यमन में कैद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को मिली मौत की सजा पर 30 दिसंबर 2024 को यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी ने मुहर लगा दी। केरल की रहने वाली निमिषा पर यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है।
इस फैसले पर निमिषा की मां ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। इस पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।
आखिर निमिषा पर हत्या का आरोप कैसे लगा और भारत सरकार क्या उसे बचा पाएगी;
सवाल-1: तलाल अब्दो महदी की हत्या का पूरा मामला क्या है?
जवाब: नर्स निमिषा के यमन पहुंचने और महदी की हत्या के मामले की टाइमलाइन…
- 2008 में केरल के पलक्कड़ की रहने वाली 19 साल की निमिषा प्रिया नौकरी के लिए यमन पहुंची। राजधानी सना में एक सरकारी अस्पताल में उसे नर्स की नौकरी मिल गई।
- 2011 में निमिषा शादी के लिए भारत वापस आईं। उन्होंने कोच्चि के रहने वाले टॉमी थॉमस से शादी की और दोनों यमन आ गए। यहां थॉमस को इलेक्ट्रीशियन के असिस्टेंट की जॉब मिल गई, लेकिन सैलरी बहुत कम थी।
- 2012 में निमिषा ने बेटी मिशाल को जन्म दिया। लेकिन यमन गुजारा करना मुश्किल होने लगा।
- 2014 में थॉमस बेटी के साथ कोच्चि लौट गए, जहां वे ई-रिक्शा चलाने लगे। जबकि निमिषा ने कम सैलरी वाली जॉब छोड़कर क्लीनिक खोलने का फैसला किया। लेकिन यमन के कानून के मुताबिक निमिषा को एक लोकल पार्टनर की जरूरत थी।
- इस दौरान निमिषा की मुलाकात कपड़े की दुकान चलाने वाले महदी से हुई। महदी की पत्नी की डिलीवरी निमिषा ने ही कराई थी।
- जनवरी 2015 में निमिषा बेटी मिशाल से मिलने भारत आईं। महदी भी उसके साथ भारत आया।
- इस दौरान महदी ने निमिषा की शादी की एक तस्वीर चुरा ली। बाद में महदी ने इस तस्वीर में छेड़छाड़ कर निमिषा का पति होने का दावा किया।
- क्लीनिक शुरू करने के लिए निमिषा ने परिवार वालों और दोस्तों से करीब 50 लाख रुपए जुटाए। उसने यमन पहुंचकर क्लीनिक शुरू कर दी।
- निमिषा ने पति और बेटी को यमन बुलाने के लिए कागजी काम शुरू किए, लेकिन मार्च में वहां गृहयुद्ध छिड़ गया और वे लोग यमन नहीं आ पाए।

यमन में गृह युद्ध की वजह से भारत ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए ‘ऑपरेशन राहत’ शुरू किया। यह ऑपरेशन अप्रैल-मई 2015 तक चला, जिसमें 4,600 भारतीयों और करीब एक हजार विदेशी नागरिकों को यमन से निकाला। लेकिन इनमें सिर्फ निमिषा ही भारत नहीं लौट पाईं।
थॉमस ने एक बयान में कहा,
हमने क्लीनिक में बहुत पैसा लगाया था, इसलिए निमिषा वहां से नहीं आई। क्लीनिक जल्द ही अच्छा चलने लगा, लेकिन निमिषा महदी की शिकायतें भी करने लगीं।
2016 में महदी ने निमिषा के साथ शारीरिक उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। उसने निमिषा के क्लीनिक का प्रॉफिट भी हड़प लिया। जब निमिषा ने इस बारे में सवाल किया तो दोनों के रिश्ते खराब हो गए। महदी निमिषा को यमन से बाहर नहीं जाने देना चाहता था, इसलिए उसने निमिषा का पासपोर्ट अपने पास रख लिया।
निमिषा ने पुलिस में महदी की शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन पुलिस ने निमिषा को ही 6 दिनों की हिरासत में ले लिया क्योंकि महदी ने एडिटेड फोटो दिखाकर निमिषा का पति होने का दावा किया।
इसके बाद निमिषा काफी परेशान हो गई। जुलाई 2017 में महदी से पासपोर्ट लेने के लिए निमिषा ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया। लेकिन इसका असर नहीं हुआ। फिर निमिषा ने महदी को ओवरडोज दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमिषा ने महदी के शरीर के टुकड़े कर वाटर टैंक में फेंक दिए। इसके बाद पुलिस ने निमिषा को गिरफ्तार कर लिया। 2020 में अदालत ने निमिषा को मौत की सजा सुनाई, लेकिन इस फैसले पर अमल नहीं हो सका।
थॉमस ने बयान दिया,
निमिषा ने मुझसे कहा कि उसने यह सब मेरे और हमारे बच्चे के लिए किया है। वह आसान रास्ता अपना सकती थी और महदी के साथ रह सकती थी। लेकिन वो ऐसा नहीं करना चाहती थी।

