मंडीदीप से इंदौर-भोपाल हाईवे को सीधे जोड़ने के लिए बनाए जा रहे 3000 करोड़ के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को कैंसिल करने की तैयारी, जानिए वजह – देखें VIDEO

मंडीदीप से इंदौर-भोपाल हाईवे को सीधे जोड़ने के लिए बनाए जा रहे वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को सरकार कैंसिल करने जा रही है। 3 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट को कैंसिल करने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इंदौर-भोपाल सिक्स लेन एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट के अलाइनमेंट के बीच वेस्टर्न बाइपास का हिस्सा आ रहा है।

मगर, हकीकत में प्रोजेक्ट कैंसिल करने की वजह नेता-अधिकारी और रसूखदारों की जमीनें हैं। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को की थी। जोशी ने अपनी शिकायत में लिखा कि कंसल्टेंट फर्म एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इसका प्रोजेक्ट बनाया।

ये इस तरह बनाया कि अधिकारियों और नेताओं को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक फायदा पहुंचे। इस शिकायत के बाद पीएमओ ने पीडब्ल्यूडी को जांच के निर्देश दिए थे। खास बात ये है कि प्रोजेक्ट के लिए मप्र सड़क विकास निगम ने डीपीआर बनाने का टेंडर जारी कर दिया था। भोपाल और रायसेन जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। अब ये प्रक्रिया रोक दी गई है।

शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 31 अगस्त 2023 को कैबिनेट में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसके तहत फोर लेन रोड के साथ 6 लेन स्ट्रक्चर और दोनों तरफ टू लेन सर्विस रोड का निर्माण होना था। नवंबर 2025 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का टारगेट रखा गया था।

 

मंडे स्टोरी में पढ़िए कैसे हुई प्रोजेक्ट की शिकायत और वो कौन नेता और अधिकारी हैं जिन्होंने प्रोजेक्ट के ले आउट में गड़बड़ी की। पीडब्ल्यूडी ने जांच में किन-किन नेताओं और अधिकारियों की जमीनें बताई हैं।

6 पॉइंट्स में जानिए कब-कब क्या हुआ, कैसे गड़बड़ी की गई…?

1. जून 2023 में इंपावर्ड कमेटी की मंजूरी, अगस्त में कैबिनेट की

पिछले साल जुलाई में उच्च स्तरीय इंपावर्ड कमेटी ने 3 हजार करोड़ की लागत वाले 41 किमी लंबे इस बायपास को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही ट्रेंडिंग फाइनेंस कमेटी की भी सहमति मिल गई थी। इसके बाद 31 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई।

प्रोजेक्ट को दस लेन के हिसाब से बनाने का प्रस्ताव रखा गया। जिसमें सिक्स लेन के स्ट्रक्चर पर फोर-लेन का निर्माण और दोनों तरफ 2-लेन की सर्विस रोड का प्रस्ताव था। इस पर एक रेलवे ओवर ब्रिज, दो फ्लाई ओवर, 15 अंडर पास और दो बड़े जंक्शन बनाए जाने थे। इस बायपास के बनने से जबलपुर या नर्मदापुरम से आने वाले लोगों को 25 किमी की कम दूरी तय करना पड़ती।

बायपास बनाने का काम एनएचएआई और रिंग रोड बनाने की जिम्मेदारी एमपीआरडीसी को सौंपी गई।

2. मार्च 2025 तक 250 हेक्टेयर जमीन होनी थी अधिग्रहित

वेस्टर्न बायपास के लिए रायसेन और भोपाल जिले की लगभग 250 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव था।एग्रीमेंट के मुताबिक, मार्च 2025 तक 80% निजी जमीन का पजेशन सरकार को अपने हाथ में लेना था। भोपाल-रायसेन कलेक्टर के खातों में भूमि अधिग्रहण के लिए मप्र सड़क विकास निगम (आरडीसी) 100-100 करोड़ रुपए जमा कर चुका था।

जमीन अधिग्रहण के लिए धारा-11 और धारा-19 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, और आपत्तियां भी आ चुकी थीं धारा 21 के तहत निजी भूमि धारकों को नोटिस और अवार्ड पारित होने थे।

वेस्टर्न बायपास में पुरातत्व महत्व की इमारतें भी आ रहीं थी।

3. वेस्टर्न बायपास को लेकर अप्रैल में पीएमओ को शिकायत

ये प्रक्रिया पूरी होती उससे पहले 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय को पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने शिकायत की। जोशी ने पत्र में लिखा कि ये रोड बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया के 12 गांव और कोलांस नदी के बहाव क्षेत्र से गुजरने वाली है। इसकी वजह से बड़ा तालाब बर्बाद हो जाएगा।

साथ ही बायपास का 6 किमी एरिया वन क्षेत्र से भी गुजरेगा, यहां फारेस्ट गांव हैं। परियोजना की सोशल इंपेक्ट स्टडी में लिखा कि इससे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जो कि सरासर गलत है। जोशी ने अपनी शिकायत में लिखा कि रोड की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने वाली कंसल्टेंट फर्म एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इस तरह प्रोजेक्ट बनाया कि अधिकारियों और नेताओं को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक लाभ पहुंचे।

पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने पीएम मोदी को बायपास को लेकर शिकायत की।

4. प्रोजेक्ट में 12 किमी का अतिरिक्त हिस्सा जोड़ा गया

जोशी ने शिकायत में लिखा कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने वाली कंसल्टेंट फर्म एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने रिपोर्ट बना्ने से पहले भौतिक सत्यापन नहीं किया बल्कि गूगल मैप के आधार पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई। इस बायपास को झागरिया खुर्द से फंदा कला से जोड़ा जा रहा है।

