‘आत्मनिर्भर भारत’ को लेकर रघुराम राजन ने किया सावधान!

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बुधवार को सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत आयात प्रतिस्थापन  को बढ़ावा देने को लेकर सावधान किया. उन्होंने कहा कि, देश में पहले भी इस तरह के प्रयास हुये हैं लेकिन ये सफल नहीं हो पाये. राजन ने कहा, ‘यदि इसमें (आत्मनिर्भर भारत पहल) इस बात पर जोर है कि शुल्कों को लगाकर आयात का प्रतिस्थापन तैयार किया जायेगा, तो मेरा मानना है कि यह वह रास्ता है जिसे हम पहले भी अपना चुके हैं और यह असफल रहा है. मैं इस रास्ते पर आगे बढ़ने को लेकर सावधान करना चाहूंगा.’

चीन का दिया उदाहरण:-रघुराम राजन बुधवार को भारतीय विद्या भवन के एसपी जैन इंस्टिट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (SPJIMR) के सेंटर फॉर फाइनेंशियल स्टडीज द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के एक्सपोर्टर्स को अपने एक्सपोर्ट को सस्ता बनाए रखने के लिये इंपोर्ट करने की आवश्यकता होती है जिससे आयातित माल का इस्तेमाल एक्सपोर्ट में किया जा सके। उन्होंने इसका चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि, चीन पहले एक निर्यात ताकत के तौर पर ऐसे ही उभरा है। वह बाहर से विभिन्न सामानों को इंपोर्ट करता है उनकी एसेम्बल करता है और फिर उसी सामान का एक्सपोर्ट करता है।

 

टैक्स लगाने के बजाए प्रोडक्शन के लिये बेहतर वातावरण तैयार करने पर जोर:-रघुराम राजन ने कहा कि हमें एक्सपोर्ट के लिए पहले इंपोर्ट करना होगा। उन्होंने कहा कि हाई टैक्स लगाने के बजाए भारत में प्रोडक्शन के लिये बेहतर वातावरण तैयार करने पर जोर देने की बात कही। राजन ने कहा कि सरकार द्वारा लक्षित खर्च लॉन्ग टर्म के लिए लाभकारी हो सकता है। लेकिन, मेरा मानना है कि टोटल खर्च पर नजर रखनी चाहिए और सावधान रहना चाहिए। यह खुली चेक बुक जारी करने का समय नहीं है। लेकिन ऐसे में किसी लक्ष्य को लेकर किया जाने वाला खर्च यदि बुद्धिमानी और सावधानी के साथ किया जाता है तो यह आपको बेहतर रिजल्ट दे सकता है।

सभी पक्षों की सहमति की जरूरी:-रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा कि वास्तविक समस्याओं की पहचान कर सुधारों को आगे बढ़ाना सही है। लेकिन, इस प्रक्रिया में सभी पक्षों की सहमति की जरूरत है। लोगों, आलोचकों, विपक्षी दलों के पास कुछ बेहतर सुझाव हो सकते हैं आप यदि उनमें अधिक सहमति बनायेंगे तो आपके सुधार अधिक और बेहतर ढंग से लागू हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि, मैं यह नहीं कर रहा हूं कि मुद्दों पर लंबे समय तक चर्चा होते रहनी चाहिए। लेकिन, लोकतंत्र में यह महत्वपूर्ण है कि आम सहमति बनाई जाए।

विकास में एक सबसे बड़ी रुकावट भूमि अधिग्रहण:-राजन ने कहा कि ढांचागत सुविधाओं के विकास में एक सबसे बड़ी रुकावट भूमि अधिग्रहण की है, इसमें कुछ तकनीकी बदलावों की आवश्यकता है। भूमि का बेहतर रिकार्ड और स्पष्ट स्वामित्व होना चाहिये। कुछ राज्यों ने इस दिशा में पहल की है। लेकिन, हमें पूरे देश में यह करने की जरूरत है।

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