
गृह मंत्रालय और इंदौर का पुराना नाता है…!
मिश्रा की आमद से बिगड़ जाएंगे भाजपा दफ्तर के समीकरण
इंदौर अभिषेक क़ानूनगो
इंदौर जैसे बड़े शहर की जिम्मेदारी देने के लिए पिछले तीन बार से तो गृह मंत्री स्तर के कद्दावर नेता को ही चुना जा रहा है पहले उमाशंकर गुप्ता फिर बाला बच्चन और अब नरोत्तम मिश्रा को यहां प्रभारी मंत्री बनाकर भेजा गया है जिन लोगों ने तुलसी सिलावट के भरोसे शहर में पैर जमा लिए थे उन्हें अब मिश्रा की आमद परेशान कर सकती है साथ ही इंदौर में उनके सीधे कनेक्शन में कोई विधायक भी नजर नहीं आता जिससे नए सियासी समीकरण बनने की पूरी उम्मीद है
पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और फिर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अपने दौर में यह कह चुके हैं कि प्रभारी मंत्री ही जिले में मुख्यमंत्री की ताकत रखेगा जिला योजना समिति की बैठक के अलावा बड़े ट्रांसफर और तमाम वह फैसले जिसमें मुख्यमंत्री का वीटो पावर लगा होता है वह प्रभारी मंत्री के जिम में ही सो दिए जाएंगे जिन लोगों को कोरोना काल की सियासत के बाद मंत्री तुलसी सिलावट के भरोसे अपनी राजनीतिक चमक नजर आने लगी थी उनके लिए अब नरोत्तम मिश्रा उतने आसान नहीं होंगे जितने की सिलावट हुआ करते थे उन्हें इंदौर से दूर पहुंचा दिया गया है और इसके पीछे भी ज्योति सिंधिया की नजर आ रहे हैं उनके सियासी गणित इन दिनों ग्वालियर लोकसभा के इर्द-गिर्द घूमते दिखाई दे रहे हैं जिसके कारण सिलावट को ग्वालियर का प्रभार मिला है शिवराज सिंह चौहान सरकार में जब उमाशंकर गुप्ता सबसे दमदार मंत्री हुआ करते थे और उनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार था तब उन्हें इंदौर का प्रभारी मंत्री बनाया था तब यहां सुदर्शन गुप्ता और इस कोटे से आने वाले नेताओं को काफी ताकत मिली थी वही बाला बच्चन को कमलनाथ सरकार में इंदौर का प्रभारी मंत्री बनाकर भेजा गया था वह सीधे मुख्यमंत्री कमलनाथ को रिपोर्ट करते थे इंदौर के कांग्रेसियों को उस दौर में कुछ खास हासिल नहीं हो पाया और अब प्रदेश के सबसे कद्दावर मंत्री को इंदौर जिले की जिम्मेदारी सौंप दी गई है नरोत्तम मिश्रा की पटरी इंदौर में किसी विधायक से अब तक तो बैठती दिखाई नहीं दी हां आकाश विजयवर्गीय जरूर पिता कैलाश विजयवर्गीय के जरिए नरोत्तम मिश्रा के दरवाजे पर सबसे पहले खड़े नजर आ सकते हैं इंदौर के कांग्रेस विधायक की भी नरोत्तम मिश्रा से खांसी नजदीकी बीते दिनों पिया सीटों पर चर्चा का विषय बनी रही लेकिन उसके अलावा महेंद्र हार्डिया, मालिनी गौड़ कि मिश्रा से कुछ खास जमती नहीं है हार्डिया तो उनके साथ मंत्रालय में भी रहे हैं लेकिन सियासी पटरी अब तक नहीं बैठ पाए मालिनी गौड़ की सियासत भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है जिसके कारण उनकी मिश्रा से दूरी लाजमी है नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे जरूर अपनी बनाने में माहिर है वह मिश्रा के दरवाजे का रास्ता निकालना जानते हैं भोपाल मैं प्रदेश प्रभारी पहले ही रणदिवे का नाम मिश्रा को समझा कर वहां से भेजेंगे जिसका फायदा इंदौर में मिल सकता है बाकी नेताओं के लिए मिश्रा की आमद अभी मुश्किल का सबब बनी हुई है जैसे ही कल शाम प्रभारी मंत्री की सूची वल्लभ भवन से जारी हुई हर कोई नरोत्तम मिश्रा से अपने पुराने तालुकात को मजबूत करने की जुगत में लग गया
अफ़सर बदल का श्रीगणेश करेंगे मिश्रा
नरोत्तम मिश्रा इंदौर में अपने काम की शुरुआत बड़े अफ़सरों के बदलाव के साथ शुरू कर सकते हैं अभी इंदौर में जितने भी ऐसे अफ़सर है जिनके हाथ में मलाईदार महक में है वो या तो तुलसी सिलावट के ज़रिए यहाँ जमे हुए हैं या सीधा मुख्यमंत्री का कनेक्शन रखते हैं ऐसे में नरोत्तम मिश्रा यहाँ आते ही सबसे पहले कलेक्टर मनीष सिंह और नगर निगम कमिशनर प्रतिभा पाल को बदल सकते हैं