ब्रिटेन के मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट ने 7 बच्चों की जान लेने वाली नर्स को उम्रकैद सुनाई है। इस नर्स का नाम लूसी लेटबी है। सोमवार को कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने पर जज जस्टिस गॉस ने कहा- लेटबी ने अदालत आने से इनकार कर दिया है। लिहाजा, उसकी गैरमौजूदगी में ही सजा का ऐलान किया गया।
लेटबी को काउटेंस ऑफ चेस्टर हॉस्पिटल में 7 बच्चों की हत्या का दोषी पाया गया था। सातों बच्चों को उसने अलग-अलग तरीके से मारा था। इसके अलावा 6 बच्चों को जान से मारने की कोशिश का आरोप भी साबित हुआ। सभी घटनाएं जून 2015 से जून 2016 के बीच अंजाम दी गईं। लेटबी के खिलाफ भारतीय मूल के डॉक्टर रवि जयराम भी गवाह थे।
इस मामले में हैरानी की बात यह है कि सरकारी वकील 9 महीने चली सुनवाई में पुख्ता तौर पर यह नहीं बता सके कि लूसी ने बच्चों की हत्या क्यों की? हालांकि कुछ दावे जरूर किए गए, लेकिन कोर्ट के फैसले में इनका जिक्र नहीं है। यहां इस केस से जुड़ी अहम बातों पर सिलसिलेवार नजर…

लूसी को सजा सुनाने वाले जज जस्टिस गॉस। उन्होंने फैसले में कहा- लूसी का जुर्म हैवानियत से कम नहीं है। इसने जिन बच्चों की जान ली, उनमें से कुछ तो प्री-मैच्योर थे।
मौत तक जेल में
- जस्टिस गॉस ने आदेश दिया है कि लूसी को उन विक्टिम्स के बयानों की कॉपी सौंपी जाएगी, जिन्होंने अदालत के सामने बयान दर्ज कराए हैं और जिनके आधार पर सजा का ऐलान किया गया है।
- ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक लूसी को उसके जुर्मों की सजा उम्रकैद के तौर पर ही मिलनी थी। जिस तरह के संगीन जुर्म उसने किए हैं, उनकी मिसाल ब्रिटेन की मॉडर्न हिस्ट्री में नहीं मिलती। लूसी ब्रिटेन की सिर्फ तीसरी ऐसी महिला है जिसे बाकी उम्र सलाखों के पीछे गुजारनी होगी। जस्टिस गॉस ने फैसले में ‘होल लाइफ ऑर्डर’ शब्द का इस्तेमाल किया है। इसके मायने ये हैं कि 33 साल की लूसी की डेड बॉडी ही अब जेल से बाहर आएगी।
- हालांकि ब्रिटेन के क्रिमिनल लॉ में ऐसी कई व्यवस्थाएं हैं, जिनके आधार पर दोषी को वक्त से पहले भी रिहाई मिल सकती है। कई मामलों में मेंटल हेल्थ और गंभीर बीमारी के आधार पर कुछ कैदियों को रिहा किया गया है। इसका आधार ह्यूमैनिटी यानी मानवता होता है।
जुड़वां बच्चे थे निशाने पर
- अदालत के फैसले में कहा गया- तमाम कत्ल सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिए गए। लेटबी खुद उस सेक्शन में ड्यूटी करना चाहती थी, जहां जुड़वां या इससे ज्यादा बच्चे रखे जाते थे। इनमें से ज्यादातर गंभीर तौर पर बीमार थे। इसमें कोई शक नहीं कि लूसी ब्रिटेन के इतिहास की सबसे खतरनाक चाइल्ड किलर है। उसके जुर्म बयान करना भी मुश्किल है। इसकी वजह से कई फैमिलीज ताउम्र दर्द में गुजरेंगी।
- जस्टिस गॉस ने आगे कहा- लूसी ने लोगों के भरोसे को तोड़ा। उसका जुर्म हैवानियत से कम नहीं है। इसने जिन बच्चों की जान ली, उनमें से कुछ तो प्री-मैच्योर थे और उनका जिंदा रहना वैसे ही मुश्किल था। इसके बावजूद तुमने (लूसी) उन्हें मौत की नींद सुला दिया।

दो बार रिहाई भी मिली
- लेटबी को 7 नवजात बच्चों की हत्या और 6 बच्चों की हत्या करने की कोशिश करने का दोषी पाया गया था। लेटबी पर अक्टूबर 2022 से केस चल रहा था। उस पर जिन बच्चों की हत्या का जुर्म साबित हुआ, उनमें अधिकतर या तो बीमार थे या समय से पहले पैदा हुए थे।
- लूसी को जुलाई 2018 से नवंबर 2020 के बीच तीन बार गिरफ्तार किया गया। हालांकि दो बार छोड़ा भी गया। नवंबर 2020 में लूसी पर आरोप तय हुए थे। उत्तरी इंग्लैंड में मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट की जूरी 22 दिनों तक चर्चा के बाद फैसले पर पहुंची।
- सरकारी वकील निक जॉनसन ने कहा- लूसी सहयोगियों को यह यकीन दिला देती थी कि मौत की वजह बीमारी है। वह अपनी तरफ से बच्चों को नहलाने, कपड़े पहनाने और उनकी तस्वीरें लेने की पेशकश करती थी। वह हर बच्चे की मौत के बाद बहुत खुश नजर आती थी।
- लेटबी के घर से पुलिस को हाथ से लिखा एक नोट भी मिला था। इस पर लिखा था- हां, मैं जालिम हूं। मैंने ही इन घटनाओं को अंजाम दिया। लूसी ने कोर्ट में कहा था- मैंने यह नोट तब लिखा था, जब मुझे दो-तीन बच्चों की मौत के बाद क्लर्क बना दिया गया।
कैसे पकड़ी गई लूसी
- ब्रिटिश मीडिया की कई रिपोर्ट्स पुलिस इन्वेस्टिगेशन की जानकारी देती हैं। इस मामले की शुरू से आखिर तक जांच में डिप्टी सुपरिन्टेंडेंट पॉल ह्यूजेस का अहम रोल रहा। पॉल कहते हैं- जब एक ही हॉस्पिटल में लगातार बच्चों की मौत हुई तो शक हुआ। हमने खुले दिमाग से जांच शुरू की। शुरुआत में ही हम किसी नतीजे तक नहीं पहुंचना चाहते थे।
- पॉल के मुताबिक हमारी नजर किसी संदिग्ध पर थी। ये जांच लंबी चलनी थी और हम कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहते थे। इसलिए जल्दबाजी की कोई गुंजाइश भी नहीं थी। हमने 17 तरह से जांच की। जब यह इन्वेस्टिगेशन शुरू हुई तो टीम में सिर्फ 8 अफसर थे। केस जब अंजाम तक पहुंचा तो टीम में 70 अफसर थे। सबसे ज्यादा मुश्किल उन दर्द में डूबे पेरेंट्स से जानकारी जुटाने में आई, जिनके बच्चों की हत्या की गई थी।

