“अजाक्स अध्यक्ष संतोष वर्मा के विवादित बयान पर सियासत तेज; गोपाल भार्गव ने पुराने आरोपों को लेकर IAS अवार्ड पर सवाल उठाए, GAD ने नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा”

भोपाल. पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा विधायक गोपाल भार्गव का कहना है कि अजाक्स अध्यक्ष संतोष वर्मा ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करते हुए ब्राम्हणों के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी की है।

विधानसभा सत्र के दौरान वे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से पूछेंगे कि जो अफसर छह माह जेल में रहा, जिसने जज के फर्जी हस्ताक्षर किए और जिसका महिलाओं के प्रति अमर्यादित आचरण का रिकार्ड रहा है उसे भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसी प्रतिष्ठित सेवा में पदोन्नति कैसे मिल गई, आईएएस कैसे अवार्ड हो गया। इनके सभी पुराने मामलों की फिर से जांच की जाना चाहिए।

भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव ने कहा कि अजाक्स के अध्यक्ष संतोष वर्मा को लेकर समाचार पत्रों, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया में जिस तरह की जानकारी सामने आई है उससे यह सामने आ रहा है कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए वर्मा ने इस तरह की बयानबाजी की है। ब्राम्हण की बेटी अपने बेटे के लिए दान में लेने और उससे संबंध जैसे बयान तो कोई मूर्ख व्यक्ति ही दे सकता है।

उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष जेएन कंसोटिया हमेशा मर्यादा में रहे। उन्होंने इस तरह की अमर्यादित टिप्पणियां कभी नहीं की। कोई नेता, जनप्रतिनिधि इस तरह से सार्वजनिक बयान दे तो अलग बात है लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा जो

सिविल सेवा आचरण नियमों से जुड़ी हुई है। शासकीय सेवा में रहकर कोई कैसे इस तरह के वैमनस्यता फैलाने वाले बयान दे सकता है। मुझे तो लगता है कि अपने वर्ग में पूर्व अध्यक्ष कंसोटिया से अधिक लोकप्रिय होंने के लिए उन्होंने यह हथकंडा अपनाया। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।

भार्गव ने कहा कि एक दिसंबर से विधानसभा का सत्र शुरु हो रहा है। वे इस दौरान भोपाल आएंगे। वे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से पूछेंगे कि जो अधिकारी छह माह जेल रह चुका है, जिसने जज के फर्जी हस्ताक्षर किए, जिसका महिला के साथ दुष्कर्म का रिकार्ड है उसे पदोन्नति कैसे मिली, उसे आईएएस अवार्ड कैसे हो गया। आमतौर पर राजनेता भी इस तरह से जातिवादी बयानबाजी नहीं करते है लेकिन वर्मा ने तो मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी है। वे मुख्य सचिव से कहेंगे कि इनके पुराने रिकार्ड निकालकर उनकी जांच की जाए और यदि उन्हें गलत तरीके से आईएएस अवार्ड हो गया है तो इसमें शासन स्तर पर जो कार्यवाही की जाना चाहिए वह करें।

सात दिन में देना है सामान्य प्रशासन विभाग के नोटिस का जवाब

इधर सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक ने समाचार पत्रों में प्रकाशित आईएएस संतोष वर्मा के द्वारा सार्वजनिक रुप से ब्राम्हण समाज की बेटी को अपने बेटे को दान में देने और उससे संबंध बनाने जैसे अनर्गल बयानों के लिए उन्हें नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। वर्मा के बयानों को सिविल सेवा आचरण नियमों का उलल्लंघन और कदाचरण मानते हुए इसके लिए उनके खिलाफ कार्यवाही करने की चेतावनी देते हुए इस पर उनसे सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि वर्मा सात दिन में जवाब नहीं देते है तो राज्य शासन द्वारा इस मामले में उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की जाएगी।

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