
पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच मॉस्को में राजनाथ सिंह और चीन के रक्षामंत्री के बीच बातचीत जारी है। एलएसी पर जारी विवाद के बीच यह दोनों देशों के नेताओं के बीच पहली मुलाकात है। इससे पहले चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंग्हे ने राजनाथ सिंह से मिलने का समय मांगा था। खबरों के मुताबिक, चीनी समकक्ष के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बैठक में रक्षा सचिव अजय कुमार और रूस में भारतीय राजदूत डीबी वेंकटेश वर्मा भी मौजूद हैं। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं मई से आमने-सामने हैं। बता दें कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के सिलसिले में रूस में हैं। इससे पहले राजनाथ ने मॉस्को एससीओ-सीएसटीओ-सीआईएस सदस्यों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया।
इस साल की शुरुआत से से ही पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में एलएसी (LAC) पर भारत का चीन के साथ तनाव बरकरार है. चीन की तरफ से यथा स्थिति बदलने के लिए की गई एकतरफा कार्रवाई से (एलएसी पर) तनाव बढ़ा है.पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच ताजा झड़प की बात सामने आई है. इस बार इलाका पैंगॉन्ग झील है. सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी थी चीन की तरफ से 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात को चीनी जवानों ने यहां आक्रामक सैन्य गतिविधि की थी. सूत्रों के हवाले से जानकारी थी कि चीनी सेना ने यहां पर ब्लैक टॉप चोटी पर कब्जा जमाने की कोशिश की थी लेकिन भारतीय सेना को इसकी जानकारी थी और उन्होंने जरूरी कदम उठाकर चीनी सेना को पीछे खदेड़ दिया था.
भारत और चीन के मध्य सीमा पर तनातनी के बीच सेना की तैयारियों का जायजा लेने सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे आज लद्दाख पहुंचे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि हम हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि सीमा पर हालात नाजुक है. सुरक्षा के मद्देनजर कदम उठाए गए हैं. समस्या का हल बातचीत से हो सकता है. सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने हालात का जायजा लिया. आर्मी चीफ ने शुक्रवार को बताया कि जवानों का मनोबल ऊंचा है. हालात गंभीर है. सुरक्षा के मुताबिक एहतियात कदम उठाए गए हैं. चीन के हरकतों को देखते हुए कुछ तैनाती की गई है. यथास्थिति को बरकरार रखेंगे.