लूसी के घर से पुलिस ने तीन नोट बरामद किए थे। ये उनमें से एक था।
जब भी कोई बच्चा मरा, लूसी ही ड्यूटी पर क्यों थी
- जज जस्टिस गॉस की अदालत ने इस केस की लगातार 9 महीने सुनवाई की। इस दौरान पुलिस ने तमाम साइंटिफिक एविडेंस पेश किए।
- मोटे तौर पर बच्चों को तीन तरीकों से मारे जाने की बात साबित हुई। पहला- बिना दवाई का इंजेक्शन देकर। इससे नसों में वैक्यूम बन जाता है। ये ब्लड तक पहुंचता है और फिर मौत हो जाती है। दूसरा- जबरदस्ती ज्यादा दूध पिलाना और वो भी दूसरों का। तीसरा- इंसुलिन देकर जहर पैदा करना। इससे भी बच्चों की मौत हुई।
- लेटबी ने बचाव में कहा- मैंने किसी बच्चे को नहीं मारा। हॉस्पिटल में सफाई की अच्छी व्यवस्था नहीं थी और वहां स्टाफ को लेकर भी दिक्कतें थीं। बच्चों की मौत इसी वजह से हुई।
- इसके जवाब में सरकारी वकील ने कहा- अगर आपकी बात को सही मान लिया जाए तो ये बताइए कि सभी बच्चों की मौत उस वक्त ही क्यों हुई जब आप शिफ्ट में थीं और ऑन ड्यूटी थीं। इस पर लूसी ने चुप्पी साध ली।
बच्चों को क्यों मारा? क्या एकतरफा प्यार बना वजह?
- लूसी को उम्रकैद जरूर दी गई है, लेकिन इस केस में एक सवालिया निशान अब भी बाकी है और वो ये कि लूसी ने आखिर 7 बच्चों की जान क्यों ली? कोर्ट के फैसले में भी हत्याओं की वजह नहीं बताई गई है। बहरहाल, केस की सुनवाई के दौरान और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में हत्याओं के कुछ संभावित कारण बताए जाते रहे हैं।
- ‘द इंडिपेंडेंट और बीबीसी’ के मुताबिक लूसी ने जिस हॉस्पिटल में बच्चों की जान ली, वो उसी हॉस्पिटल के एक डॉक्टर को एकतरफा तौर पर चाहती थी। वो ये भी चाहती थी कि बच्चों की मौत पर वो डॉक्टर लूसी से सहानुभूति जताए।
- एक और शक ये है कि वो मानसिक तौर पर बीमार थी और उसे बच्चों को मारकर खुशी महसूस होती थी। 2020 में जब उसे तीसरी बार अरेस्ट किया गया तो उसके घर से एक नोट मिला। इस पर लिखा था- मैं जालिम हूं और यह मैंने ही किया है। एक और नोट में लूसी ने लिखा था- मैंने उन्हें इसलिए मारा, क्योंकि मैं उनकी सही देखभाल करने में नाकाम थी।
- एक और नोट जो लूसी के घर से बरामद हुआ। उसमें लिखा था- मैं कभी शादी नहीं करूंगी और न मेरे बच्चे होंगे। मुझे कभी पता ही नहीं चला कि फैमिली कैसी होती है।

यह डायरी भी लूसी के घर से ही बरामद हुई थी। इसमें उसके रूटीन का जिक्र था।
कानून में बदलाव करेंगे सुनक
- लूसी पर फैसला आने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा- सरकार यह तय करेगी कि सजा के ऐलान के वक्त अब कोई दोषी कोर्ट से गैरहाजिर न हो। सुनक का बयान इस लिहाज से अहम है, क्योंकि सजा के ऐलान के वक्त लूसी कोर्ट में मौजूद नहीं थी।
- लूसी से पहले ब्रिटेन की सिर्फ तीन महिलाओं को आखिरी सांस तक कैद दी गई थी। इनके नाम है मायरा हिंडली, रोजमैरी वेस्ट और जोना डेनली। यह कानून 1983 में लाया गया था। इससे पहले मायरा को हत्या का दोषी पाए जाने के बाद 1990 में आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि 2002 में उसकी मौत हो गई थी।
- इसके अलावा दोनों महिलाएं इस वक्त जेल में हैं। रोजमैरी वेस्ट को हत्या के 10 मामलों में सजा मिली। डेनली को तीन लोगों की हत्या का दोषी पाया गया था।