
यजमानी ब्राह्मण बहुत चतुर होते हैं। कल के भूमि पूजन कार्यक्रम के अचार्य आदरणीय गंगाधर पाठक वेद आचार्य जी को देखकर ह्रदय गौरवांवित हो गया। यह पूजन तो वह संस्कृत में करा रहे थे लेकिन उसका संदेश हिंदी में देते हुए खिंचाई भी करते जा रहे थे। सबसे महत्वपूर्ण कार्य तो आपने ब्राह्मण दक्षिणा मांग कर कर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, संघ प्रमुख सभी यजमान उपस्थित हो ऐसा अवसर कहां मिलता है, सब कुछ तो आपने दे ही दिया है बस जो बचा है वह भी पूर्ण कर दीजिए यही मेरी दक्षिणा है और उन्होंने काशी और मथुरा को भी मुक्त करने की मांग यजमानो के समक्ष रख दी।