
“समरसता का सागर”
मध्यप्रदेश के सागर में आज यानि 12 अगस्त 2023 को समरसता का सैलाब नजर आएगा। इस सैलाब के सागर में हर जाति-वर्ग के लोग एकजुट होंगे। यह एकजुटता आपसी प्रेम, सौहार्द और समरसता का अहसास पूरे मध्यप्रदेश को कराएगी। वैसे संत रविदास के मंदिर के लिए सागर का ही चयन क्यों किया गया, यह प्रश्न सबके मन में है। तो उसका जवाब भी सीधा है कि अनुसूचित जाति की आबादी के लिहाज से बुंदेलखंड सराबोर है। इसे चाहे चुनावी लिहाज से कोई माने या फिर समरसता के आकांक्षी समाज से, पर सच दोनों दृष्टि पर असरकारक है। सागर जिले में आठ विधानसभा सीटें हैं, इनमें से दो विधानसभा सीट बीना और नरयावली अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। फिलहाल दोनों सीट भाजपा के खाते में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्यप्रदेश की 3 घंटा 20 मिनट की पूरी यात्रा में से करीब दो घंटे सागर के हिस्से में आएंगे। इसमें संत रविदास की आभा से ओतप्रोत सभा भी होगी। तो विपक्ष के प्रति अविश्वास की वजह भी प्रधानमंत्री की वाणी से उजागर होगी। अविश्वास प्रस्ताव के धराशायी होने और मोदी के भाषण से आहत होकर विपक्ष के बहिर्गमन करने के बाद प्रधानमंत्री की मध्यप्रदेश में पहली सभा है। इस यात्रा में प्रधानमंत्री बुंदेलखंड की धरती पर ही उतरेंगे और विदाई भी वहीं से यानि खजुराहो से होगी। संयोग से यह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का संसदीय क्षेत्र भी है। तो सागर के गागर से भी तीन-तीन मंत्री प्रदेश के मंत्रिमंडल में अपने दिग्गज होने का अहसास करा रहे हैं। उस लिहाज से भी बुंदेलखंड की धरती में सागर के महत्व को आंका जा सकता है।
इस बहाने हम मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की सीटों पर एक नजर डाल लें। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति की सीटें 35 हैं। इनमें से 21 सीटों पर भाजपा विधायक हैं और 14 सीटें कांग्रेस विधायकों के खाते में हैं। मध्यप्रदेश की आबादी की खुबसूरती यह है कि ग्वालियर-चंबल से लेकर मालवा-निमाड़ तक अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व है, भले ही एक क्षेत्र अनुसूचित जाति बाहुल्य दिखे और एक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व कम ही नजर आए। सीटों पर नजर डालें तो अंबाह (मुरैना), गोहद (भिंड), डबरा (ग्वालियर), भांडेर (दतिया), करेरा (शिवपुरी), गुना, अशोकनगर, बीना (सागर), नरयावली (सागर), जतारा (टीकमगढ़), चंदला (छतरपुर), हटा (दमोह), गुन्नौर (पन्ना), रैगांव (सतना), मनगवां (रीवा), देवसर (सिंगरौली), जबलपुर पूर्व, गोटेगांव (नरसिंहपुर), परासिया (छिंदवाड़ा), आमला (बैतूल), पिपरिया (होशंगाबाद), सांची (रायसेन), कुरवाई (विदिशा), बैरसिया (भोपाल), आष्टा (सीहोर), सारंगपुर (राजगढ़), आगर (आगर मालवा), सोनकच्छ (देवास), खंडवा, महेश्वर (खरगोन), सांवेर (इंदौर), तराना (उज्जैन), घट्टिया (उज्जैन), आलोट (रतलाम) और मल्हारगढ़ (मंदसौर) सीटें अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करतीं हैं। कम से कम इनके आसपास की एक या दो सीटों पर अनुसूचित जाति की आबादी अपना हस्तक्षेप रखती है। मध्यप्रदेश की आबादी में अनुसूचित जाति की संख्या करीब 16 फीसदी ही है, पर इनका असर कहीं ज्यादा है।
तो मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 से पहले भाजपा का समरसता कंसेप्ट धरातल पर कितना फलदायी साबित होगा, यह परदा भी साल के अंत में उठ ही जाएगा। पर “समरसता का यह सागर” मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हमेशा याद किया जाएगा। सागर के बडतुमा में भाजपा की प्रदेश सरकार द्वारा 100 करोड़ रूपये की लागत से बनाया जाने वाला संत शिरोमणि गुरू रविदास जी का भव्य मंदिर समरसता का संदेश देता रहेगा। संत रविदास के विचार, शिक्षाएं और प्रेरणा सदियों तथा दशकों से मानवता का मार्गदर्शन कर रही हैं और आगे भी करती रहेंगी…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।