झागरिया खुर्द में जंक्शन फ्लाइ ओवर बनाया जाएगा। झागरिया से फंदा तक की दूरी 12 किमी है। इसमें तालाब के कैंचमेट का हिस्सा आता है। वहीं, झागरिया से सीहोर तक पहले ही एक फोर लेन बनाया जा रहा है। जो भोपाल-इंदौर नेशनल हाईवे से निजी रिसोर्ट के एक किलोमीटर पहले जुड़ता है।

बायपास रोड के ट्रैफिक को उल्टी दिशा में ले जाने का क्या औचित्य है? इसमें सरकार का करीब 800-900 करोड़ रु. अतिरिक्त खर्च होगा। ये इंदौर तक की दूरी कम नहीं करेगा और ज्यादा बढ़ाएगा।

सर्किल में जो रेड लाइन है वह 12 किमी का एरिया है, जिसे जोड़ा गया है। जबकि उसके पास से गुजर रही ग्रीन लाइन पर पहले से 4 लेन सड़क बन रही है।

5. 12 किमी के एरिया में ही अफसर-नेताओं की जमीनें हैं

दीपक जोशी ने शिकायत में आरोप लगाया कि ये 12 किमी का एरिया इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि इसमें अफसर और नेताओं की जमीनें है। सामान्य प्रक्रिया होती है कि यदि अनिवार्य अग्रिम आधिपत्य का विकल्प न चुना गया हो तो पहले भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी होती है और उसके बाद रोड का टेंडर निकाला जाता है।

इस मामले में जिस दिन भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई उसी दिन टेंडर जारी कर दिया गया, और जिस समय ये प्रक्रिया चल रही थी तब कंपनी को लेटर ऑफ इंटेट भी जारी कर दिया गया। भू-अर्जन के लिए जो अधिसूचना जारी हुई, उसमें पुनर्वास की जरूरत महसूस नहीं की गई।

बाद में धारा 19 की कार्रवाई की गई। इससे साफ है कि अधिसूचना और भूअर्जन के प्रावाधान अलग-अलग है। जो कि भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है।

6. PMO के निर्देश पर PWD की 4 सदस्यीय जांच कमेटी बनी

पीएमओ को शिकायत करने के बाद वहां से प्रदेश सरकार को इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए। पीडब्ल्यूडी ने चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को 4 सदस्यीय कमेटी के गठन के आदेश जारी किए। इस कमेटी को जवाबदारी सोंपी गई कि प्रस्तावित कॉरिडोर के पास पिछले कुछ महीनों में हुई जमीन की खरीद-फरोख्त की जांच करें।

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पीडब्ल्यूडी ने 8 अक्टूबर को मामले की जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया।

बायपास पर इन नेता-मंत्रियों और बिल्डरों की जमीने

बायपास के दायरे में 3200 लोगों की 250 हेक्टेयर जमीन आ रही है। इन 3200 लोगों में कई बिल्डर, नेता, अफसर और रसूखदारों की जमीनें हैं। भू-अर्जन अधिकारी, तहसील हुजूर के दस्तावेजों के मुताबिक पूर्व मंत्री विजय लक्ष्मी साधौ से लेकर रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव के नाम यहां जमीन दर्ज है।

विजय लक्ष्मी साधौ, पूर्व मंत्री

मनोज श्रीवास्तव, पूर्व आईएएस

आयुष्मान डेवलपर्स (राजेश सर्राफ)

धन विद्या रियलटर्स प्रा.लि. (नवीन कुमार जैन, अजय संतोष नागर)

मोती बिल्डर्स (घनश्याम सर्राफ, हुकुमचंद सर्राफ, वीरेंद्र रघुवंशी)

बिटारी डिस्टलरीज प्रा.लि. (रंजीत नारंग)।

महाना वेंचर्स (श्रीकृष्ण राजौरिया)।

विवेकानंद विचारधाम शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति (राजेश कुमार साहू)।

आकृति डेवलपर्स (राजीव व बीडी सोनी)

सिटी इंफ्रावेंचर प्रा.लि. (प्रदीप अग्रवाल)।

नीलेश मारन।

सीए प्रमोद शर्मा।

आशा वर्मा।

विंग कमांडर एसी वाजपेयी।

मेसर्स नयासा डेवलपर्स (अभितेष, प्रतीक जैन)

मैक पैरामाउंट इंफ्रापेंचर प्रा.लि.।

प्रोजेक्ट कैंसिल करने की पूरी तैयारी, अधिग्रहण की प्रक्रिया रोकी

मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि सरकार अब इस प्रोजेक्ट को कैंसिल करने जा रही है। अब प्रोजेक्ट के मामले में पीएमओ का सीधा दखल है। रायसेन जिला प्रशासन के एक अफसर के मुताबिक भू-अर्जन के प्रारंभिक प्रकाशन होने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया को रोक दिया गया है।

भू-अर्जन की प्रक्रिया मार्च 2025 तक पूरी करना थी ऐसा न करने पर अधिग्रहण के लिए मिले 467 करोड़ रुपए लैप्स हो जाएंगे। दूसरी तरफ लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजय मस्के का कहना है कि हमारी जांच अभी चल रही है। इसकी चार बैठकें हो चुकी हैं। एक या दो बैठकें और होना बाकी है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग सरकार को जांच रिपोर्ट सौंप देगा।

पूर्व मंत्री दीपक जोशी की शिकायत के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने लिखा कि ये सड़क MPRDC बना रहा है। इसका उनके मंत्रालय से कोई कनेक्शन नहीं है।

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