इंदौर के 12 बड़े अस्पतालों में भर्ती मरीजों की जान खतरे में है, क्योंकि इनके पास आग बुझाने के बेसिक इंतजाम तक नहीं हैं। इनमें सरकारी पीसी सेठी अस्पताल भी शामिल है। इसका खुलासा एक आरटीआई से हुआ है
बता दें कि हाल ही में इंदौर में एक भीषण अग्निकांड में 8 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो चुकी है। इसके बाद भी शहर के जिम्मेदार नहीं जाग रहे।
दरअसल, चर्चित शास्त्री नाम के एक एडवोकेट ने 100 बेड से ज्यादा क्षमता वाले अस्पतालों की फायर एनओसी की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में पता चला है कि कुछ अस्पतालों ने तो फायर सेफ्टी सिस्टम ही पूरा नहीं किया, जबकि कुछ ने सालों से एनओसी का नवीनीकरण नहीं कराया।

महापौर बोले- स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
आरटीआई में हुए खुलासे को लेकर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ पर डाल दी। उनका कहना है कि अस्पतालों की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।
वहीं सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी का कहना है कि पीसी सेठी अस्पताल को तब तक फायर एनओसी नहीं मिलेगी, जब तक वहां का अतिक्रमण नहीं हटाया जाता। सरकार अभी तक अतिक्रमण हटाने का मामला सुलझा नहीं पाई है।
अतिक्रमण के कारण पीसी सेठी में वर्ष 2018 से फायर एनओसी की समस्या बनी हुई है। विभागीय स्तर पर इस संबंध में सभी जगह पत्राचार किया जा चुका है। वहीं अन्य 11 अस्पतालों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर-CMHO को भी दे चुका जानकारी
आरटीआई लगाने वाले एडवोकेट चर्चित शास्त्री का कहना है कि जिन अस्पतालों में सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं, वहां फायर सेफ्टी के बेसिक इंतजाम तक नहीं हैं, यानी अगर आग लगती है तो मरीजों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं होगा। चर्चित ने कहा- उन्होंने इस पूरे मामले में कलेक्टर और सीएमएचओ से शिकायत की है, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

अस्पताल और कमर्शियल बिल्डिंग असुरक्षित
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया ने बताया कि इंदौर कलेक्टर ने अगस्त 2024 में कमर्शियल बिल्डिंग संचालकों को एक महीने के भीतर फायर सेफ्टी के सभी इंतजाम पूरे करने के निर्देश दिए थे। चेतावनी दी थी कि नियमों का पालन नहीं करने पर बिल्डिंग्स को सील किया जाएगा।
इसके बावजूद आज तक न तो पूरी तरह जांच हुई, न ही नियमों का पालन कराया गया। हाल ही में सामने आई आरटीआई जानकारी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने दिए थे निर्देश
दो साल पहले इंदौर में पदस्थ तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने सीएमएचओ और डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज को प्राइवेट नर्सिंग होम और अस्पतालों में सुरक्षा की निगरानी के निर्देश दिए थे।
निर्देश के मुताबिक, नर्सिंग होम और अस्पतालों के पास नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र और बिजली सुरक्षा प्रमाण पत्र होना जरूरी है। सभी नर्सिंग होम, अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों को ऑडिट रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था।
उस समय सभी नर्सिंग होम और अस्पतालों को हर हाल में यह व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सिंह के इंदौर से जाते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

MP के अस्पतालों में आग की बड़ी घटनाएं
- जबलपुर (अगस्त 2022): न्यू लाइफ मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल में आग लगने से 4 मरीजों सहित 8 लोगों की मौत हो चुकी।
- भोपाल (नवंबर 2021): कमला नेहरू बाल अस्पताल में आग से 4 नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी।
- रीवा (दिसंबर 2025): संजय गांधी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में आग लगने से एक नवजात की जान चली गई।