सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस जियो और आरकॉम को स्पेक्ट्रम डील से पूरा ब्योरा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को AGR मामले की सुनवाई की ।पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट में सरकार से दिवालिया प्रक्रिया में गई कंपनियों से AGR की रकम वसूलने के लिए प्लान बनाने के निर्देश दिए थे
इन कंपनियों पर 38,000 करोड़ रुपए का AGR बकाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट टेलीकॉम कंपनियों को AGR की रकम चुकाने के लिए 15 से 20 साल का वक्त देने पर भी फैसला सुना सकता है। सरकार ने कहा है कि दिवालिया कंपनियां स्पेक्ट्रम नहीं बेच सकतीं। सरकार आज दिवालिया हुई कंपनियों पर अपना रुख साफ करेगी। आज टेलीकॉम कंपनियों को 15-20 साल देने की याचिका पर भी फैसला संभव है। सरकार ने AGR के लिए कंपनियों को 20 साल देने की मांग की है। आज दोपहर 3 बजे इस मामले की सुनवाई हो रही है।

जानिए क्या हुआ?

इनसॉल्वेंसी में आईं टेलीकॉम कंपनियों के रेज्योलूशन प्रोफेशनल्स को स्पेक्ट्रम इस्तेमाल की डिटेल देनी है। आर कम्युनिकेशंस और एयरसेल के रेज्योलूशन प्रोफेशनल्स को ये जानकारी भी देनी होगी कि IBC की तहत किन कंपनियों की बोली लगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “हम यह समझ रहे हैं कि रिलायंस जियो अभी रिलायंस कम्युनिकेशंस के स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल कर रहा है।” रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस जियो को स्पेक्ट्रम शेयरिंग एग्रीमेंट का पूरा ब्योरा देने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रिलायंस जियो के साथ हुए स्पेक्ट्रम शेयरिंग एग्रीमेंट को रिकॉर्ड में होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम NCLT या NCLAT के किसी आदेश को मानने के लिए बाधित नहीं है। इस मामले पर सोमवार, 17 अगस्त 3 बजे सुनवाई होगी।

जस्टिस मिश्रा ने कहा, स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल से जुड़े सभी डॉक्युमेंट सोमवार को पेश होना चाहिए।

-रिलायंस जियो के वकील केवी विश्वनाथन ने कहा, मैं इसका इस्तेमाल नहीं कर रहा हूं। मैं इसे शेयर कर रहा हूं और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज हमें मिल रहा है। विश्वानाथ ने कहा, जियो ने AGR का बकाया चुका दिया है लेकिन 2016 से बकाया चुकाने के सवाल पर उन्होंने कहा इसके लिए वक्त की जरूरत है।

-जस्टिस मिश्रा ने रिलायंस जियो के वकील केवी विश्वनाथन से कहा कि आप कैसे जवाबदेही से बच सकते हैं? यह रेवेन्यू शेयरिंग का दौर है। हम आपसे सबकुछ वसूल लेंगे। यह आपकी प्राइवेट प्रॉपर्टी है। यह सरकारी प्रॉपर्टी है। यह लोगों के हित में है। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “रिलायंस जियो को 2016 से क्यों नहीं बकाया चुकाना चाहिए।”

-जस्टिस मिश्रा ने हरीश साल्वे से कहा कि हम AGR के बकाए पर गौर कर रहे हैं। साल्वे SBI की तरफ से इस मामले में दखल देने चाहते हैं।

-आरकॉम के रेज्योलूशन प्रोफेशनल श्याम दीवान ने कहा, “मेरे पास आंशिक जवाब है। स्पेक्ट्रम का कुछ हिस्सा मेरे पास है। मेरे पास रिलांयस जियो के साथ एसेट शेयरिंग में कॉन्ट्रैक्चुअल एग्रीमेंट है। इस बात की जानकारी टेलीकॉम डिपार्टमेंट को दे दी गई है। इस पर टेलीकॉम डिपार्टमेंट को फीस भी दी जा चुकी है।”

-श्याम दीवान ने कहा, जुलाई 2018 में कर्ज देने वाली कंपनियों ने सेटलमेंट के तहत CIRP (Corporate Insolvency Resolution Proceeding) बंद कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अगस्त को सेटलमेंट स्वीकार कर लिया और टाइमलाइन को सख्ती से पालन करने को कहा। श्याम दीवान ने कहा कि पेमेंट 30 सितंबर तक किया जाएगा।

-आरकॉम के रेज्योलूशन प्रोफेशनल श्याम दीवान ने कहा, एरिक्सन अगले 120 दिनों में 550 करोड़ रुपए देकर मामला सेटल करने के लिए तैयार है। NCLAT ने पुराने मैनेजमेंट को रीस्टोर कर लिया है। साथ ही सभी संपत्तियां बेचने का भी अधिकार दे दिया है।

क्या है मामला?

दूरसंचार विभाग के अनुमान के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों पर 1.19 लाख करोड़ रुपए बकाया है। यह बकाया अब तक 26 हजार 896 करोड़ रुपए देने के बाद है। फिलहाल 92 हजार 520 करोड़ रुपए बाकी हैं। वोडाफोन आइडिया ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसने सरकार को 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया है। इससे उसने अब तक कुल 7854 करोड़ रुपए दिया है। कंपनी के सेल्फ इवैल्यूएशन ने इससे पहले इसका बकाया 21 हजार 533 करोड़ रुपए आंका था। इसके साथ ही भारती एयरटेल ने अब तक 18 हजार 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया है, जबकि डीओटी की टेलीकॉम कंपनियों से डिमांड 43 हजार 980 करोड़ रुपए है। कंपनी ने अपने बकाए का आकलन 13 हजार 4 करोड़ रुपए किया है।

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