शिवाजी मार्केट विवाद: हाईकोर्ट ने रिवर फ्रंट विस्थापन पर रोक लगाई, कहा—दुकानदारों को जबरन नहीं हटाया जा सकता; विस्थापन केवल उचित प्रक्रिया और आपसी अनुबंध से ही हो

हाईकोर्ट इंदौर ने शिवाजी मार्केट की दुकानों को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि दुकानदार को जबरजस्ती और दबावपूर्वक नहीं हटा सकते।

दरअसल, फरवरी माह में नगर निगम ने शिवाजी मार्केट के दुकानदारों को दुकानें खाली कर सब्जी मंडी के पास स्थित नए कॉम्प्लेक्स में विस्थापित करने हेतु प्रक्रिया के तहत दुकानें खाली करने और लॉटरी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कहा था।

इससे असंतुष्ट सभी दुकानदारों ने एडवोकेट मनीष यादव और विवेक व्यास के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। तब कोर्ट ने सुनवाई करते हुए लाटरी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

कोर्ट में अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट यादव ने तर्क रखते हुए कहा कि 120 दुकानदार वहां पिछले 40 साल से व्यापार कर रहे हैं। सरकार रिवर फ्रंट योजना के चलते एक अवैध बिना नक्शे वाली बिल्डिंग, जिसमें व्यापार की कोई संभावना नहीं है, में दुकानदारों को जबरन शिफ्ट करना चाहती है। यह कार्रवाई लोक परिसर बेदखली अधिनियम के भी खिलाफ है।

यादव के मुताबिक इन तर्कों से सहमत होकर जस्टिस प्रणय वर्मा की सिंगल बेंच ने दुकानदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निगम को आदेशित किया कि निगम उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना दबाव पूर्वक दुकानदारों से दुकानें खाली नहीं करवा सकती। यदि विस्थापन भी करना है तो दोनों पक्षों की मर्जी से एक अनुबंध के तहत किया जाए।

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