सवाल-2: इस मामले में किस कानून के तहत अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई? जवाब: यमन एक इस्लामिक देश है, जहां शरियत यानी शरिया कानून चलता है। यहां सभी कानूनी फैसले शरिया कानून के मुताबिक ही लिए जाते हैं। इसके चलते यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने निमिषा को महदी की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई। निमिषा ने यमन की सुप्रीम कोर्ट में माफी की अपील दायर की, जिसे 2023 में खारिज कर दिया। इसके बाद यह केस राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी को भेजा गया।
निमिषा के परिवार के वकील सुभाष चंद्रन ने बताया कि शरिया कानून में सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल के आदेश के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी लेना जरूरी है। इस वजह से मौत की सजा के आदेश को राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति रशद ने 30 दिसंबर 2024 को सजा को मंजूरी दे दी।
सुभाष चंद्रन का कहना है,
अगले एक महीने में निमिषा को फांसी दी जा सकती है। हालांकि उसके पास एक शरिया कानूनी विकल्प खुला है। अगर महदी के परिवार वालों ने ‘ब्लड मनी’ ले ली तो वह बच सकती है।
सवाल-3: ‘ब्लड मनी’ क्या होती है और क्या इससे निमिषा को बचाया जा सकता है?
जवाब: शरिया कानून के मुताबिक, पीड़ित पक्ष को अपराधियों की सजा तय करने का हक है। हत्या के मामले में मौत की सजा है, लेकिन पीड़ित का परिवार मनी यानी पैसे लेकर दोषी को माफ कर सकता है। इसे ‘दीया’ या ‘ब्लड मनी’ कहा जाता है, जिसका जिक्र कुरान में भी किया गया है।
इस मामले में ‘ब्लड मनी’ के आधार पर निमिषा को माफी मिल सकती है। इसके लिए महदी के परिवार को कम से कम 3 से 4 लाख डॉलर यानी 2.5 से 3.5 करोड़ रुपए तक ब्लड मनी देनी होगी।
2020 में निमिषा को सजा से बचाने और ब्लड मनी इकट्ठा करने के लिए ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ बनाया गया। इसमें दुनियाभर से लोग निमिषा को बचाने के लिए डोनेशन दे रहे हैं। केरल के एक जाने-माने बिजनेसमैन ने निमिषा को बचाने के लिए 1 करोड़ रुपए देने क ऐलान किया है।
भारत सरकार ने भी हर तरह से मदद करने की बात कही है। 31 दिसंबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
सरकार निमिषा प्रिया के मामले की जानकारी रख रही है और उनके परिवार की मदद के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर मदद करेगी।

