अमेरिका ने रेमडेसिविर दवा को दिया फुल अप्रूवल,डब्ल्यूएचओ ने उठाया था सवाल- अब इस दवा से होगा कोरोना का इलाज

 

कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच इसके इलाज में इस्तेमाल हो रही दवाओं को लेकर कई तरह की बातें कही जाती रही हैं। इलाज में प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल के बाद उपचार प्रोटोकॉल में शामिल करने से लेकर, शोध में कारगर नहीं साबित होने तक दवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि कोरोना के इलाज में शुरुआत से ही यह कहा जाता रहा है कि चिकित्सक की निगरानी में ही इलाज किया जाना चाहिए और बिना डॉक्टरी सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।कोरोना वायरस महामारी के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडिसिविर दवा को अमेरिका ने फुल मंजूरी दे दी है. ये मंजूरी अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दी है. रेमडेसिविर ऐसी पहली दवा है, जिसे स्वास्थ्य संस्थाओं ने अस्पताल में भर्ती होने वाले संक्रमित मरीजों को देने के लिए मंजूरी दी है.हालांकि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा पर सवाल उठाया है।

अमेरिका में पहले से ही कोरोना वायरस के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल होता आ रहा था। पहले इसका इस्तेमाल केवल गंभीर संक्रमण वाले मरीजों के लिए होता था लेकिन अब अस्पताल में भर्ती होने वाले संक्रमित मरीजों को देने के लिए मंजूरी दी गई है। अमेरिका के एफडीए द्वारा दी गई मंजूरी इसलिए भी अहम है, क्योंकि अभी पांच दिन पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा पर सवाल उठाया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘सॉलिडेरिटी ट्रायल’ के अंतरिम नतीजे के हवाले से बताया था कि कोरोना के सिलसिले में चार दवाओं का मृत्यु दर कम करने, श्वसन क्रिया को सुचारू करने और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि पर कोई असर नहीं पड़ा। इन चार दवाओं में रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनाविर/रिटोनोविर और इंटरफेरोन शामिल हैं। इन दवाओं का 30 देशों के 405 अस्पतालों में 11 हजार से ज्यादा मरीजों पर परीक्षण किया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के ‘सॉलिडेरिटी ट्रायल’ का उद्देश्य यह जानना था कि इन चारों दवाओं का कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार में कितना असर होता है। परीक्षण के नतीजे से पता चला कि ट्रायल के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनाविर/रिटोनाविर और इंटरफेरोन का कोविड-19 मरीजों पर या तो बेहद कम असर हुआ या फिर वे बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं हुईं।

बता दें कि अमेरिकी कंपनी गिलिएड ने इस दवा को विकसित किया था और तब यह अफ्रीकी देशों में फैले इबोला वायरस संक्रमण के उपचार में प्रयोग की गई थी। हाल के दिनों में कोरोना मरीजों पर भी इसका असर दिखा है। भारतीय दवा कंपनी जायडस कैडिला (Zydus Cadila) समेत कई कंपनियों ने इसका जेनेरिक वर्जन भी लॉन्च किया है। जायडस कैडिला के रेमडेसिविर की कीमत 2,800 रुपये प्रति 100 मिलीग्राम है।

 

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