इंदौर में प्राइवेट यूनिवर्सिटी के MBA स्टूडेंट की खुदकुशी के केस में 2 साल बाद हुआ चौंकाने वाला खुलासा, सुसाइड से पहले यूट्यूब पर वीडियो किया था अपलोड ; सामने आया सुसाइड नोट – देखे VIDEO

अरुण स्टूडेंट होने के साथ ही एक यू-ट्यूबर था। उसके बड़ी तादाद में फॉलोअर्स थे।

इंदौर में प्राइवेट यूनिवर्सिटी के MBA स्टूडेंट अरुण पटेल (26) की खुदकुशी के केस में 2 साल बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उसका पांच पन्ने का सुसाइड नोट था, यूट्यूब पर आखिरी वीडियो भी उपलब्ध था लेकिन पुलिस कथित दबाव में मामले को टालती रही। पिता ने CM हेल्पलाइन पर लंबी लड़ाई लड़ी तो शिकायत कटवाने (वापस लेने) के लिए चौतरफा दबाए आ गए। बावजूद, वे नहीं माने और आखिरकार स्टूडेंट की मौत के लिए जिम्मेदारों पर पुलिस को नामजद केस दर्ज करना पड़ा।

पांच पन्ने के सुसाइड नोट में उसने आपबीती बयां की थी। जब पुलिस ने मदद नहीं की तो पिता ने कोर्ट में परिवाद दायर करा दिया। अंतत: दो साल बाद 20 अप्रैल 2024 को यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर अनिल पटवारी, प्रोफेसर नीरज डोंगरे, स्टूडेन्ट वंदना, नीरज सावले और एनएसयूआई के तत्कालीन अध्यक्ष रवि चौधरी को आरोपी बनाया है। इन पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का आरोप हैं। सुसाइड 6 मई 2022 को हुआ था। केस दर्ज होने के तीन दिन बाद तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।

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मैं मां-पापा, मेरे प्यारे भाइयों और दोस्तों को इस वीडियो के माध्यम से अलविदा कहना चाहता हूं। कुछ ऐसी बातें कहना चाहता हूं जो जीते जी नहीं कह सकता। मैं ऐसा नही था कि मैं अपने दिल की बात शेयर नही कर सकूं।

पापा आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया लेकिन मैं आपके लिए कुछ नहीं कर पाया। मैं इतने डिप्रेशन में हूं हर चीज से, कि आपको बता भी नहीं सकता। मैंने हर इंसान के लिए बहुत कुछ किया। मां-पापा को छोड़कर, जहां मेरी गलती नहीं थी। वहां भी अपनी गलती मानी।

मैं अपने दोस्तों को नहीं छोड़ सकता था। मुझे इतना टॉर्चर किया गया कॉलेज में, कि मैं बता भी नहीं सकता। मुझे किसी से उम्मीद नहीं थी लेकिन एक होप (उम्मीद) रहती कि कोई मेरे लिए अच्छा नहीं कर रहा तो बुरा मत करो। लेकिन मैं आपके लिए अच्छा कर रहा हूं तो मेरे लिए बुरा क्यों कर रहे हो।

यहां पर सब मेरा यूज कर रहे हैं। छह महीने में मेरे साथ इतना कुछ हुआ है, ऐसा कुछ हुआ कि बता नहीं सकता। मेरी मदद के लिए एक भी दोस्त नहीं आया, जो मेरे साथ खड़ा हो। मैं सबके लिए खड़ा हुआ। मुझे पता है, मेरे पास नहीं है इतनी पाॅवर।

मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं सिर्फ सुन सकता हूं लेकिन एक इंसान कब तक सुन सकता है। कब तक अपने माइंड से डिलीट बटन दबाएगा। लोगों ने मुझे कितना कुछ बोला। चार लोगों के सामने बेइज्जत किया लेकिन मेरी कुछ गलती नहीं थी।

सिर्फ लोगों ने अपना पाइंट सही करने में मुझे इतना नीचे दबा दिया कि मैं कुछ कह नहीं पा रहा। मैं इस वीडियो के माध्यम से यह भी बताना चाहता हूं कि मैं किसी लड़की के लिए जान नहीं दे रहा, न ही किसी दोस्त के लिए। इसलिए जान दे रहा हूं कि अब कोई मेरा यूज नहीं करे।

एक साल उसने मेरा यूज किया। चार साल दोस्तों ने यूज किया लेकिन जब मेरी बारी आई तो मुझे ही हटा दिया गया। मुझे पता है मां-पापा आपको यह बात बताता तो आप इंसाफ नहीं दिला पाते और मैं आप लोगों से भी विनती कर रहा हूं कि आप इस पर ध्यान मत देना।

मेरे भाई को आगे बढ़ाना। बाकी मैने कभी किसी के लिए बुरा नहीं सोचा, मैं सबके लिए खड़ा रहा। मैं बोल रहा हूं मेरी ईमानदारी कोई दूसरा नहीं कह सकता। यह कदम मुझे पता है कि मैं सोच समझकर ले रहा हूं। यह बहुत बड़ा कदम है। इसके बाद मेरी फैमिली का फ्यूचर खत्म हो सकता है। अब मैं यहां नही रह सकता। मैं फेस नहीं कर सकता। मेरे वर्ड आपको नहीं समझ आएंगे। मैं जा रहा हूं…

अरुण।

स्टूडेंट अरुण ने सुसाइड से पहले एक वीडियो भी अपलोड किया था।

अब पढ़िए पांच पेज का सुसाइड नोट…

जय हिन्द दोस्तों!
मैं अरुण पटेल। इंदौर में एमबीए स्टूडेंट हूं। मैं आज इस वीडियों के माध्यम से आप सभी से अपने दिल की बात खुलकर कहना चाहता हूं, जो मेरे साथ कॉलेज में हो रहा है। आप लोगों को पूरा मैटर समझा के जा रहा हूँ, फिर आप देखना कौन निर्दोष है, कौन दोषी।

मेरा एक दोस्त रोहित इसकी लड़ाई नीरज सांवले नाम के लड़के से हुई। उसकी गर्ल फ्रेंड वंदना बीच में आकर बोलने लगी और छुड़ाने लगी। उसने मेरे दोस्त शिवम् और प्रवेश को एक थप्पड़ भी मारा। पर मेरे एक भी दोस्त ने उस लड़की पर हाथ नहीं उठाया। उसको बस इतना कहा की दूर हो जा, बीच में मत आ। इस पूरे मैटर में मेरी बस इतनी गलती थी कि मैं कुछ लोगों के कहने पर प्रवेश को रोकने चला गया।

घटना के कुछ दिन बाद हम रवि चौधरी के साथ में थे। रवि के पास एक कॉल आया कि कुछ लोग एक लड़की को ढूंढ रहे हैं। 10-15 लोगों को लेकर। इसे लेकर मैं डर गया। तब रवि चौधरी ने कहा मत टेंशन लो सब ठीक है, यह नॉर्मल होता है, कॉलेज में लाइफ में। फिर मुझे लगा सब ठीक हो गया।

फिर एक दिन कॉलेज गया लाइब्रेरी में पढ़ाई की। दोपहर 1 बजे के बाद कुंदन नाम के लड़के ने हमें फैकल्टी अनिल पटवारी के बाथरूम मे बंद किया। कहा कि लड़की वाले मारने आ रहे हैं। आधे घंटे तक बंद करके रखा। फिर निकाल के कहा कि टेंशन मत लो। सब ठीक कर देंगे।

फिर वो हमें एक अन्य फैकल्टी नीरज डोंगरे के पास ले गया। वहां का माहौल देखकर मैं डर गया और मुझे रोना आ गया। वे कहने लगे रोने का नाटक मत करो। वहां मौजूद लोगों ने मेरी बेइज्जती की। एक थप्पड़ भी मारा।

कुछ देर बाद मैं कॉलेज से बाहर चला गया। फिर हमारे फैकल्टी ने प्रवेश को फोन किया। वे कहने लगे कॉलेज में आकर सफाई दो। तब प्रवेश के साथ मैं भी चला गया। वहां सबने मुझे कहा कि तेरे बड़े बाल हैं, तूने लड़की छेड़ी है।

मैंने कहा लड़ाई के मैटर में लड़की छेड़ने की बात कहां से आई। तो बोले तुम बदतमीजी मत करो। चुप चाप माफी नामा लिखो। तो हमने माफी नामा लिखा। इतने में मेरे साथ मौजूद प्रवेश को हमारे एक दोस्त रवि चौधरी का कॉल आया। कहने लगा NSUI के प्रेसिडेंट आया था। कह रहा था कि तुम कॉलेज लड़की छेड़ने आते हो?

हालांकि तब हम एचओडी सर के केबिन में थे। तभी वहां सीनियर फैकल्टी आई। इनमें से अनिल पटवारी, नीरज डोंगरे का नाम मुझे याद है। पर और भी सीनियर फैकल्टी थी। फैकल्टी अनिल पटवारी ने मेरे दो बार बाल पकड़ के बोले गुंडा दिखता है। तू गुंडा, तेरा बाप गुंडा, तेरा पूरा खानदान गुंडा है।

फिर फैकल्टी ने कहा कि इनकी टीसी दे दो। फिर कहा टीसी रहने दो इनकी फीस बढ़ा कर 80 हजार तक कर दो। फिर वो हमको नीरज डोंगरे के पास ले के गया। जहां उन्होंने कहा कि मैंने रैगिंग ली।

मैंने कुछ नहीं किया फिर भी इतनी बेइज्ज़ती सही। मैंने वहां एक थप्पड़ खाया और कितना सहूं और कब तक सहूं यार। मतलब ऐसे टॉर्चर कर रहे हैं कि हमने लड़की छेड़ी। जबकि मैंने कुछ नहीं किया।

इतना सब होने के बाद अब मेरे अंदर की जो सहन शक्ति खत्म हो गई। मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा। मैं बस जाते-जाते इतना सा कहना चाहता हूं कि अगर अनिल पटवारी को लगता है बड़े बाल वाला गुंडा होता है तो ठीक है कम से कम जो मेरे अंदर का इंसान है वो अच्छा है।

अब इतना सा ही कहूंगा की मैं अपनी गवाही नहीं देना चाहता। मैंने कुछ नहीं किया। मुझे जबरदस्ती घसीटा जा रहा है। कॉलेज के सीसीटीवी चेक कर सकते हैं। कुछ नहीं किया मैंने। मेरी मौत का जिम्मेदार से यूनिवर्सिटी के वो सभी सीनियर फैकल्टी है खासकर अनिल पटवारी और नीरज डोंगरे वंदना और नीरज सांवले हैं।

मैं जा रहा हूं….।

(सुसाइड नोट के संपादित अंश।)

CM हेल्पलाइन को मजाक बनाते रहे अफसर, परिवाद दायर हुआ तो एक्शन लिया

अरुण के पिता गिरजा पेशे से किसान हैं। बेटे के मामले में सभी सबूत होने के बाद भी जब पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया तो उन्होंने दो साल तक CM हेल्पलाइन में दिया आवेदन ही वापस नहीं लिया। उनका कहना था कि अफसरों की तरफ से कई बार दबाव आया लेकिन वे पीछे नहीं हटे।

पिता के मुताबिक, आरोपी एनएयूआई प्रेंसिडेट रवि ने स्टूडेंट वंदना के साथ एक कॉलेज से आया और यूनिवर्सिटी में बेटे से मारपीट भी की। वह दो साल तक एफआईआर कराने के लिए भटकते रहे। PMO और CM हाउस तक मामले की शिकायत की। पिता जब पुलिस से सुसाइड नोट की कॉपी मांगते तो पुलिस अधिकारी कभी हैदराबाद तो कभी भोपाल साइबर का बताकर सुसाइड नोट की कॉपी नहीं देते थे। आखिरकार दो साल बाद केस दर्ज हो पाया है। अब इंसाफ का इंतजार है।

स्टूडेंट हर महीने यू-ट्यूब से कमाता था 50-60 हजार

पिता गिरजा का कहना है कि अरुण एक यू-ट्यूबर था। हर माह उसके अकाउंट में 50 से 60 हजार रुपए आते थे। लाखों फॉलोअर्स थे। वह काफी खुश मिजाज लड़का था लेकिन आरोपियों ने उसे इतना परेशान किया कि उसने परिवार में एक शादी से वापस आकर अपनी जान दे दी।

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