर खुलकर नहीं बोल रहे हैं। सिर्फ शासन स्तर से ही कोई फैसला लिए जाने के बाद उसका पालन करने की बात कह रहे हैं। इसे लेकर मंत्रालय में लंबी बैठक भी हो चुकी है।
मेट्रो कॉर्पोरेशन सूत्रों के मुताबिक, टेंडर हुए 1 साल बीत चुका है। 10 स्टेशनों पर कंपनी काम भी कर चुकी है। ऐसे में यदि कंपनी को प्रतिबंधित किया जाता है तो मेट्रो के संचालन में रुकावट आ सकती है, क्योंकि नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया करने में कम से कम 6 महीने का वक्त लगेगा।
इसके लिए फिर से इंटरनेशनल लेवल पर ही टेंडर कॉल करने पड़ेंगे। ऐसे में इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन आगे बढ़ सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी 31 मई को कमर्शियल रन की शुरुआत करने वाले हैं। 10 दिन में सिस्टम को नए सिरे से लगाया जाना संभव नहीं दिख रहा।
तुर्किये की कंपनी क्या काम कर रही कंपनी को एंड-टू-एंड ओपन लूप ईएमवी, एनसीएमसी कार्ड आधारित एएफसी सिस्टम और क्यूआर कोड आधारित टिकटिंग का डिजाइन, निर्माण, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस सिस्टम का हर डिवाइस एक केंद्रीय बैंक ऑफिस एएफसी सिस्टम से जुड़ा रहेगा।

ड्रोन और कई सुरक्षा उपकरण बनाती है असिस गार्ड कंपनी तुर्किये की कंपनी असिस गार्ड ड्रोन सहित कई तरह के उपकरण बनाती है। ये बॉर्डर पर सुरक्षा के काम भी आते हैं। असिस गार्ड रक्षा उद्योग के क्षेत्र में तकनीकी आवश्यकताओं के समाधान विकसित करने के लिए रोटरी विंग सशस्त्र/निरस्त्र ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल विजन, सीमा सुरक्षा प्रणाली और सैन्य वाहन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम विकसित करती है। यह कंपनी अनुकूलित और संशोधित डिजाइन आवश्यकताओं के लिए इंजीनियरिंग सॉल्यूशन देती है।
असिस गार्ड का सोंगर ड्रोन 5 किमी के दायरे में काम करता है पाकिस्तानी सेना ने 9 और 10 मई को भारत पर तुर्किये निर्मित ‘सोंगर’ सशस्त्र ड्रोन लॉन्च किया था। केंद्र सरकार ने भी कहा था कि यह अंकारा स्थित रक्षा कंपनी असिस गार्ड द्वारा विकसित सोंगर ड्रोन है। यह तुर्किये सेना का पहला सशस्त्र ड्रोन है। पाकिस्तानी ड्रोन भारत की सीमा के बहुत नजदीकी इलाकों से लॉन्च किए गए थे।
असिस गार्ड की वेबसाइट पर उत्पाद पोर्टफोलियो पेज पर दी गई जानकारी के अनुसार, सोंगर पांच प्रकारों में उपलब्ध हैं। जिसमें एक गैर घातक भूमिका वाला भी है। पांचों वैरिएंट में उनके हथियारों के आधार पर अंतर किया गया है। 5.56 x 45 मिमी असॉल्ट राइफल, 2 x 40 मिमी ग्रेनेड लाॅन्चर, 6 x 40 ड्रम प्रकार ग्रेनेड लाॅन्चर और 3 x 81 मिमी मोर्टार ग्रिपर। गैर घातक संस्करण में आठ आंसू गैस या धुआं गैस के कनस्तर तक ले जाया जा सकता है।
ग्रेनेड-लॉन्चर संस्करण में नजदीकी हवाई सहायता क्षमता है और यह दो ग्रेनेड तक दाग सकता है। इनकी प्रभावी रेंज 400-450 मीटर है।

कांग्रेस नेता बोले- 230 करोड़ का सौदा- राष्ट्रवाद या सौदेबाजी? तुर्किये की कंपनी को एमपी मेट्रो में ठेका मिलने पर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने ट्वीट कर पूछा है-
भाजपा सरकार ने इंदौर-भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए ₹230 करोड़ का ठेका तुर्किये की असिस गार्ड को दिया है।
यही कंपनी पाकिस्तान को ड्रोन टेक्नोलॉजी सप्लाई करती है। वही ड्रोन, जिनसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला हुआ।
क्या सरकार को यह जानकारी नहीं थी? या जानबूझकर देश की सुरक्षा से समझौता किया गया?
हमारे जवानों को निशाना बनाने वाली कंपनी को भारत में मेट्रो बनाने का ठेका देना क्या राष्ट्रवाद है?
अब सवाल यह है- क्या BJP सरकार राष्ट्रवाद के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही है, जबकि जमीन पर देशविरोधी ताकतों को ही मुनाफा पहुंचा रही है?
क्या ठेके, कमीशन और सौदेबाजी के लिए अब देश की सीमाएं भी गिरवी रखी जाएंगी?
राष्ट्रवाद का असली अर्थ क्या है? देश के दुश्मनों को मुनाफा पहुंचाना या देश के जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना?