इंदौर से मंत्री पद की दावेदारी में छह उम्मीदवार; विजयवर्गीय का भविष्य CM फेस तय होने के बाद – देखे VIDEO

मध्य प्रदेश में नई सरकार की तस्वीर साफ हो गई है। इसी के साथ शुरू हो गई है कि इंदौर जिले से अबकी बार मंत्री कौन-कौन? दिलचस्प है कि इस बार दावेदारों की लिस्ट लंबी हो गई है। एक, दो नहीं, बल्कि छह नाम सामने आ गए हैं। चूंकि जिले में इस बार भाजपा ने कांग्रेस का क्लीन स्विप कर दिया है, ऐसे में शहर को ज्यादा तवज्जो देने का दबाव नए मुखिया पर रह सकता है। हम सिलसिलेवार तरीके से बताने जा रहे हैं कि कौन-कौन हो सकता है मंत्री पद का दावेदार और क्यों…

 

विजयवर्गीय सबसे सीनियर लेकिन मंत्री बनने पर संशय

इंदौर-1 से चुनाव जीते कैलाश विजयवर्गीय सबसे सीनियर विधायकों में हैं लेकिन वे अब सिर्फ मंत्री पद से मान जाएंगे, यह बात समर्थकों के गले नहीं उतर रही। उनके कई बयान भी प्रदेश के कुछ बीजेपी नेताओं के विरोधाभासी रहे हैं। वे खुद भी कह चुके हैं कि इंदौर-1 से चुनाव लड़कर सिर्फ विधायक बनने नहीं आया हूं।

चूंकि वे मंत्री पद 10 साल पहले एक फोन पर छोड़ चुके हैं तो ऐसे में समर्थकों को हाईकमान से ज्यादा उम्मीदें हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि जब तक मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय नहीं होगा, विजयवर्गीय को लेकर भी सिर्फ अटकलें लगाई जा सकती हैं। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के सवाल पर विजयवर्गीय ने कहा कि यह हाईकमान तय करेगा। कोई भाजपा कार्यकर्ता ही मुख्यमंत्री बनेगा।

वर्तमान सरकार में दो मंत्री, दोनों ही ग्रामीण क्षेत्र के

शिवराज कैबिनेट में वर्तमान में दो मंत्री तुलसी सिलावट (सांवेर विधायक) और उषा ठाकुर (महू विधायक) हैंl हालांकि ये दोनों ही ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और शहर में इनका सीधा कोई होल्ड नहीं रहा है। इस बार 4 से 7 बार तक जीते विधायकों की लिस्ट लंबी हो गई है, ऐसे में दावेदार बढ़ गए हैं।

 

एक नहीं, तीन दावेदार हैं जो तीन से चार बार के लगातार विजेता

इंदौर शहर के विधायक रमेश मेंदोला प्रदेश में सर्वाधिक मतों से जीतने वाले विधायक हैं तो महेंद्र हार्डिया लगातार 4 बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। दोनों का दावा पिछले उपचुनाव के बाद था लेकिन आपसी खींचतान में इंदौर को होल्ड पर कर दिया गया था। इनके अलावा पूर्व महापौर और चार नंबर सीट से लगातार तीन बार विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ का भी नाम है।

भोपाल, ग्वालियर शहर से बनाए थे मंत्री, सिर्फ इंदौर सिटी को मौका नहीं

– इंदौर की तुलना करें तो भोपाल शहर से भाजपा सरकार में विश्वास सारंग को मंत्री बनाया था।

– ग्वालियर शहर से सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर मंत्री बनाए गए थे।

– जबलपुर शहर में भाजपा के पास एकमात्र विधायक हैं जो कि दो बार के विधायक हैं इसलिए मंत्रिमंडल की सीनियरिटी के दायरे में नहीं आए थे, इस बार वहां भी कई सीनियर नेता जीते हैं।

एक समय इंदौर से थे दो-दो मंत्री

2008 के पहले इंदौर शहर में दो-दो मंत्री थे। कैलाश विजयवर्गीय और लक्ष्मण सिंह गौड़। विजयर्गीय पहली बार 2003 में, लक्ष्मण सिंह गौड़ को 2007 में मंत्री बनाया गया था। कुछ समय बाद गौड़ का निधन हो गया था जबकि कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद 4 जुलाई 2015 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

2016 में मंत्री बनने का मौका मिला तो आपसी लड़ाई में इंदौर हो गया सरकार से बाहर

2020 उपचुनाव के बाद विधायक महेंद्र हार्डिया, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ भी सीनियरिटी के लिहाज से मंत्री पद के दावेदार थे। दावेदारों की सूची जब दिल्ली पहुंची तो इंदौर को लेकर ही सबसे ज्यादा खींचतान मची थी। हालांकि कांग्रेस से भाजपा में आए तुलसी सिलावट और संघ समर्थन से उषा ठाकुर बाजी मार गईं।

कांग्रेस सरकार ने इंदौर से किसी को नहीं बनाया था मंत्री

2018 में जब प्रदेश में कमलनाथ की सरकार आई तब भी इंदौर शहर खाली हाथ रहा। इस दौरान भी कमलनाथ ने अपने मंत्रिमंडल में इंदौर ग्रामीण सीट राऊ के विधायक जीतू पटवारी और सांवेर के विधायक तुलसी सिलावट को मंत्री बनाकर मंत्रिमंडल में जगह दी थी। 2018 से ही कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही इंदौर शहर को कैबिनेट से बाहर रखा।

मुख्यमंत्री बनने के सवाल को टाल गए विजयवर्गीय

विजयवर्गीय ने कहा कि जनता का प्यार है, विश्वास है, मोदीजी का नेतृत्व है, अमित शाहजी की रणनीति है, नड्‌डाजी का नेतृत्व है जिसमें टीम तैयार हुई। मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर कहा कि यह निर्णय जिस प्लेटफॉर्म पर होते हैं, उसका उत्तर कभी मीडिया में नहीं दिया जाता।

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