सवाल-4: क्या भारत में भी ब्लड मनी देकर माफी मिल सकती है?
जवाबः नहीं। भारतीय संविधान में ब्लड मनी जैसा कोई कानून नहीं है। हालांकि, अगर पीड़ित पक्ष केस वापस लेता है या अपराधी को माफ करता है, तो इसमें अपराध की गंभीरता की जांच की जाती है। भारत के कानून में अपराधों को कंपाउंडेबल ऑफेन्स या नॉन-कंपाउंडेबल ऑफेन्स की कैटेगरी में रखा जाता है।
1. कंपाउंडेबल ऑफेन्स इस कैटेगरी में छेड़छाड़, चोरी, मामूली चोट पहुंचाना जैसे अपराध शामिल हैं। इन मामलों में अगर पीड़ित केस वापस लेता है और दोनों पक्ष सहमति जताते हैं, तो अदालत उन अपराधों को खत्म कर देती है। पीड़ित के केस वापस लेने से आरोपी को राहत मिल सकती है और मामला खत्म हो सकता है। हालांकि, इसमें कोर्ट की मान्यता जरूरी है।
2. नॉन-कंपाउंडेबल ऑफेन्स इसमें हत्या, बलात्कार, गैर-इरादतन हत्या और भ्रष्टाचार जैसे अपराध शामिल हैं। इसमें पीड़ित के केस वापस लेने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया जारी रहती है। इनमें अदालत या पुलिस मामले की जांच और कार्यवाही को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकती। इन मामलों में सरकार या अदालत की इजाजत के बिना केस वापस भी नहीं लिया जा सकता है। ऐसे मामलों में अदालत अभियोजन जारी रखती है, क्योंकि इसका मकसद अपराधी को सजा दिलाना है।
हत्या का मामला नॉन-कंपाउंडेबल ऑफेन्स के तहत आता है। इसलिए भारत में पीड़ित का परिवार दोषी को माफ कर केस वापस नहीं ले सकता है।
सवाल-5: इस पूरे मामले में भारत सरकार ने अब तक क्या किया?
जवाब: 2020 में भारत सरकार ने निमिषा का बचाव करने के लिए वकील के. आर. सुभाष चंद्रन को नियुक्त किया। चंद्रन ने कहा,

वास्तव में निमिषा का महदी को मारने का इरादा नहीं था और वह एक पीड़ित है।

मार्च 2022 में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने निमिषा के केस पर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। सरकार मिनिषा को माफी दिलाने समेत सभी ऑप्शन्स पर विचार कर रही है।
2023 में ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई। इसमें निमिषा की मां प्रेमा कुमारी को यमन भेजने के लिए इजाजत मांगी गई। दरअसल, 2017 में भारत सरकार ने यमन की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था। इमरजेंसी में यात्रा करने वाले लोगों को सरकार से विशेष अनुमति लेनी होती थी।
2024 में भारत सरकार ने प्रेमा कुमारी और निमिषा की 11 साल की बेटी मिशाल को यमन जाने की इजाजत दी। ताकि वे महदी के परिवार वालों को ब्लड मनी लेने के लिए राजी कर लें। लेकिन अब राष्ट्रपति रशद ने निमिषा की सजा पर मंजूरी दे दी है। इसलिए एक महीने के अंदर महदी के परिवार वालों को ब्लड मनी के लिए राजी करना पड़ेगा। ऐसा न होने पर निमिषा को सजा दे दी जाएगी।

सवाल-6: क्या भारत सरकार निमिषा को बचाकर वापस ला सकती है?
जवाब: जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर और विदेश मामलों के जानकार ए के पाशा के मुताबिक, जिस तरह पीएम नरेंद्र मोदी ने कतर में 8 पूर्व नौसैनिकों को मौत की सजा से बचाया था। वैसी मदद केंद्र सरकार इस केस में नहीं कर सकती।
दरअसल, 26 अक्टूबर 2023 को कतर में एक अदालत ने भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद पूर्व नौसैनिकों के परिजनों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। मामले में भारत सरकार ने दखल दिया और 12 फरवरी 2024 को 8 में से 7 पूर्व नौसैनिक रिहाई के बाद भारत लौट गए।

ए के पाशा का कहना है कि यमन के साथ बिगड़ते रिश्तों की वजह से भारत सरकार इस केस को कतर के केस की तरह निपटा नहीं सकती। यमन के हूतियों ने रेड सी में भारतीय नौसेना के जहाजों पर हमले किए थे। साथ ही इजराइल पर हमले में मदद करने की वजह से भारत ने यमन के साथ सभी रिश्ते खत्म कर दिए हैं। ऐसे में भारत सिर्फ ब्लड मनी देकर ही निमिषा को वापस ला सकता है।
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